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सीकर: खाटूश्यामजी नगरपालिका चुनाव में हाईकोर्ट का फैसला, पुनर्मतदान पर रोक, एक वोट के लिए रात तक टला था चुनाव

Thu, 24 Sep 2026 09:14 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीकर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीकर Published by: प्रिया वर्मा Updated Thu, 24 Sep 2026 09:14 PM IST
सार

राजस्थान हाईकोर्ट ने खाटूश्यामजी नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव को लेकर 25 सितंबर को होने वाले पुनर्मतदान पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने यह आदेश वार्ड 11 की पार्षद और अध्यक्ष पद की प्रत्याशी विनीता पूनिया की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया।

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Sikar: High Court Stays Re-Poll in Khatushyamji Municipal Election, Voting Delayed Till Night Over One Vote
पुनर्मतदान की प्रक्रिया पर रोक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान उच्च न्यायालय ने खाटूश्यामजी नगर पालिका के अध्यक्ष पद के लिए 25 सितंबर को होने वाली पुनर्मतदान की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। न्यायाधीश अनूप कुमार ढंढ़ की एकलपीठ ने वार्ड संख्या 11 से निर्वाचित पार्षद एवं अध्यक्ष पद की प्रत्याशी विनीता पूनिया की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया।

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अदालत में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मेजर आरपी सिंह ने तथ्य प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि खाटूश्यामजी पालिका के कुल 20 वार्डों के लिए 9 सितंबर को पार्षदों का चुनाव हुआ था, जिसके परिणाम 14 सितंबर को घोषित किए गए थे। इसके बाद अध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें विनीता पूनिया समेत दो प्रत्याशी मैदान में थे। इस पद के लिए 21 सितंबर को सुबह 10 से दोपहर 2 बजे के बीच मतदान तय किया गया था, जिसके तुरंत बाद मतगणना होनी थी।
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बताया गया कि निर्धारित अवधि के भीतर कुल 20 में से 19 निर्वाचित पार्षद अपने मताधिकार का प्रयोग कर चुके थे। इस दौरान केवल वार्ड संख्या 10 की पार्षद लक्ष्मीदेवी वोट डालने नहीं आई थीं। याचिका में आरोप लगाया गया कि इसके बावजूद रिटर्निंग अधिकारी ने मतदान का समय लगभग पांच बार आगे बढ़ाया, जिससे ये प्रक्रिया रात करीब 11:30 बजे तक खिंच गई। इसके बाद मतपेटी को सील कर स्ट्रांग रूम में रख दिया गया और चुनाव स्थगित कर दिया गया।
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याचिका में तर्क दिया गया कि जब 19 पार्षद पहले ही वोट डाल चुके हैं तो पूरी चुनाव प्रक्रिया दोबारा शुरू करने के बजाय डाले गए मतों की ही गिनती करके परिणाम घोषित किया जाना चाहिए। प्रत्येक निर्वाचित पार्षद के मतदान करने तक प्रक्रिया रोककर रखना और पुनः मतदान कराना नियमों के अनुकूल नहीं माना जा सकता। इसके बाद याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पुनर्मतदान की प्रक्रिया पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं

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