दर्द-ए-मोहब्बत: वो दो बच्चों की मां है...और 15 साल बाद प्रेमी से शादी कर ली, बेटियां बिलख-बिलख कर रो रहीं
Udaipur Love Story: राजस्थान के उदयपुर जिले में दो बेटियों की मां ने अपने प्रेमी के साथ कोर्ट मैरिज कर ली। वह दो बच्चों को अपने पहले पति के पास छोड़कर चली गई। इस दौरान उसकी बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल था। वह मां से गुहार लगा रहीं थी कि हमें छोड़कर मत जाओ।
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उदयपुर के सलूम्बर इलाके में मां की ममता तार-तार हो गई। नौ महीने कोख में रखकर जन्म देने वाली मां प्रेम के भंवर में ऐसी पड़ी की शादी के 15 साल बाद दो संतान होने के बावजूद अपने प्रेमी से प्रेम का इजहार करके विवाह तक कर लिया। महिला ने गांव में लोन की किश्त लेने वाले फाइनेंस कर्मी से प्रेम कर बैठी और दो अप्रैल को उसने कोर्ट में विवाह कर लिया। शादी के 15 साल बाद महिला के इस निर्णय से पूरा गांव, परिवार और मोहल्ला हैरत में है। बड़ी बात तो यह है कि महिला के एक 10 और एक पांच साल की बालिका हैं, जिनका रो-रोकर बुरा हाल है।
घटना उदयपुर जिले में सलूम्बर क्षेत्र का है, जहां दो अप्रैल को एक व्यक्ति की पत्नी ने शादी के 15 साल बाद एक फाइनेंस कर्मी से शादी तक कर डाली। शादी के बाद उल्टा चोर कोतवाल को डांटे वाली कहावत चरितार्थ हुई और महिला ने एसपी कार्यालय से गुहार कर दी कि उसकी और प्रेमी को पूर्व पति से जान को खतरा है। यही नहीं पति के सामने पत्नी मुखर गई कि अब मैं इसी के साथ रहूंगी। ऐसे में नन्ही बालिकाओं का मां के सामने रो-रोकर बुरा हाल हो गया और गुहार करती रही मां हमें छोड़कर मत जाओ। लेकिन न उसकी मां का दिल पसीजा न ही उसके प्रेमी ने बच्चों की तरफ देखा।
आंखों में आंसू निकल आए...
उदयपुर कलेक्ट्रेट में जिसने भी महिला और बच्चों के बीच जो ममता को तार-तार करने वाला दृश्य देखा, हर एक शख्स की आंखों में आंसू निकल आए। दोनों बच्चियां मां के कदमों में लिपट कर रो-रोकर गुहार कर रही थीं। लेकिन प्रेम में अंधी मां की ममता मर चुकी थी और इश्क का भूत उस पर इस प्रकार सवार था कि बच्चों को अकेला छोड़ प्रेमी के साथ चली गई।
सोचने और समझने की जरूरत...
वास्तव में जिसने भी इस घटना को देखा और सुना होगा, उसके रोंगटे जरूर खड़े हो गए हो कि क्या प्रेम में इतना अंधा होना कहां तक जायज हैं। सोचने और समझने की जरूरत है। कौन सही है और कौन कितना गलत। इन दोनों के बीच आखिर दोनों बालिकाओं का क्या दोष, जो उन्हें रोता-बिखलता छोड़ने पर मजबूर हो गई। कहीं न कहीं कमी सब में रही होगी, तभी तो मां की ममता पर आज ऊंगली उठ रही है।