5 माह के बच्चे के लिए छुट्टी के दिन खुला हाइकोर्ट
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जयपुर में ऐसा पहली बार हुआ जब पांच माह के बच्चे के लिए शनिवार को छुट्टी के दिन भी हाईकोर्ट खुला और उससे संबंधित मामले में सुनवाई हुई। बच्चे ने मां की गोद में ही अदालत में हाजिरी दी। इस अजीबोगरीब मामले के तहत दंपति ने बच्चे को खंडवा के एक साधू को गोद दे दिया था।
उसकी बलि की आशंका के चलते दादा-दादी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने कहा कि बच्चे के अधिकारों का हनन नहीं हो सकता। अदालत ने अंतरिम आदेश दिया कि जब तक इस मामले का फैसला नहीं आ जाता तब तक बच्चा अपने मां-बाप के पास ही रहेगा।
अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। अदालत ने इस मामले में शुक्रवार को नाराजगी जताई थी और शनिवार को परिजनों के साथ बच्चे को भी पेश होने को कहा था। अदालत के आदेश के तहत सुबह 11 बजे इस मामले की सुनवाई शुरू हुई जो डेढ़ बजे तक चली।
कोर्ट ने उठाए गंभीर सवाल
सुनवाई के बाद अदालत ने अंतरिम आदेश शाम पांच बजे सुनाया। अदालत ने सुनवाई पूरी होने तक साधु और दंपति के बीच गोदनामा खारिज कर दिया।
न्यायाधीश बेला एम. त्रिवेदी ने माना कि इतने छोटे बच्चे की समुचित देखभाल मां-बाप ही कर सकते हैं। दादा-दादी व नाना-नानी बच्चे से मिल सकते हैं।
अदालत ने कहा था कि अभी बच्चा छोटा है और उसके भी अपने अधिकार हैं, क्या बच्चे को बलि चढ़ाने के लिए गोद दिया गया है? माता-पिता ने अदालत को संतुष्ट करने का प्रयास करते हुए कहा था बच्चे को पूरी शिक्षा दी जाएगी और विदेश जाने की इच्छा हुई तो पढ़ने के लिए विदेश भी भेजा जाएगा।