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Didwana: 14 साल पुराने मादक पदार्थ तस्करी केस में सुनाई गई सजा, चारों आरोपियों को 20 साल की जेल; जुर्माना लगा
Sat, 19 Apr 2025 04:45 PM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डीडवाना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, डीडवाना
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Sat, 19 Apr 2025 04:45 PM IST
सार
Rajasthan: चारों अभियुक्तों के पास न तो गांजा रखने का लाइसेंस था और न ही कोई वैध परमिट। जांच पूरी होने के बाद 8/20 एनडीपीएस एक्ट के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 19 गवाहों के बयान और 40 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए।
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आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कुचामन जिले में करीब 14 साल पुराने मादक पदार्थ तस्करी के बहुचर्चित मामले में आखिरकार इंसाफ की घड़ी आ ही गई। अपर सेशन न्यायाधीश कुचामन सिटी ने सुंदरलाल खारोल ने आज एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए चार आरोपियों को 20 साल के कठोर कारावास और 2 लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में दो साल की अतिरिक्त सजा भी भुगतनी होगी।
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कुचामन में अपर लोक अभियोजक मनीष शर्मा ने बताया कि यह मामला 9 जनवरी 2011 का है, जब कुचामन सिटी थाना पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि एक बिना नंबर की गाड़ी में कुछ लोग अवैध रूप से गांजा लेकर जा रहे हैं और भागने की फिराक में हैं। सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बाईपास पर एक गाड़ी को रोका, जिसमें चालक सहित कुल चार व्यक्ति सवार थे।
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गाड़ी की तलाशी लेने पर पीछे की सीट से तीन बैग मिले, जिनमें कुल 50.50 किलोग्राम अवैध गांजा बरामद हुआ। गिरफ्तार आरोपियों में प्रहलाद पुत्र गुलाराम माली (निवासी इटावा भोपजी, सामोद), बलराज पुत्र सीताराम मीणा (निवासी उदयपुरिया, सामोद), छोटन सिंह पुत्र सरदार बुलंद सिंह पंजाबी (निवासी कोलकाता) और गोपाल चंद पुत्र हरदेवराम यादव (निवासी गोविंदगढ़, जिला जयपुर) शामिल थे, जिनको आज न्यायाधीश सुंदर लाल खारोल ने मुकदमा दर्ज होने के 14 साल बाद आए फैसले में 20 साल कैद की सजा सुनाई है।
चारों अभियुक्तों के पास न तो गांजा रखने का लाइसेंस था और न ही कोई वैध परमिट। जांच पूरी होने के बाद 8/20 एनडीपीएस एक्ट के तहत आरोप पत्र दाखिल किया गया। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने 19 गवाहों के बयान और 40 दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए। सबूतों और बहसों के आधार पर अदालत ने अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए यह कठोर सजा सुनाई। अपर लोक अभियोजक मनीष शर्मा ने कहा की यह फैसला न सिर्फ कानून के प्रति विश्वास को मजबूत करता है, बल्कि मादक पदार्थों के खिलाफ चल रही जंग में एक बड़ी जीत है।