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Rajasthan Politics: गजेंद्र शेखावत बोले- प्रचंड बहुमत से बनेगी BJP सरकार, पहली कैबिनेट में स्वीकृत होगा ERCP

Fri, 25 Aug 2023 06:01 PM IST
लोकेंद्र सिंह चंपावत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टोंक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टोंक Published by: लोकेंद्र सिंह चंपावत Updated Fri, 25 Aug 2023 06:01 PM IST
सार

टोंक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने प्रदेश की गहलोत सरकार पर हमला बोला। सरकार की नाकामियों से जनता त्रस्त है। साथ ही शेखावत ने कहा कि प्रचंड बहुमत से भाजपा की सरकार आएगी और पहली कैबिनेट में ERCP प्रोजेक्ट स्वीकृत होगा।

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Rajasthan Shekhawat said that BJP will form the government with a huge majority ERCP will approve
प्रेस वार्ता करते केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान में विधानसभा चुनाव को लेकर कुछ ही महीनों का समय बचा हुआ है। केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री ने टोंक में पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि ईआरसीपी पर गहलोत विशुद्ध राजनीति कर रहे है। तकनीकी स्वीकृतियां नहीं दे रहे है। इस मुद्दे पर कांग्रेस सरकार बेनकाब हो चुकी है। अब जनता समझ चुकी है और भ्रम दूर हो रहा है।

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टोंक में केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने शुक्रवार को ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (ईआरसीपी) को लेकर गहलोत सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि गहलोत इस परियोजना को लेकर केवल भ्रम फैला रहे हैं। जनता के सामने अब वे बेनकाब हो चुके हैं। वर्तमान में ये सरकार जिसे ईआरसीपी का नाम दे रही है। उससे केवल तीन जिलों को पीने का पानी मिलेगा। शेखा्वत ने कहा कि राजस्थान की जनता ने गहलोत सरकार को विदा करने का मन बना लिया है। अगली सरकार भाजपा की बनेगी और कैबिनेट की पहली बैठक में ईआरसीपी को स्वीकृति देकर पूर्वी राजस्थान के पूरे 13 जिलों में पीने और सिंचाई का पानी उपलब्ध कराया जाएगा।
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ERCP को लेकर गहलोत विशुद्ध राजनीति कर रहे
यहां पत्रकारों से बातचीत में केन्द्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि ईआरसीपी को लेकर गहलोत सरकार विशुद्ध राजनीति कर रही है। इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित करने के लिए जो तकनीकी स्वीकृतियां देनी चाहिए थीं, वह राज्य सरकार ने केन्द्र को आज तक नहीं दी है। अब इस मुद्दे पर गहलोत सरकार बेनकाब हो रही है और जनता का भ्रम दूर हो रहा है। उन्होंने कहा कि गहलोत जिस ईआरसीपी को खुद पूरा करने की बात कह रहे हैं, उससे मात्र तीन जिलों जयपुर, टोंक और अजमेर की प्यास बुझेगी। भरतपुर, अलवर सहित पूर्वी राजस्थान के शेष जिलों के कंठ प्यासे ही रहेंगे।
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कांग्रेस के चलते 13 जिलों की जनता त्रस्त और बदहाल 
शेखावत ने कहा कि किसी परियोजना को राष्ट्रीय स्तर का दर्जा देने के लिए पर्यावरण, वन, वित्तीय और तकनीकी क्लीयरेंस जरूरी है, लेकिन इस मामले में गहलोत सरकार तकनीकी स्वीकृतियां उपलब्ध नहीं करा पाई। उन्होंने कहा कि पूर्वी राजस्थान के 13 जिलों में राज्य की कुल आबादी के 40 प्रतिशत लोग रहते हैं। गहलोत सरकार की राजनीति के चलते इन 13 जिलों की जनता त्रस्त और बदहाल है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना सिरे नहीं चढ़ पाई है। 

ERCP योजना को गहलोत सरकार ने राजनीति की फुटबॉल बनाने का काम किया
केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि वर्ष 2016 में वसुंधरा राजे सरकार ने ईआरसीपी की परिकल्पना के विषय में विचार किया। वर्ष 2017 में वाप्कोस को डिजाइन बनाने के लिए दिया, लेकिन राजस्थान ने देश के तय मानक 75 प्रतिशत के बजाय 50 प्रतिशत डिपेंडेबिलिटी पर बनाया, जिसे स्वीकृति नहीं मिली। वसुंधरा जी की सरकार के समय ही सीडब्ल्यूसी ने इसे सही करके बनाने के लिए कहा। दुर्भाग्य से सरकार बदली और गहलोत सरकार ने इस योजना को आगे बढ़ाने के बजाय इसे राजनीति की फुटबॉल बनाने का काम किया। एक सवाल के जवाब में शेखावत ने कहा कि ईआरसीपी को लेकर गहलोत सरकार भ्रम फैला रही है, लेकिन धीरे-धीरे वह बेनकाब हो रही है। भाजपा इस मामले में तेरह जिलों के हितों के साथ है। 

एक भी मीटिंग में नहीं आए सीएम और मंत्री
शेखावत ने कहा कि राजस्थान सरकार के मुखिया अशोक गहलोत को मैंने बार-बार पत्र लिखकर आग्रह किया कि इस पर आगे मार्ग निकालते हैं। मेरे मंत्रालय ने नौ बार दिल्ली में  मीटिंग्स का आयोजन किया, लेकिन एक भी बार राजस्थान सरकार का कोई प्रतिनिधि उन बैठकों ने उपस्थित नहीं हुआ। प्रधानमंत्री के निर्देश पर जयपुर में 18 अप्रैल 2022 को बैठक रखी, जिसकी एक महीने पहले सूचना मुख्यमंत्री और मंत्री को देखकर समय निश्चित किया। बैठक की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री और मंत्री की तरफ से कहलवा दिया गया कि वो दोनों नहीं आ सकते। उन्होंने कहा कि उस बैठक में भी राजस्थान के अधिकारियों ने हमारी बात पर सहमति व्यक्त की, लेकिन दुर्भाग्य से ईआरसीपी सिरे नहीं चढ़ पाई।

बीसलपुर-ईसरदा लिंक से केवल तीन जिलों को लाभ
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि अब राजस्थान सरकार ईआरसीपी के नाम पर नवनेरा-गलवा-बीसलपुर-ईसरदा लिंक परियोजना लेकर आई है। इसकी लागत 15 हजार करोड़  है और इससे  बनने वाले इस लिंक से केवल 521 एमसीएम पानी मिलेगा। जो कि जयपुर शहर, अजमेर और टोंक शहर में ही पूरा हो जाएगा। टोंक को भी जरूरत के मुकाबले कम ही पानी मिलेगा। भरतपुर और अलवर सहित शेष दस जिलों को एक बूंद पानी भी नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि नदियों को जोडऩे की प्रकल्प के तहत राजस्थान को तेरह जिलों को पूरा पानी मिलेगा और सिंचाई भी होगी। राजस्थान के हिस्से में इसकी लागत सात सौ करोड़ रुपए ही आएगी, क्योंकि इसमें नब्बे फीसदी खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी। राज्य को मात्र दस प्रतिशत ही देना होगा, लेकिन गहलोत सरकार सात सौ करोड़ के बजाय 15000 करोड़ खर्च कर केवल तीन जिलों को पानी देगी। 

सरकारी संपत्तियां बेच रही कांग्रेस सरकार
केन्द्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि गहलोत सरकार  को नई परियोजना के लिए 15 हजार करोड़ रुपए जुटाने हैं। इस राशि की भी दस साल में जाकर जरूरत पड़ेगी, लेकिन इसके लिए ये अभी से सरकारी संपत्तियां बेचकर राशि जुटा रहे हैं। सरकार नहरों और बांधों की जमीनें बेच रही है। उन्होंने तंज कसा कि टोंक के जिस सर्किट हाउस में बैठे हैं, हो सकता है गहलोत सरकार इसे बेच दे और आने वाले समय में यह किसी होटल का रूप ले ले। उन्होंने कहा कि संपत्तियां बेचकर पैसा इकट्ठा करके यह प्रोजेक्ट बनाएंगे, जो कभी बनने वाला नहीं है।  

जल जीवन मिशन में पिछड़ा राजस्थान
शेखावत ने कहा कि जल जीवन मिशन में आवश्यकताओं को देखते हुए हमने सबसे ज्यादा बजट राजस्थान को दिया। मैं पिछले चार साल में 29,000 करोड़ रुपए राजस्थान को बजट आवंटित कर चुका हूं। दुर्भाग्य से सबसे ज्यादा बजट लेने के बावजूद अगर मैं क्रियान्वयन की गति के आधार पर कहूं तो जल जीवन मिशन में राजस्थान नीचे से तीसरे पायदान पर है। इस योजना में जिस तरह से भ्रष्टाचार के समाचार आ रहे हैं, वो निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण है।

 
सरकार की नाकामियों ने राज्य को रेप की कैपिटल बना दिया
केन्द्रीय मंत्री ने राजस्थान की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि गहलोत सरकार की नाकामी के चलते भूमाफिया, बजरी माफिया, खनन माफिया सहित तरह तरह के माफिया पनप रहे हैं। महिलाओं के साथ अत्याचार बढ़ रहा है। राज्य को रेप की कैपिटल बनाकर रख दिया। सरकार तुष्टिकरण की नीति अपना रही है। इसके चलते ही उदयपुर में कन्हैयालाल हत्याकांड को अंजाम दिया गया। इसी प्रकार करौली और जोधपुर में दंगे हुए। बाद में इनके आरोपियों को पकड़ने और सजा दिलाने में भी तुष्टिकरण किया गया।

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