दूसरे जंगलों में भी दहाड़ेंगे रणथम्भौर के बाघ
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वन विभाग ने इससे पूर्व सफलतापूर्वक सरिस्का बाघ अभ्यारण्य को रणथम्भौप के बाघों को विस्थापित करके आबाद किया है। सरिस्का में वर्तमान में कुल 9 बाघ-बाघिन और शावक हैं।
दरअसल, रणथम्भौर राष्ट्रीय बाघ परियोजना का क्षेत्रफल करीब 1113 वर्ग किलोमीटर है। इस क्षेत्र में अधिक से अधिक 40 बाघ-बाघिन रह सकते हैं। वर्तमान में बाघों की संख्या देखते हुए इन्हें रहने के लिए कम से कम 2000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र चाहिए।
जंगल के वर्तमान क्षेत्रफल के हिसाब से यहां आनेवाले दिनों में करीब 20 बाघ अधिक हो जाएंगे। इसी कारण शिफ्टिंग की जाएगी। जंगल में बाघ संरक्षण के लिए अनुपात को बनाए रखना जरूरी है।
इन जंगलों में गूंज सकती है दहाड़
शुरूआत सरिस्का (अलवर), दर्रा-मुकुंदरा (कोटा) और कैलादेवी (करौली) से होगी। इसके सफल होने पर रणथंभौर के बाघों को भरतपुर, धौलपुरए, बूंदी, चित्तौडग़ढ़ और राजसमंद के जंगलों में भेजने की संभावना है। रणथंभौर के बाघों को सरिस्का शिफ्टिंग का प्रयोग सफल रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार एक आदर्श स्थिति के तहत एक बाघ को विचरण करने के लिए 40 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्रफल चाहिए होता है। इस टेरेटरी में एक बाघ दूसरे बाघ को बर्दाश्त नहीं करता। वहीं बाघिन को करीब 20 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्रफल खुद के लिए तैयार करती है। एक बाघ की टेरेटरी में तीन से चार बाघिन की टेरेटरी मिली हुई होती हैं।
अस्तित्व पर संकट, विस्थापन ही उपाय
बाघों की संख्या अधिक होने से इनका विचरण क्षेत्र कम हो जाता है और आपसी संघर्ष बढ़ जाता है। क्षेत्र को लेकर आपसी संघर्ष से बाघों की जान को खतरा बना रहता है। इसके अलावा भी कई दुष्परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
जैसे अंत प्रजनन के कारण अनुवांशिक बीमारियां फैल सकती हैं। भोजन की कमी के कारण भी बाघों में संघर्ष हो सकता है। यही नहीं, बाघ जंगल के बाहर निकलकर मानवीय बस्तियों की ओर रुख कर सकते हैं।
संरक्षण को मिलेगी मजबूती
शिफ्टिंग में पहले 4 से 6 वर्ष आयु वाले बाघ-बाघिनों को चुना जाएगा। इस आयु वर्ग के बाघ अधिक ताकतवर और वंश बढ़ाने के लिए उपयुक्त होते हैं।
वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव ओ.पी. मीणा तथा टाइगर वॉच संस्था के फील्ड बायोलोजिस्ट धर्मेंद्र खाण्डल के अनुसार रणथंभौर से बाघों की शिफ्टिंग एक अच्छा काम है। इससे बाघों के संरक्षण के अभियान को और अधिक मजबूती मिलेगी।
राजस्थान के रणथम्भौर में पिछले एक दशक में बाघों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। यहां वर्ष 2005 में 25 बाघ थे, जो 2013 तक 48 हो चुके थे। अब वर्ष 2014 में इनकी संख्या शावकों सहित 62 तक पहुंच गई है।