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सोलह साल बाद रेशमा के शव के लिए खुला भारत-पाक बॉर्डर, बेटी से मिलने गई थी पाकिस्तान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Updated Wed, 01 Aug 2018 02:23 AM IST
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- फोटो : Geo News
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सीमावर्ती क्षेत्र मारवाड़ की बुजुर्ग रेशमा के शव के लिए मंगलवार को सोलह साल बाद भारत-पाकिस्तान बॉर्डर खोला गया। बेटी व बहन से मिलने पाकिस्तान गई रेशमा की तबीयत बिगड़ने के कारण मौत हो गई थी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के दखल के बाद सड़क मार्ग से शव लाने के लिए विशेष अनुमति प्रदान कि गई। इसके बाद पाकिस्तान से रेशमा का शव आया और बॉर्डर पर बरसों बाद गेट खोले गए।
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कागजी कार्यवाही पूरी होने के बाद मुनाबाव में बीएसएफ को शव सौंपा गया और बीएसएफ ने रेशमा का शव उसके बेटे को सौंप दिया। इससे पूर्व वर्ष 2002 में तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह इसी मार्ग से जत्थे के साथ पाकिस्तान स्थित हिंगलाज माता के दर्शन करने पहुंचे थे। जानकारी के अनुसार अपने रिश्तेदारों से मिलने पाकिस्तान गई रेशमा की मौत 25 जुलाई को तबीयत बिगड़ने के कारण हो गई थी।
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रेशमा का शव सुबह पाकिस्तान के मीरपुरखास से रवाना किया गया था, जो दोपहर को पाकिस्तान के अंतिम रेलवे स्टेशन खोखरापार पहुंचा। यहां से शव को जीरो लाइन पर लाया गया। रेशमा का बेटा भी शव के साथ यहां पहुंचा। इमीग्रेशन की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद रेशमा के परिजनों को शव सौंप दिया गया।
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विदेश मंत्री ने दिया था शव लाने का आश्वासन
गौरतलब है कि बाड़मेर के अगासडी गांव निवासी रेशमा पाकिस्तान के सिंध में मथुन चनिया गांव में रह रही अपनी बेटी से मिलने पहुंची थी। रेशमा पाकिस्तान में अपनी बेटी व बहन से मिली। जब उसकी मौत की खबर उसके परिजनों को मिली, तो वे बिलख पड़े और शव की मांग करने लगे।
सुषमा स्वराज के सामने मामला पहुंचा, तो ट्विटर पर हर संभव मदद का आश्वासन दिया था। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के हस्तक्षेप के बाद भारतीय उच्चायोग हरकत में आया। पहले रेशमा का शव भारत-पाकिस्तान के बीच चलने वाली थार एक्सप्रेस से लाने का प्रयास किया गया।
लेकिन औपचारिकताओं के चलते सम्भव नहीं हो पाया। इसके बाद 28 जुलाई को पाकिस्तान के गृह मंत्रालय ने रेशमा का शव सड़क मार्ग से भारत भेजने के आदेश जारी कर दिए। शव के साथ उसके पुत्र साहिब खान को भी भारत भेजे जाने अनुमति प्रदान की गई।