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राजस्थान में भाजपा को नोटा ने पहुंचाया जबर्दस्त नुकसान, इन सीटों पर बिगाड़ा खेल
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Updated Thu, 13 Dec 2018 04:34 PM IST
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वसुंधरा राजे
- फोटो : PTI
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राजस्थान में कांग्रेस और भाजपा के वोट शेयर में मामूली अंतर था जिसकी वजह से मुख्यमंत्री सत्ता से बेदखल हो गईं। भाजपा का वोट प्रतिशत 38.8 रहा जबकि राज्य में सबसे पड़ी पार्टी बनने वाली कांग्रेस का वोट प्रतिशत 39.3 रहा। दोनों पार्टियों के बीच का मत प्रतिशत का अंतर 0.5 के करीब रहा। कांग्रेस को करीब 1 करोड़ 39 लाख 35 हजार वोट मिले जबकि भाजपा को करीब 1 करोड़ 37 लाख 57 हजार वोट मिले। दोनों को मिले वोट में कुल एक लाख 70 हजार वोटों का अंतर है।
दिलचस्प बात यह है कि नोटा के विकल्प को करीब 1.3 फीसदी वोट मिले। इन आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में दो प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच कितनी कांटे की टक्कर थी।
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भाजपा को 2013 के विधानसभा चुनाव में 46.05 फीसदी वोट शेयर के साथ 200 सीटों वाली विधानसभा में 163 सीटों के साथ सत्ता हासिल की थी। जबकि इस बार 7.25 फीसदी वोट प्रतिशत का नुकसान हुआ है। 2018 के चुनाव में भाजपा को सिर्फ 73 सीटें मिल पाई है। वहीं कांग्रेस ने 2013 में 33.17 फीसदी वोट शेयर के साथ 21 सीटें जीती थीं।
अगर ये मान भी लिया जाए कि भाजपा को अपने 5.6 फीसदी वोट शेयर का नुकसान हुआ जो कांग्रेस के खाते में चले गए, तो यह माना जा सकता है कि बाकी बचे 1.65 फीसदी वोट नोटा के खाते में चले गए। नोटा के वोटों को सामान्य तौर पर सत्ताधारी के खिलाफ माना जाता है।
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दिलचस्प बात यह है कि नोटा के विकल्प को करीब 1.3 फीसदी वोट मिले। इन आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में दो प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच कितनी कांटे की टक्कर थी।
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कांग्रेस से ज्यादा नोटा से नुकसान
राजस्थान विधानसभा चुनाव के नतीजों से यह भी पता चलता है कि भाजपा इस बार कांग्रेस के साथ-साथ नोटा से भी हारी। राजस्थान में 11 सीटें ऐसी हैं जहां जीत-हार के अंतर से ज्यादा नोटा पर वोट पड़े। राजस्थान की बेंगू सीट पर सबसे ज्यादा नोटा पर वोट पड़े।
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भाजपा को 2013 के विधानसभा चुनाव में 46.05 फीसदी वोट शेयर के साथ 200 सीटों वाली विधानसभा में 163 सीटों के साथ सत्ता हासिल की थी। जबकि इस बार 7.25 फीसदी वोट प्रतिशत का नुकसान हुआ है। 2018 के चुनाव में भाजपा को सिर्फ 73 सीटें मिल पाई है। वहीं कांग्रेस ने 2013 में 33.17 फीसदी वोट शेयर के साथ 21 सीटें जीती थीं।
अगर ये मान भी लिया जाए कि भाजपा को अपने 5.6 फीसदी वोट शेयर का नुकसान हुआ जो कांग्रेस के खाते में चले गए, तो यह माना जा सकता है कि बाकी बचे 1.65 फीसदी वोट नोटा के खाते में चले गए। नोटा के वोटों को सामान्य तौर पर सत्ताधारी के खिलाफ माना जाता है।
2018 में 2013 से कम रहा नोटा
राजस्थान में साल 2013 के विधानसभा चुनाव में 5 लाख 89 हजार 923 मतदाताओं ने नोटा का बटन दबाया था। इस बार 4 लाख 67 हजार 785 ने नोटा के अधिकार का इस्तेमाल किया। यह आंकड़ा पिछली बार से 1 लाख 22 हजार 147 कम है।इस बार नोटा का कमाल
| सीट | जीते | पार्टी | जीत का अंतर (वोट) | नोटा को मिले वोट |
| बेगूं | राजेंद्र विधूड़ी | कांग्रेस | 1661 | 3165 |
| आसींद | जब्बर सिंह | भाजपा | 151 | 2943 |
| मारवाड़ जंक्शन | खुशवीर सिंह | निर्दलीय | 251 | 2719 |
| चौमूं | रामलाल शर्मा | भाजपा | 1288 | 1859 |
| खेतड़ी | जितेंद्र सिंह | कांग्रेस | 957 | 1377 |
| दांता रामगढ़ | वीरेंद्र सिंह | कांग्रेस | 920 | 1180 |
| फतेहपुर | हाकम अली खान | कांग्रेस | 860 | 1165 |
| पोकरण | सालेह मोहम्मद | कांग्रेस | 872 | 1121 |