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पीजी के बाद डॉक्टरों को देनी ही होंगी दो साल तक सेवाएं
Tue, 04 Feb 2020 05:00 AM IST
Krishan Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Tue, 04 Feb 2020 05:00 AM IST
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हिमाचल में एमसीआई, डीसीआई से मान्यता प्राप्त डिप्लोमा धारक डाक्टर ही विशेषज्ञ बन सकेंगे। प्रदेश सरकार ने सीनियर रेजीडेंट डॉक्टर पॉलिसी के नियमों में संशोधन कर अधिसूचना जारी की है। पीजी करने पर बांड भरने की शर्त को भी सख्ती से लागू किया गया है। हालांकि इससे पहले भी डॉक्टरों से बांड भरे जाते थे। इसमें डॉक्टरों को हिमाचल में कम से कम दो साल तक सेवाएं देना अनिवार्य किया गया था।
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लेकिन इसमें डॉक्टर बांड मनी जमा कराकर किनारे हो जाते थे, लेकिन अब बांड में हिमाचल में दो साल तक सेवाएं देनी होगी। इस अवधि में डॉक्टर सेवाएं छोड़कर बाहरी राज्यों में नहीं जा सकता। इन डॉक्टरों को पीजी करने के बाद एक साल फील्ड में अपनी सेवाएं देनी होंगी। इसके बाद यह स्पेशलिस्ट डॉक्टर मेडिकल कालेज में सेवाएं देने के लिए अधिकृत होंगे।
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अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य आरडी धीमान ने इसकी अधिसूचना जारी की है। जनजातीय क्षेत्रों में सेवाएं देने के लिए पीजी डाक्टरों को दो अंक अतिरिक्त दिए जाएंगे। सरकार ने यह व्यवस्था इसलिए की है कि डॉक्टर जनजातीय क्षेत्रों में सेवाएं देने के लिए आगे आएं। सरकार का मानना है कि इससे दूर दराज के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सकेगी।
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