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राजस्थान में टीबी मामलों में 45 फीसदी की वृद्धि, इस तरह बचाई जा सकती हैं 80 लाख जिंदगी
Mon, 03 Jun 2019 03:58 PM IST
आसिम खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: आसिम खान
Updated Mon, 03 Jun 2019 03:58 PM IST
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राजस्थान में पिछले एक साल में टीबी के मामलों में 45 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ये जानकारी दी गई है। बीमारी की निगरानी करने वाले सरकार के आधिकारिक पोर्टल में दी गई जानकारी के अनुसार 2017 में प्रदेश में टीबी के 1,10,044 केस सामने आए थे। जबकि 2018 में 1,59,762 में केस पाए गए हैं।
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राज्य के टीबी अधिकारी डॉ पुरुषोत्तम सोनी ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 2017 में सरकारी और निजी क्षेत्र के चिकित्सकों द्वारा टीबी रोगियों की जानकारी देना अनिवार्य कर दिया था। यही कारण है कि पिछले दो साल में राज्य में टीबी रोगियों की अधिसूचना (नोटिफिकेशन) में यह बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
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केंद्र सरकार ने टीबी के आंकड़ों को दर्ज करने के लिए एक 'रीयल टाइम' पोर्टल 'निक्षय' बनाया है। सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के डॉक्टरों को उनके पास इलाज के लिए आने वाले टीबी रोगियों की सूचना इस पर दर्ज करानी अनिवार्य है।
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चिकित्सा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि राजस्थान देश के उन राज्यों में से एक है जिन पर टीबी की बीमारी का सबसे अधिक बोझ है। ऐसे में प्राइवेट सेक्टर के डॉक्टरों से मिलने वाली अधिसूचना में लगभग 100 फीसदी से भी ज्यादा का इजाफा होना एक बड़ी उपलब्धि है।
2018 में प्राइवेट सेक्टर से 47,125 मामले अधिसूचित हुए जबकि 2017 में यह आंकड़ा 23,438 था। हालांकि राज्य में टीबी रोगियों के ये आंकड़े केवल पंजीयन कराने वाले रोगियों के हैं जबकि वास्तविक संख्या अधिक हो सकती है।
लैन्सेट रिपोर्ट के मुताबिक यदि प्राइवेट सेक्टर को पूरी तरह इस मुहिम में अपने साथ शामिल कर लिया जाए तो अगले 30 साल में भारत में 80 लाख जिंदगियों को बचाया जा सकता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय 2018 में टीबी की अधिसूचना नहीं देने को अपराध घोषित कर दिया गया है।