{"_id":"65745d99d4db9e9b93000d64","slug":"rajsthan-news-tools-and-weapons-found-in-excavation-evidence-of-primitive-human-civilization-2023-12-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rajsthan News: पुरातत्व विभाग को खुदाई में मिले औजार और हथियार, आदिमानव सभ्यता होने के प्रमाण मिले","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rajsthan News: पुरातत्व विभाग को खुदाई में मिले औजार और हथियार, आदिमानव सभ्यता होने के प्रमाण मिले
Sat, 09 Dec 2023 06:17 PM IST
प्रिया वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर
Published by: प्रिया वर्मा
Updated Sat, 09 Dec 2023 06:17 PM IST
सार
राज्य के जैसलमेर जिले से करीब 30 किमी दूर काक नदी के किनारे आदिमानव सभ्यता होने के प्रमाण मिले हैं। दरअसल कुछ साल पहले यहां और आसपास के इलाकों से पत्थरों के औजार और हथियार मिले थे, इसके बाद से लगातार यहां खोजबीन की जा रही है।
विज्ञापन
खुदाई में मिले औजार के अवशेष
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
जैसलमेर जिले में पुरातत्व विभाग द्वारा की जा रही खुदाई में मिले औजार और हथियार करीब पांच लाख साल पुराने माने जा रहे हैं। वरिष्ठ पुरातत्वविद् और आदिमानव सभ्यता के विशेषज्ञ डॉ. नारायण व्यास के अनुसार खुदाई में पत्थर की कुल्हाड़ी और स्क्रेपर आदि मिलने से अंदाजा लगाया जा सकता है कि आदिमानव सभ्यता के विकास क्रम में जैसलमेर मौजूद रहा है।
विज्ञापन
दरअसल कुछ साल पहले भी यहां और आसपास के इलाकों में पुराने पत्थर और औजार मिले थे। इस बार की खोज में मिले पत्थरों के औजार और हथियारों से जैसलमेर में आदिमानव की मौजूदगी पुख्ता हो गई है।
विज्ञापन
पुरातत्वविद डॉ. नारायण व्यास ने बताया कि इन औजारों और हथियारों के मिलने से साबित होता है कि यहां आदिमानव की गुफाएं भी मौजूद रही होंगी जो कि भूगर्भीय हलचल व बरसाती पानी से नष्ट हो चुकी हैं।
विज्ञापन
डॉ. व्यास ने बताया कि इस हफ्ते की गई खोज में जो हथियार मिले हैं वे पहले मिले पत्थरों के हथियारों से छोटे हैं। इसका मतलब साफ है कि यह विकास का क्रम है। जैसे-जैसे आदि मानव ने हथियारों का उपयोग किया, अपनी सुविधा के अनुसार हथियार छोटे कर दिए ताकि शिकार करने में तो घातक रहने के साथ-साथ उनका उपयोग करने में भी आसानी रहे।
उन्होंने जैसलमेर जिले में आधुनिक तकनीक से पुरातात्विक सर्वेक्षण के महत्व पर जोर दिया।