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Sawai Madhopur : अंतर्राज्यीय साइबर ठगी गैंग का भंडाफोड़, छह आरोपी गिरफ्तार, मास्टरमाइंड की तलाश जारी

Sun, 19 Jan 2025 08:21 AM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर Published by: प्रिया वर्मा Updated Sun, 19 Jan 2025 08:21 AM IST
सार

जिले की साइबर क्राइम पुलिस ने फर्जी लेटर पैड के जरिये बैंकों में सेंध मारने वाले छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी पूरी तैयारी के साथ संगठित तरीके अज्ञात लोगों के बैंक खाते खुलवाकर पैसे ट्रांसफर कराते थे।

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Sawai Madhopur: Interstate cyber fraud gang busted, six accused arrested, search for mastermind continues
राजस्थान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सवाई माधोपुर साइबर क्राइम पुलिस थाना टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक अंतर्राज्यीय साइबर ठगी गैंग का पर्दाफाश किया है। इस ऑपरेशन में पुलिस ने गैंग के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया और उनके पास से 2 लाख 40 हजार रुपए की नकद राशि बरामद की। साथ ही 4 लाख 97 हजार रुपए बैंक खातों में होल्ड कराए गए हैं।

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पुलिस उपाधीक्षक राजेंद्र सिंह रावत ने जानकारी दी कि इस गैंग ने मध्यप्रदेश के भोपाल में भी इसी प्रकार से साइबर ठगी की वारदातें की हैं। पकड़े गए सभी आरोपी मोहम्मद सलीम (अमरोहा), राजेश कुमार सेनी उर्फ सोनू (अमरोहा), विक्की कुमार (सलेमपुर), प्रदीप कुमार (मुरादाबाद), शुभम नारायण त्यागी उर्फ प्रिंस (बागपत), आनंद उर्फ अभिषेक (मेरठ) उत्तरप्रदेश के विभिन्न जिलों के निवासी हैं। गिरफ्तार आरोपियों से 11 मोबाइल फोन और अन्य सबूत भी बरामद किए गए हैं।
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पुलिस जांच में पता चला कि गैंग ने एसबीआई की कलेक्ट्रेट शाखा के प्रबंधक सीताराम मीना को कॉल करके फर्जी लेटरपैड के जरिए 14 लाख 57 हजार रुपए एक फर्जी खाते में ट्रांसफर करवा लिए। इसी प्रकार गैंग ने भोपाल में भी बैंक ऑफ बड़ौदा और आईसीआईसीआई बैंक के मैनेजरों को ठगकर 9.90 लाख और 33.22 लाख रुपए ट्रांसफर करवाए थे।
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पुलिस ने बताया कि गैंग संगठित तरीके से काम करती थी। मास्टरमाइंड और उसके साथी अज्ञात लोगों को विश्वास में लेकर उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इन खातों का उपयोग ठगी की रकम ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। खाताधारकों को 10% कमीशन देकर बाकी राशि मास्टरमाइंड तक पहुंचाई जाती थी।


मामाले की जानकारी मिलने पर साइबर थाने के सहायक उप निरीक्षक फैयाज खान के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई, जिसमें कांस्टेबल दिनेश और नफीस शामिल थे। टीम ने दिल्ली, गाजियाबाद और मुरादाबाद में सात दिन तक सर्च ऑपरेशन चलाकर आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस अभी गैंग के मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी हुई है। प्रारंभिक पूछताछ में खुलासा हुआ है कि गैंग बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा करने के लिए फर्जी दस्तावेजों और बैंक खातों का इस्तेमाल करती थी।

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