मैं दमन और सम्मान के बीच में झूल रहा हूं: शत्रुघ्न सिन्हा
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जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में पहुंचे अभिनेता और भाजपा सांसद शत्रुघ्न सिन्हा का कहना है कि वह मौजूदा समय में दमन और सम्मान के बीच झूल रहे हैं और झेल भी रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘एक समय जब मैं हताश होकर राजनीति छोड़ना चाहता था, तब मेरे गुरु भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने मुझे सफलता का मंत्र बताया। तब आडवाणी ने मुझे गांधीजी का सूत्र बताया। उन्होंने कहा कि सफल होने से पहले आपको चार दौर से गुजरना होगा।
पहला उपहास, दूसरा उपेक्षा, तीसरा तिरस्कार और चौथा दमन। उसके बाद है सम्मान, जो आपके कदम चूमेगा, लेकिन आज मैं खुद को दमन और सम्मान के बीच महसूस कर रहा हूं।
सिन्हा ‘खामोश...शॉटगन सिन्हा स्पीक्स’ सेशन में कांग्रेस नेता शशि थरूर और लेखक सुहेल सेठ के साथ चर्चा कर रहे थे। सेशन के दौरान एक सवाल था कि राज्यसभा में क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, अभिनेत्री रेखा जैसी हस्तियों की काफी कम उपस्थिति पर कुछ नहीं होता और हम कॉलेज में 60 फीसदी से कम उपस्थित होते हैं, तो परीक्षा से बाहर कर दिए जाते हैं।
असहिष्णुता पर गलत बात करने वालों के साथ नहीं
इस पर ठहाका लगाने के बाद शत्रुघ्न ने कहा कि इन हस्तियों को टाइम पास के लिए राज्यसभा में लाने का क्या मतलब है। ऐसा पहले से होता रहा है। शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि असहिष्णुता के मामले में वह बॉलीवुड के उन लोगों के साथ नहीं हैं, जिन्होंने उल्टे सीधे बयान दिए।
उन्होंने कहा कि इस मामले में मैं काजोल की बात से सहमत हूं कि बॉलीवुड में कोई जाति, कोई भाषा, धर्म का भेद नहीं है।
वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने कहा है कि संसदीय प्रणाली देश के लिए बेहतर नहीं है। उनके मुताबिक इस व्यवस्था के तहत भारत जैसे बड़ी जनसंख्या वाले देश का प्रबंधन करना मुश्किल है।