राजस्थान: बयान से पलटे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा, अब कहा- महाराणा प्रताप ने लड़ी थी स्वाभिमान की लड़ाई
महाराणा प्रताप और अकबर के बीच हुई लड़ाई सत्ता के लिए थी, इस बयान से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने किनारा कर लिया है। अब उन्होंने हल्दीघाटी के युद्ध को स्वाभिमान की लड़ाई बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा पर इसे हिंदू-मुस्लिम का युद्ध बताकर बच्चों में जहर बांटने का काम किया है।
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महाराणा प्रताप पर दिए बयान पर उठे बवाल के बाद कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा एक बार फिर पलट गए हैं। डोटासरा ने ट्वीट कर लिखा- महाराणा प्रताप की महानता पर किसी को कोई शक नहीं है, वो महान थे और रहेंगे। मेवाड़ की सत्ता के लिए हुए हल्दीघाटी युद्ध में अकबर के खिलाफ महाराणा प्रताप ने स्वाभिमान की लड़ाई लड़ी, लेकिन भाजपा ने इसे हिंदू-मुस्लिम का युद्ध बताकर बच्चों में जहर बांटने का काम किया है। डोटासरा के बयान से पलटने का कारण भाजपा के विरोध के साथ-साथ राजस्थान का जातीय समीकरण भी माना जा रहा है।
राज्य के जातीय समीकरण के हिसाब से राजपूत समाज को कोई भी पार्टी नकार नहीं सकती। राजपूत समाज सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाता है। डोटासरा के बयान के बाद राजपूत समाज भी विरोध को लेकर सक्रिय हो गया था। महाराणा प्रताप को राजपूत समाज की आन, बान और शान माना जाता है।
भाजपा के बाद राजपूत समुदाय का विरोध कांग्रेस को भारी पड़ सकता है। ये बात मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अच्छी तरह से समझते हैं, वे खुद भी जोधपुर से आते हैं और यहां आज भी राजपूतों का वर्चस्व है। राजस्थान में 1947 के बाद राजशाही तो खत्म हो गई पर यहां आज भी गढ और रजवाड़े हैं। ये राजपूत समाज के लिए राजनीतिक फैसले लेते हैं। राजपूत समाज कई अन्य समाजों को भी प्रभावित करता है। इस कारण कांग्रेस राजपूत समाज को नाराज नहीं कर सकती। ऐसे में तो बिल्कुल नहीं जब अगले साल विधानसभा चुनाव होने है।
बयान पर खाचरियावास ने खुद को किया अलग
प्रताप सिंह खाचरियावास कांग्रेस के प्रमुख राजपूत नेता हैं। राजपूत समाज के लोगों के बीच उनकी अच्छी पकड़ है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के बयान के बाद राजपूत समाज ने विरोध किया तो खाचरियावास ने महान लोगों के नाम पर राजनीति करना गलत है कहकर किनारा कर लिया। इधर, भाजपा सतीश पूनिया को आगे कर जाट और राजपूत दोनों को साधने का प्रयास किया है। इसे लेकर डोटासरा पर पार्टी के कई नेता भी हमलावर हैं।
कांग्रेस को हो सकता है नुकसान
डोटासरा ने अपना बयान बदल दिया है, लेकिन भाजपा इस मुद्दे को इतनी आसानी से दबने नहीं देगी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा को घर बैठे ही मुद्दा दे दिया, यह भविष्य में राजनीतिक समीकरण बिगाड़ सकता है। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा था कि भाजपा के पास कोई मुद्दा नहीं है। सरकार को तीन साल हो गए, लेकिन कहीं विरोध नजर नहीं आ रहा है। इसके बाद इस तरह के बयान कांग्रेस को 2023 में होने वाले चुनाव में नुकसान पहुंचा सकते हैं।
पहले बताया था सत्ता की लड़ाई
नागौर में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक में गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा था कि महाराणा प्रताप और अकबर के बीच लड़ाई सत्ता के लिए थी, लेकिन भाजपा ने इसे धार्मिक रंग दिया। भाजपा हर चीज को धार्मिक नजरिए से देखती है।