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Udaipur: मोहनलाल सुखाड़िया विवि का दीक्षांत समारोह, राष्ट्रपति बोलीं- शिक्षा सशक्तिकरण का सर्वश्रेष्ठ माध्यम

Thu, 03 Oct 2024 09:03 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Thu, 03 Oct 2024 09:03 PM IST
सार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के 32वें दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा ही सशक्तिकरण का सर्वोत्तम साधन है। उन्होंने विद्यार्थियों से उच्च आचरण और नैतिकता का पालन करते हुए देश की उन्नति में योगदान देने का आह्वान किया।

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Udaipur: Convocation ceremony of Mohanlal Sukhadia University
दीक्षांत समारोह में उपस्थित राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा है कि शिक्षा ही सशक्तिकरण का सर्वश्रेष्ठ माध्यम है। शिक्षित और सुसंस्कारित व्यक्ति अपने परिवार, समाज और देश की उन्नति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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श्रीमती मुर्मू गुरुवार को उदयपुर के मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के 32वें दीक्षांत समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थीं। राष्ट्रपति ने सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि आज का दिन सिर्फ स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के लिए ही नहीं बल्कि उनके शिक्षकों और अभिभावकों के लिए भी हर्ष और गर्व का है।
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विश्वविद्यालय के विवेकानंद सभागार में आयोजित समारोह की अध्यक्षता राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ किसनराव बागड़े ने की। विशिष्ट अतिथि पंजाब के राज्यपाल व चण्डीगढ़ प्रशासक गुलाबचंद कटारिया रहे। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री और उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा सम्माननीय अतिथि के रूप में मौजूद रहे। प्रारंभ में विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो.सुनीता मिश्रा ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इससे पूर्व राष्ट्रपति मुर्मू के विश्वविद्यालय परिसर पहुंचने पर राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े, पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ प्रशासक गुलाबचंद कटारिया, प्रदेश के उप मुख्यमंत्री व उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा, विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुनीता मिश्रा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम का संचालन कुलसचिव व रजिस्ट्रार वृद्धिचंद गर्ग ने किया।
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दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति ने विभिन्न विषयों के 85 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल तथा 68 शोधार्थियों को विद्या वाचस्पति की उपाधि से नवाजा। दीक्षांत समारोह में कुल 85 विद्यार्थियों को 102 गोल्ड मेडल दिए गए। जिसमें 16 छात्र तथा 69 छात्राएं शामिल हैं। इन गोल्ड मेडल में 8 चांसलर मेडल भी शामिल हैं, जिसमें दो छात्र व 6 छात्राएं हैं। प्रतिवर्ष दिए जाने वाले 9 स्पॉन्सर गोल्ड मेडल के क्रम में डॉ सीबी मामोरिया, प्रो विजय श्रीमाली, प्रो आरके श्रीवास्तव, विजय सिंह देवपुरा, पीसी रांका, प्रो ललित शंकर-पुष्पा देवी शर्मा स्मृति में गोल्ड मेडल दिए गए। इसके साथ ही कुल 68 विद्यार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई, जिसमें 35 छात्राएं और 33 छात्र शामिल थे।

समारोह में जिले के प्रभारी एवं राजस्व व उपनिवेशन मंत्री हेमन्त मीणा, उदयपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद डॉ. मन्नालाल रावत और राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया, उदयपुर ग्रामीण विधायक फूल सिंह मीणा, उदयपुर शहर विधायक ताराचंद जैन, समाजसेवी रविन्द्र श्रीमाली व चंद्रगुप्त सिंह चौहान, एमपीयूएटी के कुलपति अजीत कुमार कर्नाटक, वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. कैलाश सोढाणी, राजस्थान विद्यापीठ के कुलपति एसएस सारंगदेवोत, संभागीय आयुक्त प्रज्ञा केवलरमानी, जिला कलेक्टर अरविन्द पोसवाल सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारीगण, महाविद्यालय के शिक्षक व विद्यार्थीगण उपस्थित रहे।

उच्च आचरण और कर्म से देश का गौरव बढ़ाएं
दीक्षान्त समारोह को संबोधित करते हुए महामहिम राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि शिक्षा के साथ-साथ चरित्र का भी विशेष महत्व है। उन्होंने बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि चरित्र और विनम्रता के बिना मनुष्य हिंसक पशु के समान है। उन्होंने विद्यार्थियों को उच्चतम नैतिक मूल्यों का पालन करते हुए आगे बढ़ने और अपने उच्च आचरण और कर्म से देश को गौरवान्वित करने का आह्वान किया।

सतत सीखने की प्रवृत्ति से ही शिक्षा की उपयोगिता
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि वर्तमान समय तेज गति से हो रहे बदलावों का है। ज्ञान और तकनीक में भी बदलाव हो रहे हैं। शिक्षा की उपयोगिता बनाए रखने के लिए जरूरी है कि सतत सीखने की प्रवृत्ति रखी जाए। विद्यार्थी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्वों में समन्वय रखें। उन्होंने विद्यार्थियों से वर्ष 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने का भी आह्वान किया।

भक्ति और शक्ति का संगम स्थल है मेवाड़
राष्ट्रपति ने कहा कि मेवाड़ और उदयपुर की विभूतियों ने स्वाधीनता संग्राम और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह क्षेत्र सदियों से राष्ट्रीय अस्मिता के संघर्ष का साक्षी रहा है। राणा सांगा, महाराणा प्रताप और भक्तिकाल की महान संत कवयित्री मीराबाई का यह क्षेत्र शक्ति और भक्ति के संगम का क्षेत्र कहा जा सकता है। यहां की जनजाति-बहुल आबादी ने इस क्षेत्र का ही नहीं पूरे देश का गौरव बढ़ाया है। यहां के इतिहास का अध्ययन करना चाहिए। इससे भारत की गौरवशाली परंपराओं के बारे में जानकारी मिलेगी। उन्होंने स्वाधीनता संग्राम में उदयपुर प्रजामण्डल के योगदान को भी रेखाकिंत करते हुए माणिक्य लाल वर्मा, बलवंत सिंह मेहता और भूरेलाल बया और मोहनलाल सुखाड़िया आदि का भी स्मरण किया।


बेटियां हर क्षेत्र में श्रेष्ठ प्रदर्शन कर रही
दीक्षांत समारोह में गोल्ड मैडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों में बेटों की तुलना में बेटियों की अधिक संख्या की जानकारी मिलने पर राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि हमारी बेटियां सभी क्षेत्रों में श्रेष्ठ प्रदर्शन कर रही हैं। यह बहुत खुशी की बात है।

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