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Shimla: चलती ट्रेन में 40 लेखकों ने किया कहानी और कविता पाठ, संगीत सत्र भी आयोजित

Sat, 13 Aug 2022 06:50 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 13 Aug 2022 06:50 PM IST
सार

हिमालय साहित्य, संस्कृति एवं पर्यावरण मंच शिमला की ओर से आयोजित भलकू स्मृति साहित्यिक यात्रा में 40 लेखकों ने भाग लिया। चलती रेल में कहानी, संस्मरण, कविता, गीत, गजल, संगीत के कई सत्र आयोजित किए गए।

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40 writers recited stories, poems in a moving train, Music session also organized
बाबा भलकू स्मृति साहित्यिक यात्रा एवं संवाद में शामिल लेखक। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विश्व धरोहर शिमला-कालका रेललाइन पर चलती ट्रेन में शनिवार को साहित्य का अनूठा संगम देखने को मिला। हिमालय साहित्य, संस्कृति एवं पर्यावरण मंच शिमला की ओर से आयोजित बाबा भलकू स्मृति कालका-शिमला रेल साहित्यिक यात्रा एवं संवाद में 40 लेखकों ने भाग लिया। चलती रेल में कहानी, संस्मरण, कविता, गीत, गजल, संगीत के कई सत्र आयोजित किए गए। शिमला रेलवे स्टेशन से हिमालय क्वीन ट्रेन में लेखकों की यह यात्रा सुबह 10:47 बजे शुरू हुई। यहां रेलवे के तीन वरिष्ठ अधिकारियों स्टेशन अधीक्षक जोगिंदर सिंह बोहरा, प्रिंस सेठी और मुख्य वाणिज्य निरीक्षक अमर सिंह ठाकुर और हिमाचल अकादमी के सचिव डॉ. कर्म सिंह ने ट्रेन को हरी झंडी दिखाई।

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इस दौरान समरहिल स्टेशन के अधीक्षक संजय गेरा और रेलवे अधिकारी व्योम को सम्मानित किया गया। यह साहित्य यात्रा बड़ोग रेलवे स्टेशन तक हुई। यहां से दोपहर के भोजन के बाद लेखक दूसरी गाड़ी से शिमला लौटे। हिमालय मंच के अध्यक्ष एसआर हरनोट ने बताया कि इस रेल यात्रा में सेंट एडवर्ड स्कूल का नौ साल का छात्र अर्जुन मुख्यातिथि था। आयोजन की अध्यक्षता दयानंद पब्लिक स्कूल के 14 वर्षीय छात्र काव्यांश ने की। मंच की मीडिया समन्वयक आरती सूद ने बताया कि 14 अगस्त को सभी लेखक बाबा भलकू के गांव झाझा चायल जाएंगे जहां उनके पुश्तैनी घर के दर्शन कर उनके परिजनों से भी मिलेंगे। गांव में गोष्ठी का आयोजन ग्रामीणों के साथ किया जाएगा।
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यात्रा में याद किया बाबा भलकू का योगदान
पहला सत्र शिमला रेलवे स्टेशन के नाम रहा। यहां लेखकों का सम्मान करने के बाद कालका शिमला रेलवे के इतिहास और भलकू जमादार के योगदान को लेकर जानकारी दी गई। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य दुर्लभ प्रतिभा के धनी मजदूर भलकू जमादार के हिंदुस्तान तिब्बत मार्ग और शिमला कालका रेलवे के सर्वेक्षण में दिए गए अहम योगदान को याद करना था। दूसरा सत्र तारादेवी स्टेशन के नाम था जिसमें जाने माने कवि पत्रकार राकेश रेणु के कविता संग्रह ‘नए मगध में’ का लोकार्पण प्रख्यात साहित्यकार मदन कश्यप ने किया। कैथलीघाट स्टेशन सत्र कहानी और संस्मरण को समर्पित रहा।
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इस सत्र में निलेश कुलकर्णी, राजुकर राज, सुनैनी शर्मा, मलिक राज कुमार, राम किशन शर्मा, घनश्याम मैथिल अमृत, सरिता कुलकर्णी, गुप्तेश्वरनाथ उपाध्याय, डॉ. देवकन्या ठाकुर, भारती कुठियाला और विनय शर्मा ने कहानी और संस्मरण पाठ किए। कविता सत्र बड़ोग रेलवे स्टेशन के नाम से आयोजित किया, जिसमें लेखकों ने अपनी कविताओं और गज़लों के पाठ किए। कनोह स्टेशन के नाम संगीत सत्र रहा। यहां लेखकों का स्वागत वरिष्ठ साहित्य प्रेमी कुल राकेश पंत और कुल राजीव पंत की अगवाई में सोलन के लेखकों, रंग कर्मियों और मीडिया ने हार पहनाकर किया। 

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