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Hindi News ›   Rajasthan ›   The 60th death anniversary of Mateshwari Jagadamba Saraswati

Sirohi: ब्रह्माकुमारी की पहली मुख्य प्रशासिका की मनाई गई 60वीं पुण्यस्मृति, 1965 तक रही थी संस्थान की कमान

Tue, 24 Jun 2025 06:25 PM IST
सिरोही ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिरोही Published by: सिरोही ब्यूरो Updated Tue, 24 Jun 2025 06:25 PM IST
सार

संस्थान के अतिरिक्त महासचिव एवं मीडिया निदेशक बीके करुणा ने कहा कि जब उन्होंने पहली बार मातेश्वरी को माउंट आबू में देखा तो वे मात्र 20 वर्ष के थे। उनका दिव्य और योगमय व्यक्तित्व अत्यंत प्रभावशाली था।

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The 60th death anniversary of Mateshwari Jagadamba Saraswati
60वीं पुण्यस्मृति दिवस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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ब्रह्माकुमारीज संस्थान की प्रथम मुख्य प्रशासिका मातेश्वरी जगदंबा सरस्वती की 60वीं पुण्य स्मृति दिवस पर समारोह आयोजित किया गया। इस दौरान उनके संगठन विस्तार में योगदान और आदर्श जीवन पर वक्ताओं ने प्रकाश डाला।

अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी बीके मुन्नी दीदी ने कहा कि मातेश्वरी अत्यंत आज्ञाकारी, ईमानदार और निष्ठावान थीं। उन्हें शिवबाबा पर पूर्ण निश्चय था और वे सभी में सद्गुण देखती थीं। उनका मानना था कि अपने श्रेष्ठ कर्मों से दूसरों को प्रेरित किया जा सकता है। उन्होंने कभी भी प्रतिकूल परिस्थितियों में धैर्य नहीं खोया। उनका योगी एवं तपस्वी जीवन आज भी मार्गदर्शक है।

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मुन्नी दीदी ने आगे कहा कि मातेश्वरी ने सभी ब्रह्मा वत्सों की पालन-पोषण बहुत स्नेह और ज्ञान के साथ की। उन्होंने अपने आदर्श आचरण से संगठन के सदस्यों को श्रेष्ठ जीवन की प्रेरणा दी। वरिष्ठ दादियों से उनके तपस्वी जीवन के संस्मरण सुनने को मिले हैं। वे सच्चाई, सफाई और आज्ञाकारिता की प्रतिमूर्ति थीं। कठिन तपस्या के बल पर उन्होंने क्रोधी व्यक्तियों को भी शांति का अनुभव कराया। वे प्रतिदिन रात्रि 2 बजे से योग-साधना करती थीं और ‘हां जी’ भावना को जीवन में उतारा।

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1965 तक निभाई मुख्य प्रशासिका की जिम्मेदारी

संस्थान के अतिरिक्त महासचिव एवं मीडिया निदेशक बीके करुणा ने कहा कि जब उन्होंने पहली बार मातेश्वरी को माउंट आबू में देखा तो वे मात्र 20 वर्ष के थे। उनका दिव्य और योगमय व्यक्तित्व अत्यंत प्रभावशाली था। उन्होंने सभी को आत्मीयता से स्नेह और मार्गदर्शन दिया। हर रात्रि वे सभी सदस्यों की कक्षा लेतीं और गलती करने पर उन्हें प्रेमपूर्वक समझाती थीं। कार्यक्रम का संचालन बीके सुधीर ने किया।

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