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Rajasthan: उपराष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार जैसलमेर आएंगे जगदीप धनखड़, 27 सितंबर को तनोट माता के करेंगे दर्शन

Sun, 24 Sep 2023 11:05 AM IST
लोकेंद्र सिंह चंपावत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर Published by: लोकेंद्र सिंह चंपावत Updated Sun, 24 Sep 2023 11:05 AM IST
सार

राजस्थान के जैसलमेर में पहली बार उपराष्ट्रपति बनने के बाद जगदीप धनखड़ आएंगे। जो 27 सितंबर तनोट माता मंदिर में दर्शन करेंगे। इस दौरान राष्ट्रपति के झुंझुनूं, बीकानेर, बाड़मेर, जैसलमेर में कार्यक्रम है।

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Rajasthan Jagdeep Dhankhar will come to Jaisalmer for the first time after becoming Vice President
उपराष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार आएंगे जगदीप धनखड़ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उपराष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार जगदीप धनखड़ जैसलमेर आ रहे हैं। झुंझुनूं, बीकानेर और बाड़मेर जिलों का दौरा करने के बाद वे जैसलमेर के तनोट माता मंदिर में दर्शन करने के लिए जाएंगे।

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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ 27 सितंबर को एक दिवसीय राजस्थान दौरे पर रहेंगे। उपराष्ट्रपति बनने के बाद जगदीप धनखड़ का ये पहला जैसलमेर दौरा है। उपराष्ट्रपति कार्यालय से जारी पत्र के अनुसार, 27 सितंबर को झुंझुनूं, बीकानेर और बाड़मेर जिलों का दौरा करने के बाद जैसलमेर पहुंचेंगे। यहां वे तनोट माता मंदिर में दर्शन करने के लिए जाएंगे।
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यहां देखें मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम 
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ दोपहर 3:30 बजे एयरफोर्स के विशेष विमान द्वारा रवाना होकर करीब 4:10 बजे जैसलमेर एयरपोर्ट पहुंचेंगे। जैसलमेर पहुंचने पर प्रशासनिक अधिकारी व भाजपा नेता जगदीप धनखड़ का स्वागत करेंगे। तत्पश्चात उपराष्ट्रपति धनखड़ एयरफोर्स के हेलीकॉप्टर से 4:15 बजे रवाना होकर 4:45 बजे तनोट हैलीपेड पहुंचेंगे, और फिर वे मंदिर में दर्शन करने के लिए जाएंगे। तनोट माता के दरबार में माथा टेककर विशेष पूजा अर्चना की जाएगी। इसके बाद वे करीब 5:30 बजे तनोट से जैसलमेर एयरपोर्ट के लिए रवाना हो जाएंगे। तत्पश्चात जैसलमेर से उनका दिल्ली जाने का कार्यक्रम है।
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1971 के युद्ध से जुड़ी हैं इस मंदिर की यादें
सरहद पर स्थित तनोट माता मंदिर भारत-पाकिस्तान के 1971 में लड़े गए लोंगेवाला युद्ध से प्रसिद्ध हुआ। इस युद्ध के दौरान पाकिस्तानी फौज ने तीन हजार से भी ज्यादा बम बरसाए थे। मगर मान्यता है कि माता कि कृपा और आशीर्वाद एक भी बम नहीं फटा। आज भी कुछ बम मंदिर परिसर में रखे गए।

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