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Rajasthan: SMS हॉस्पिटल में मिला आंखों की रोशनी छीनने वाला स्यूडोमोनास इंफेक्शन, 17 मरीजों में फैला, 3 ओटी बंद
Sat, 01 Jul 2023 10:12 AM IST
नीरज शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: नीरज शर्मा
Updated Sat, 01 Jul 2023 10:12 AM IST
सार
जयपुर में प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी एसएमएस हॉस्पिटल में आंखों की रोशनी छीनने वाला खतरनाक बैक्टीरियल इंफेक्शन स्यूडोमोनास फैल गया है। 17 मरीज संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। मानसून पीरियड में नमी और बारिश के कारण और भी तेजी से फैल रहा है।
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SMS हॉस्पिटल में मिला आंखों की रोशनी छीनने वाला स्यूडोमोनास इंफेक्शन, 17 मरीजों में फैला, 3 ओटी बंद
- फोटो : फाइल फोटो।
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विस्तार
एसएमएस हॉस्पिटल में खतरनाक स्यूडोमोनास संक्रमण की स्थिति को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने नेत्र रोग विभाग के तीनों ऑपरेशन थिएटर बंद कर दिए हैं। इमरजेंसी ऑपरेशन थियेटर में भी शुक्रवार को सर्जरी नहीं हुई। देर रात को इमरजेंसी ओ.टी. को शुरू किया गया। अन्य 3 ऑपरेशन थिएटर फिलहाल बंद रहेंगे।
अस्पताल चिकित्सकों और मेडिकल प्रशासन में 2-3 दिन तक छुपाकर रखी बात
जानकारी के मुताबिक अस्पताल के चरक भवन के ऑपरेशन थिएटर में सोमवार से बुधवार तक 71 मरीजों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन में हुए थे। इनमें से एक मरीज बुधवार को ओपीडी में आंख में सूजन, आंख लाल होने की शिकायत लेकर पहुंचा, तो उसे खतरनाक स्यूडोमोनास संक्रमण का संदिग्ध रोगी मानकर भर्ती किया गया। इसके बाद गुरुवार को भी 4-5 मरीजों में ऐसे ही लक्षण पाए गए। लेकिन अस्पताल के नेत्र रोग चिकित्सकों और अस्पताल प्रशासन ने इस जानकारी को छिपाकर रखा। बुधवार से शुक्रवार तक और मरीज शिकायत लेकर आते रहे। जिनकी संख्या 17 तक पहुंच गई। इस लापरवाहीपूर्ण रवैये के कारण मोतियाबिंद या आंखों के अन्य ऑपरेशन करने वाले मरीज समय पर सतर्क नहीं हो सके और तुरंत जांच-उपचार और बीमारी के निरोधात्मक उपाय नहीं कर पाए। इसलिए मरीजों में संक्रमण स्तर और मरीजों की संख्या बढ़ती गई।
एसएमएस अस्पताल अधीक्षक बोले-जांच और इलाज के लिए अलग-अलग कमेटी बनाई
एसएमएस हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉक्टर अचल शर्मा ने बताया कि जिन मरीजों में स्यूडोमोनास संक्रमण के लक्षण पाए गए हैं। उन्हें भर्ती किया गया है । जांच और इलाज के लिए अलग-अलग कमेटी बनाई गई हैं। अन्य भर्ती मरीजों को घबराने की जरूरत नहीं है। चिकित्सकों ने बताया कि ऐसा संक्रमण एसएमएस हॉस्पिटल में कई वर्षों बाद देखा गया है। संक्रमण कैसे फैला ? इसकी जांच के लिए अलग-अलग कमेटी बनाई गई हैं। आज उसकी रिपोर्ट आने की संभावना है। आशंका है संक्रमण किसी मोतियाबिंद के मरीज के ऑपरेशन के दौरान ही फैला है।
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संक्रमित मरीजों में ये लक्षण मिले
मरीजों में आंखों में धुंधलापन, आंख लाल होना, कम दिखाई देना, आंखों में सूजन आना, आंखों से चिपचिपा पदार्थ निकलना, जलन होना जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। हालांकि अभी यह पता लगाना मुश्किल है कि मरीजों की आंख की रोशनी चली गई है या सुरक्षित है। जिन मरीजों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन हुए थे, उनकी आंखों पर पट्टी बंधी हुई है।
क्या होता है स्यूडोमोनास इंफेक्शन ?
जानकारी के अनुसार जिस स्यूडोमोनास एरुजिनोसा बैक्टीरिया का संक्रमण मरीजों की आंख में हुआ है, वह बेहद ही खतरनाक होता है। वह 24 घंटे में ही मरीज की आंख को खराब कर सकता है। यह एक बैक्टीरियल इंफेक्शन होता है। जो शरीर के भीतर संक्रमण फैलाता है। यदि यह ब्लड में मिल जाए। तो स्यूडोमोनास और भी घातक हो जाता है। इससे प्रतिरक्षा प्रणाली (एंटीबॉडीज सिस्टम) कमजोर हो सकता है। ऐसे में कोई व्यक्ति अस्पताल में है या उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है, तो खतरा और भी गंभीर हो जाता है।
स्यूडोमोनास एरुगिनोसा जिस जीवाणु के कारण होता है, वह एक कठिन प्रकृति का बैक्टीरिया है और कठोर वातावरण में भी जीवित रहने में सक्षम है। इससे पूरी तरह छुटकारा पाना मुश्किल हो जाता है। यह शायद ही कभी अस्पताल या स्वास्थ्य देखभाल सेटिंग के बाहर बीमारी का कारण बनता है। इसलिए पूरी संभावना अस्पतालों में ही इसके फैलने की रहती है। यह एक मरीज से दूसरे में भी आसानी से फैल सकता है।
इस बैक्टीरिया के संक्रमण से ब्लड, लंग्स, लीवर और मसल्स भी प्रभावित हो सकते हैं। यह अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है। इसकी कंट्रोलिंग और उपचार के लिए एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं। यह कीचड़, नाले, गंदी मिट्टी, सड़े हुए गंदे पानी और कुछ दूषित हो चुके पौधों में भी व्यापक रूप से पाया जाता है।
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अस्पताल चिकित्सकों और मेडिकल प्रशासन में 2-3 दिन तक छुपाकर रखी बात
जानकारी के मुताबिक अस्पताल के चरक भवन के ऑपरेशन थिएटर में सोमवार से बुधवार तक 71 मरीजों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन में हुए थे। इनमें से एक मरीज बुधवार को ओपीडी में आंख में सूजन, आंख लाल होने की शिकायत लेकर पहुंचा, तो उसे खतरनाक स्यूडोमोनास संक्रमण का संदिग्ध रोगी मानकर भर्ती किया गया। इसके बाद गुरुवार को भी 4-5 मरीजों में ऐसे ही लक्षण पाए गए। लेकिन अस्पताल के नेत्र रोग चिकित्सकों और अस्पताल प्रशासन ने इस जानकारी को छिपाकर रखा। बुधवार से शुक्रवार तक और मरीज शिकायत लेकर आते रहे। जिनकी संख्या 17 तक पहुंच गई। इस लापरवाहीपूर्ण रवैये के कारण मोतियाबिंद या आंखों के अन्य ऑपरेशन करने वाले मरीज समय पर सतर्क नहीं हो सके और तुरंत जांच-उपचार और बीमारी के निरोधात्मक उपाय नहीं कर पाए। इसलिए मरीजों में संक्रमण स्तर और मरीजों की संख्या बढ़ती गई।
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एसएमएस अस्पताल अधीक्षक बोले-जांच और इलाज के लिए अलग-अलग कमेटी बनाई
एसएमएस हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉक्टर अचल शर्मा ने बताया कि जिन मरीजों में स्यूडोमोनास संक्रमण के लक्षण पाए गए हैं। उन्हें भर्ती किया गया है । जांच और इलाज के लिए अलग-अलग कमेटी बनाई गई हैं। अन्य भर्ती मरीजों को घबराने की जरूरत नहीं है। चिकित्सकों ने बताया कि ऐसा संक्रमण एसएमएस हॉस्पिटल में कई वर्षों बाद देखा गया है। संक्रमण कैसे फैला ? इसकी जांच के लिए अलग-अलग कमेटी बनाई गई हैं। आज उसकी रिपोर्ट आने की संभावना है। आशंका है संक्रमण किसी मोतियाबिंद के मरीज के ऑपरेशन के दौरान ही फैला है।
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संक्रमित मरीजों में ये लक्षण मिले
मरीजों में आंखों में धुंधलापन, आंख लाल होना, कम दिखाई देना, आंखों में सूजन आना, आंखों से चिपचिपा पदार्थ निकलना, जलन होना जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। हालांकि अभी यह पता लगाना मुश्किल है कि मरीजों की आंख की रोशनी चली गई है या सुरक्षित है। जिन मरीजों के मोतियाबिंद के ऑपरेशन हुए थे, उनकी आंखों पर पट्टी बंधी हुई है।
क्या होता है स्यूडोमोनास इंफेक्शन ?
जानकारी के अनुसार जिस स्यूडोमोनास एरुजिनोसा बैक्टीरिया का संक्रमण मरीजों की आंख में हुआ है, वह बेहद ही खतरनाक होता है। वह 24 घंटे में ही मरीज की आंख को खराब कर सकता है। यह एक बैक्टीरियल इंफेक्शन होता है। जो शरीर के भीतर संक्रमण फैलाता है। यदि यह ब्लड में मिल जाए। तो स्यूडोमोनास और भी घातक हो जाता है। इससे प्रतिरक्षा प्रणाली (एंटीबॉडीज सिस्टम) कमजोर हो सकता है। ऐसे में कोई व्यक्ति अस्पताल में है या उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है, तो खतरा और भी गंभीर हो जाता है।
स्यूडोमोनास एरुगिनोसा जिस जीवाणु के कारण होता है, वह एक कठिन प्रकृति का बैक्टीरिया है और कठोर वातावरण में भी जीवित रहने में सक्षम है। इससे पूरी तरह छुटकारा पाना मुश्किल हो जाता है। यह शायद ही कभी अस्पताल या स्वास्थ्य देखभाल सेटिंग के बाहर बीमारी का कारण बनता है। इसलिए पूरी संभावना अस्पतालों में ही इसके फैलने की रहती है। यह एक मरीज से दूसरे में भी आसानी से फैल सकता है।
इस बैक्टीरिया के संक्रमण से ब्लड, लंग्स, लीवर और मसल्स भी प्रभावित हो सकते हैं। यह अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है। इसकी कंट्रोलिंग और उपचार के लिए एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं। यह कीचड़, नाले, गंदी मिट्टी, सड़े हुए गंदे पानी और कुछ दूषित हो चुके पौधों में भी व्यापक रूप से पाया जाता है।