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हिमाचल में खोजे जाएंगे बाढ़ संभावित क्षेत्र
Shimla
Updated Sun, 03 Aug 2014 05:30 AM IST
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शिमला। हिमाचल में बाढ़ से तबाही मचाने वाले क्षेत्रों को खोजा जा रहा है। लगभग डेढ़ सौ नदी-नालों और खड्डों का पहली बार वैज्ञानिक सर्वेक्षण किया जा रहा है। इनके किनारों की वैज्ञानिक जांच होगी। फ्लड प्रोन क्षेत्रों को चिन्हित किया जाएगा। यह सर्वेक्षण सतलुज, ब्यास, रावी, चंद्रभागा और यमुना जैसी बड़ी नदियों पर तो होगा ही, साथ ही बाढ़ की आशंका से युक्त ऐसी बड़ी नदियों में मिलने वाली उपनदियों, नालों और खड्डों पर भी होगा। यह वैज्ञानिक सर्वेक्षण राज्य सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग, केंद्रीय जल आयोग और केंद्रीय भूमिगत जल बोर्ड कर रहे हैं। इसी सर्वेक्षण को आधार बनाकर केंद्रीय योजनाओं में बजट मांगा जाएगा। इससे जरूरी एहतियात बरत सकेंगे। ऐसे क्षेत्रों का अब तक आंशिक अध्ययन केवल सतलुज पर हुआ है। अब तमाम प्रमुख नदियों पर होगा। आठ अगस्त को फ्लड प्रोन क्षेत्रों के लिए गठित क्षेत्रीय कमेटी की पहली बैठक शिमला में होगी।
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‘हिमाचल में पहली बार सभी प्रमुख नदियों, नालों के किनारों पर फ्लड प्रोन क्षेत्रों की वैज्ञानिक असेसमेंट होने जा रही है। कमेटी की आठ अगस्त की पहली बैठक के बाद अगली रणनीति तय की जाएगी।’ -विनीत चौधरी, अतिरिक्त मुख्य सचिव, सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग
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‘हिमाचल में पहली बार सभी प्रमुख नदियों, नालों के किनारों पर फ्लड प्रोन क्षेत्रों की वैज्ञानिक असेसमेंट होने जा रही है। कमेटी की आठ अगस्त की पहली बैठक के बाद अगली रणनीति तय की जाएगी।’ -विनीत चौधरी, अतिरिक्त मुख्य सचिव, सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग
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