Rajasthan: 1300 साल पुराने तारागढ़ दुर्ग की दीवार ढही, परकोटे के नीचे बना नृसिंहधार हनुमान मंदिर क्षतिग्रस्त
बारिश के कारण तारागढ़ दुर्ग के पीछे की दीवार ढह गई। वहीं ग्रामीणों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि तारागढ़ दुर्ग की अनदेखी के कारण ही पहले भी कई जगह पुरानी दीवारें ढह गई।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
रणथंभौर नेशनल पार्क की खंडार रेंज में बने तारागढ़ दुर्ग की पीछे की दीवार भारी बारिश से ढह गई है। जिससे तारागढ़ दुर्ग का एक हिस्सा पूरी तरह से नष्ट हो गया है। वहीं दीवार ढ़हने से नृसिंहधार के हनुमान का मंदिर भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है।
मीडिया रिपोर्टस के अनुसार ग्रामीणों ने बताया कि बारिश से पहले ही वन विभाग के अधिकारियों को बताया था कि दुर्ग की सुरक्षा दीवारों के पास की मोरियों को खोल दिया जाए। जिससे आसानी से पानी निकासी हो जाएगी लेकिन विभाग ने ध्यान नहीं दिया। जिसके कारण दीवार ढह गई। ग्रामीणों ने बताया कि तारागढ़ दुर्ग की अनदेखी के कारण पहले भी पुरानी प्राचीन दीवार कई जगह से ढह गई है। दीवारों की सही से देखरेख की जाती और पहले ही ठीक करवाया जाता तो दुर्ग की शोभा बनी रहती।
बता दें कि तारागढ़ दुर्ग में स्थित नृसिंहधार हनुमान मंदिर प्राचीन मंदिर है। गुफानुमा बड़ी चट्टान के नीचे हनुमानजी की करीब चार फीट ऊंची मूर्ति विराजित है। इसके पास ही भगवान शिव की भी प्रतिमा है। स्थानीय हनुमानजी की पूर्व मुखी और बैठे हुए मुद्रा में क्षेत्र में यह एकमात्र मूर्ति है।