Rajya Sabha Elections: वसुंधरा राजे का गहलोत पर हमला- विधायकों के पीछे लगी पुलिस, यह इमरजेंसी नहीं तो क्या है?
भाजपा विधायकों की बाड़ेबंदी में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने आरोप लगाया कि अशोक गहलोत की सरकार ने पुलिस को विधायकों के पीछे लगा रखा है। इमरजेंसी जैसे हालात बना रखे हैं।
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भाजपा नेत्री और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के मन से आपातकाल की भावना अभी भी नहीं निकली है। आज भी इनका आचरण इमरजेंसी जैसा ही है। यही कारण है कि इन्होंने सरकार के मुख्य अंग- विधायकों, के पीछे तक पुलिस लगा रखी है। उनके साथ अपराधियों जैसा सलूक किया जा रहा है। यह इमरजेंसी नहीं तो और क्या है?
राज्यसभा चुनावों के लिए की गई भाजपा विधायकों की बाड़ेबंदी में बुधवार को राजे ने 'आपातकाल व लोकतंत्र बहाली में हमारी भूमिका' विषय पर संबोधन दिया। उन्होंने आपातकाल के कठिन दौर से लड़कर देश में फिर से लोकतंत्र की स्थापना करने वाले जनसंघ के नेताओं को भी नमन किया।
उन्होंने कहा कि मेरे पहले कार्यकाल में भाजपा सरकार ने मीसा और डीआईआर के तहत जेल गए सभी लोगों की पेंशन चालू की थी। जब 2008 में कांग्रेस सरकार आई तो उन्होंने इसे बंद कर दिया। 2013 में हमारी सरकार ने न केवल पेंशन दोबारा शुरू की बल्कि उन्हें लोकतंत्र सेनानी का दर्जा भी दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान अशोक गहलोत सरकार ने फिर से मीसाबंदियों की पेंशन बंद कर दी हो, मैं विश्वास दिलाती हूं कि वर्ष 2023 में फिर से भाजपा की सरकार बनेगी। कांग्रेस ने लोकतंत्र सेनानियों का जो सम्मान छीना है, उन्हें ब्याज सहित वापस लौटाएगी। उनकी पेंशन फिर से शुरू होगी। आपातकाल के दौरान प्रधानमंत्रीजी के सेवाभाव को भी मेरा प्रणाम। वे हमारे नेताओं तक अहम जानकारियां उपलब्ध कराने के लिए भेष बदलकर जेल जाया करते थे। वहीं जिन नेताओं के पीछे पुलिस लगी हुई थी, मोदी जी उन्हें स्कूटर से एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाते थे। भाजपा की पहली प्राथमिकता भारत की समृद्धि व लोकतंत्र की रक्षा है। मुझे विश्वास है कि आगामी चुनावों में भाजपा का हर नेता इसी भावना के साथ आगे बढ़ेगा। अब अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा।
बीटीपी ने व्हिप जारी कर अपने दो विधायकों से राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं करने को कहा
भारतीय ट्राइबल पार्टी ने बुधवार रात को अपने दो विधायकों को 10 जून को राज्यसभा चुनाव में मतदान में भाग नहीं लेने का निर्देश दिया है।इस ताजा घटनाक्रम से कांग्रेस की चिंता बढेगी। मंगलवार को उदयपुर में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात के बाद पार्टी विधायकों ने कांग्रेस को समर्थन देने की घोषणा की थी।
बीटीपी के प्रदेशाध्यक्ष वेलाराम घोघरा ने कहा कि विधायकों को व्हिप के जरिये राज्यसभा चुनाव में मतदान से परहेज करने का निर्देश दिया गया है। घोघरा ने कहा, ‘‘हमारे विधायकों ने 2020 में राजनीतिक संकट के दौरान कांग्रेस पार्टी का समर्थन किया। पार्टी ने हमारी मांगों का मुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया था लेकिन कुछ नहीं हुआ, इसलिए विधायकों को मतदान से परहेज करने का निर्देश दिया गया है।’’
इस घटनाक्रम पर बीटीपी विधायक राजकुमार रोत ने कहा कि पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से सलाह मशविरा करने के बाद राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को समर्थन देने का फैसला किया गया था, लेकिन अब प्रदेश अध्यक्ष ने अपने दम पर व्हिप जारी किया है।
रोत ने कहा ‘‘ हमें जानकारी मिली है कि प्रदेश अध्यक्ष ने व्हिप जारी किया है। कांग्रेस को समर्थन देने का निर्णय लेने से पहले पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ विचार विर्मश किया गया था। चूकि कांग्रेस पार्टी सत्ता में है,तो ऐसे हमारी मांगें, जो आदिवासी लोंगो और क्षेत्र के विकास से संबंधित है, केवल सत्तारूढ कांग्रेस द्वारा पूरी की जा सकती हैं। इसलिए हमने राज्यसभा चुनाव में सत्तारूढ पार्टी के उम्मीदवारों को समर्थन देने की घोषणा करने का फैसला किया था।’’
बता दें कि राजस्थान में 200 सदस्यों वाली विधानसभा में कांग्रेस के पास 108 विधायक है, भाजपा के 71, राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के तीन सीपीआई (एम) और भारतीय ट्राइबल पार्टी (बीटीपी) के दो-दो , राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के एक और 13 निर्दलीय विधायक हैं।