Rajasthan Politics: 20 सितंबर की रात लिखी गई थी पायलट गुट के विरोध की पथकथा, जानें अब तक क्या-क्या हुआ?
Rajasthan Politics: 20 सितंबर की रात हुई बैठक में गहलोत ने कहा, राहुल गांधी से मिलकर उन्हें अध्यक्ष बनने के लिए मनाने की कोशिश करूंगा, वह नहीं माने तो आपको तकलीफ दूंगा। इसी रात को गहलोत गुट के विधायकों ने अपनी चार मांगें आलाकमान के सामने रखने का फैसला कर लिया था।
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विस्तार
राजस्थान में चल रहे सियासी घमासान का आज यानी बुधवार को चौथा दिन है। अशोक गहलोत गुट के विधायक सचिन पायलट के सीएम बनने का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि बगावत के समय साथ देने वाले 102 विधायकों में से किसी को भी सीएम बना दिया जाए, हम उसका साथ देंगे। इसके अलावा भी गहलोत गुट ने दो और मांगें कांग्रेस आलाकमान के सामने रखी हैं।
देखने में ऐसा लग रहा है की गहलोत गुट के विधायक अचानक से पायलट के विरोध में आ गए, लेकिन ऐसा नहीं है। विधायकों के विरोध और इस्तीफे की पटकथा 20 सितंबर की रात ही लिखी जा चुकी थी। गहलोत के सोनिया गांधी और राहुल गांधी से मिलने से पहले हुई विधायक दल की बैठक में पूरा प्लान तैयार कर लिया गया था। इसके संकेत भी गहलोत के करीबी विधायक ने मीडिया से बात करते हुए दिए थे। आइए अब सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं...।
अशोक गहलोत के कांग्रेस अध्यक्ष बनने की चर्चा कई दिनों से चली आ रही है। हालांकि, गहलोत हर बार राहुल गांधी को मनाने की बात कहते रहे। 21 सितंबर को गहलोत राहुल और सोनिया गांधी से मुलाकात करने के लिए जाने वाले थे। इससे पहले विधायक दल की बैठक हुई। जिसमें गहलोत ने कहा, राहुल गांधी से मिलकर उन्हें कांग्रेस अध्यक्ष बनने के लिए आखरी बार मनाने की कोशिश करूंगा, वह नहीं माने तो जैसा आलाकमान कहेगा वही करूंगा, जरूरत पड़ने पर आपको (विधायकों को) तकलीफ दूंगा।
इस पर विधायकों ने कहा, आपको यहीं रहना है। विधायकों की इस मांग पर गहलोत ने कहा, मैं अंतिम सांस तक राजस्थान की सेवा करूंगा, कुछ भी बन जाऊं, लेकिन आपसे दूर नहीं जाऊंगा। बैठक खत्म होने के बाद गहलोत के करीबी मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने मीडिया से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा, बैठक में तय किया गया है कि गहलोत अध्यक्ष बनते हैं तो वह सीएम भी रहेंगे। इससे यह साफ नजर आ रहा है कि गहलोत गुट ने अपना फैसला पहले ही कर लिया था, लेकिन कांग्रेस आलाकमान इसे समझ नहीं पाया या फिर अनदेखा कर दिया।
बैठक में रखे गए थे यह चार प्वाइंट
- राहुल गांधी ही कांग्रेस अध्यक्ष बने
- गहलोत अध्यक्ष बनते हैं तो सीएम भी रहें
- कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव बाद इस्तीफा दें
- नया सीएम गहलोत के विधायकों में से बने
राहुल का इनकार, गहलोत का एलान और पायलट सक्रिय
राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के इनकार के बाद अशोक गहलोत ने घोषणा कर दी कि वह अध्यक्ष पद के लिए नामांकन करेंगे। इसी बीच भारत जोड़ो यात्रा कर रहे राहुल गांधी से सचिन पायलट ने मुलाकात की। जिसके बाद पायलट राजस्थान में सक्रिय हो गए। सामने आया कि कांग्रेस आलाकमान पायलट को सीएम बनाना चाहता है, लेकिन गहलोत गुट इसके शुरू से ही खिलाफ था।
पर्यवेक्षकों के आने पर खुलकर हुआ विरोध
रविवार दोपहर दिल्ली से अजय माकन और मलिकार्जुन खड़गे सीएम उम्मीदवार को लेकर विधायकों से चर्चा करने के लिए जयपुर आए थे। सीएम उम्मीदवार की प्रक्रिया शुरू होते देख गहलोत गुट भी सक्रिय हो गया। विधायकों को शाम पांच बजे मंत्री शांति धारीवाल के आवास पर एकत्रित होने के निर्देश दिए गए। विधायक जुटे और फिर करीब 92 विधायकों ने अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को सौंप दिया। उधर, विधायक दल की बैठक शाम 7 बजे होनी थी, लेकिन रात नौ बजे तक सचिन पायलट और उनके गुट के कुछ विधायकों को छोड़कर कोई नहीं पहुंचा। माकन और खड़गे भी विधायकों का इंतजार करते रहे। जिसके बाद बैठक रद्द कर दी गई।
पायलट के खिलाफ खुलकर बोले गहलोत के तीन करीबी
सचिन पायलट की खिलाफत और सियासी घमासान के सूत्रधार गहलोत के करीबी तीन नेता रहे। जिसमें कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, मंत्री शांति धारीवाल और प्रताप सिंह खाचरियावास शामिल हैं। मंत्री धारीवाल के घर विधायक जुटाकर शक्ति प्रदर्शन किया गया। बाद में यहीं से विधायक इस्तीफा देने के लिए विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के निवास पर चले गए। धारवाल, डोटासरा और खाचरियावास ने 2020 में बगावत करने वाले विधायकों और सचिन पायलट के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया। इन नेताओं ने साफ कहा है कि सरकार बचाने वाले विधायकों में से ही किसी को सीएम बनाया जाए।
विधायकों ने पर्यवेक्षकों के सामने रखीं यह मांगें?
- अशोक गहलोत कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के बाद सीएम पद से इस्तीफा देंगे।
- जो भी मुख्यमंत्री बनेगा वह 102 विधायक में से हो जिन्होंने 2020 में सचिन की बगावत के बाद सरकार बचाने में साथ दिया था।
- प्रदेश का मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सहमति के बाद ही बनाया जाए।
राजस्थान में विधायक दल की बैठक का बहिष्कार करने के मामले में कांग्रेस आलाकमान ही एक्शन लिया है। संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल, आरटीडीसी चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़ और संचेतक महेश जोशी को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। कांग्रेस आलाकमान ने तीनों को अनुशासनहीनता का दोषी माना है। कांग्रेस अनुशासन समिति ने मंगलवार रात तीनों नेताओं को नोटिस जारी किए। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर...
राहुल भी पायलट के सब्र के मुरीद, क्या 26 महीने पद से दूर रहने के बाद अब मिलेगी जिम्मेदारी?
22 जून को कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी दिल्ली में एआईसीसी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने 2004 से पार्टी में काम कर रहा हूं। सब्र नहीं आएगा तो क्या आएगा? इस बात को पार्टी का हर नेता समझता है। देखो सचिन पायलट जी सब्र से बैठे हैं। राहुल गांधी को यह बात कहे हुए तीन महीने से ज्यादा का समय हो गया है और पायलट भी लगातार सब्र रखे हुए हैं। अब एक बार फिर उनके सीएम बनने की बारी आई तो गहलोत गुट उनके विरोध में खड़ा हो गया है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर....