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आसाराम की राजदार शिल्पी ने किया समर्पण
समीर शर्मा/जयपुर
Updated Wed, 25 Sep 2013 10:17 PM IST
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नाबालिग से दुराचार मामले की अहम कड़ी और आसाराम की राजदार शिल्पी ने बुधवार को जोधपुर जिला एवं सत्र न्यायालय में सरेंडर कर दिया।
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शिल्पी मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा गुरुकुल स्थित हॉस्टल की वार्डन थी। उसी ने युवती को आसाराम के पास भेजा था। समर्पण से आधे घंटे पहले ही जोधपुर हाईकोर्ट ने उसकी अग्रिम जमानत अर्जी खारिज कर दी थी।
इधर, जोधपुर सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में बंद आसाराम के पुत्र नारायण साईं भी खुद पर लग रहे आरोपों के बीच जोधपुर पहुंचे। वे आसाराम से जेल में मुलाकात कर सकते हैं।
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जोधपुर पुलिस का खोखला दावा
जोधपुर पुलिस के लिए इस मामले में शिल्पी उर्फ संचिता गुप्ता अहम कड़ी है। जोधपुर पुलिस पहले कह चुकी थी कि शिल्पी उनकी रेंज में है। जब जरूरत पड़ेगी गिरफ्तार कर लेंगे लेकिन शिल्पी के खुद जोधपुर पहुंचकर समर्पण करने से जोधपुर पुलिस का यह दावा खोखला साहित हो गया।
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जोधपुर होते हुए भी पुलिस को उसकी उपस्थिति की भनक तक नहीं लगी। सूत्रों के मुताबिक शिल्पी नियमित रूप से छात्राओं और महिलाओं को आसाराम के पास भेजती थी।
पूछताछ शुरू, पेशी कल
शिल्पी के समर्पण करते ही जोधपुर पुलिस ने पूछताछ शुरू कर दी है। हालांकि पुलिस इस मामले में छिंदवाड़ा में भी शिल्पी से पूछताछ कर चुकी थी।
मुख्य आरोपी आसाराम और उससे सेवक शिवा, छिंदवाड़ा हॉस्टल का केयर टेकर शरद और रसोइया प्रकाश से हुई पूछताछ के आधार पर निकलकर आए नए तथ्यों और साक्ष्यों को लेकर पुलिस शिल्पी से पूछताछ में जुट गई है। शिल्पी को गुरुवार को अदालत में पेश किया जाएगा।
पिछली सुनवाई के आधार पर ही अर्जी खारिज
जोधपुर हाईकोर्ट की न्यायाधीश निर्मलजीत कौर ने शिल्पी की अग्रिम जमानत अर्जी को पिछली सुनवाई के आधार पर ही खारिज कर दिया। हालांकि सुनवाई बुधवार को भी हुई थी।
पिछली सुनवाई में अभियोजन पक्ष की ओर से कहा गया था कि पीड़िता को आसाराम तक पहुंचाने की घटना में शिल्पी अहम साजिशकर्ता है और पुलिस को कुछ अहम सुराग और तथ्य मिल सकते हैं।
पांचों आरोपी गिरफ्त में
नाबालिग से जोधपुर के मणई आश्रम की कुटिया में दुष्कर्म के मामले में आसाराम सहित सभी पांचों आरोपी अब पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं।
31 अगस्त को ही आसाराम के सेवादार शिवा ने पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया था। सूत्रों का कहना है कि शिवा भी 200 करोड़ से अधिक संपत्ति का मालिक है।
इसके बाद गुरुकुल के संचालक शरद चंद्र एवं रसोइया प्रकाश ने अपनी अग्रिम जमानत अर्जी न्यायालय से वापस लेकर समर्पण किया था और दोनों अब पुलिस रिमांड पर हैं।