रोजगार देने वाले' मंदिर पर विधानसभा में घमासान
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भाजपा वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाड़ी ने मंदिर हटाने के तौर तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े किए और अपनी पार्टी की सरकार को घेरा। वहीं, नगरीय विकास मंत्री राजपाल सिंह ने माना कि रोजगारेश्वर मंदिर को हटाने में जिस विधि विधान और धार्मिक तरीके का पालन होना चाहिए था, जो नहीं हुआ।
घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि रोजगारेश्वर मंदिर को निर्ममता से ध्वस्त किया गया। आरी से शिवलिंग को काटा गया, हिंदू कर्मचारियों ने शिवलिंग को आरी से काटने से मना किया, तो मुस्लिम कर्मचारियों को बुलाकर कटवाया गया।
औरंगजेब से की मंदिर तोड़ने की तुलना
तिवाड़ी ने मुख्यमंत्री के सचिव, पुलिस कमिश्नर और कलेक्टर की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि औरंगजेब की सेना की तरह रात दो बजे मंदिरों को घेरा गया। तिवाड़ी ने सवाल उठाया कि जब रोजगारेश्वर मंदिर हटाना सही था, तो फिर उसे दुबारा क्यों बनवाया जा रहा है?
राजपाल सिंह ने कहा कि काशी विश्वनाथ और सोमनाथ के मंदरों की भी दुबारा प्रतिष्ठा हुई है। इस पर तिवाड़ी ने कहा कि गजनी और गौरी से सरकार की तुलना क्यों कर रहे हो?
राजपाल सिंह ने कहा कि हिंदू समाज मूर्ति पूजक है, मंदिर पूजक नहीं है। मंत्री ने वेदों व पुराणों का हवाला देते हुए कहा कि शास्त्रों में लिखा है, मार्ग में आए मंदिरों को हटा देना चाहिए, ऐसे राजा को राज करने का अधिकार नहीं, जहां मार्ग में मंदिर आते हों।
राजपाल सिंह ने कहा कि 2011 से लेकर अब तक जयपुर में सड़क और मेट्रो प्रोजेक्ट के बीच में आने वाले 113 धार्मिक स्थलों को हटाया गया, इनमें से 104 मंदिर और 9 मजारें शामिल हैं। 42 धार्मिक स्थलों को पुननिर्माण के लिए जमीन उपलब्ध कराई है।