फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   1,406 Panchayats of Himachal Pradesh did not spend a single penny on MNREGA, revealed in audit

Himachal: हिमाचल की 1,406 पंचायतों ने मनरेगा में नहीं खर्चा एक भी पैसा, ऑडिट में खुलासा

Mon, 31 Mar 2025 10:26 AM IST
Krishan Singh विश्वास भारद्वाज, शिमला
विश्वास भारद्वाज, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 31 Mar 2025 10:26 AM IST
सार

प्रदेश में सात सालों में 1,406 पंचायतों ने मनरेगा में एक भी पैसा खर्च नहीं किया। 2015 से 2021 तक की सोशल आडिट रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।

विज्ञापन
1,406 Panchayats of Himachal Pradesh did not spend a single penny on MNREGA, revealed in audit
पंचायत - फोटो : संवाद

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में सात सालों में 1,406 पंचायतों ने मनरेगा में एक भी पैसा खर्च नहीं किया। 2015 से 2021 तक की सोशल आडिट रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। साल 2015 में 68, 2016 में 26, 2017 में 34, 2018 में 424, 2019 में 425, 2020 में 418 और 2021 में 11 पंचायतों ने मनरेगा में पैसा खर्च नहीं किया। केंद्र सरकार की ओर से राज्यों के सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम लागू किया गया है। योजना का क्रियान्वयन पंचायतों की ओर से किया जा रहा है। मनरेगा में प्रत्येक ग्रामीण परिवार को साल में 100 दिनों के लिए रोजगार की गारंटी का अधिकार है। 

विज्ञापन

हिमाचल में 120 दिन का रोजगार दिया जा रहा
हिमाचल में 120 दिन का रोजगार दिया जा रहा है। बावजूद इसके पंचायतों की ओर से पैसा खर्च न करना गंभीर मामला है। सोशल ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार सात वर्षों में 10,803 दिव्यांग लोगों ने मनरेगा में काम किया है। साल 2021 में सबसे अधिक 1,877 दिव्यांग लोगों ने मनरेगा में कार्य किया है। इसके अतिरिक्त बीते सात सालों के दौरान वित्त वर्ष 2020-21 में सबसे अधिक 9.96 लाख और वित्त वर्ष 2020-21 में 8.92 लाख लोगों ने मनरेगा में काम किया है। प्रति व्यक्ति प्रति दिन औसत मजदूरी साल 2015-16 में जहां 161.24 रुपये थी 2021-22 में बढ़ कर 202.12 रुपये हो गई। सात सालों में औसत मजदूरी में 40.88 रुपये का इजाफा हुआ है। हिमाचल में बीते साल मनरेगा की दिहाड़ी में 60 रुपये का राज्य सरकार ने योगदान दिया है।

विज्ञापन
विज्ञापन


जनजातीय, दुर्गम और दूरदराज के क्षेत्रों में मनरेगा को लेकर कम रुझान है, इसलिए पंचायतों में पैसा खर्च नहीं हुआ है। सोशल ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार दिव्यांग लोग भी मनरेगा के में रोजगार प्राप्त कर रहे हैं, सात साल में औसत मजदूरी करीब 40 रुपये बढ़ी है, बीते साल दिहाड़ी में 60 रुपये का हिस्सा प्रदेश सरकार का था।- अनिरूद्ध सिंह, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज मंत्री

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed