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राजस्थान के रण में सबसे सुपरहिट मुकाबले की तैयारी, ये है वसुंधरा बनाम मानवेंद्र की 'जंग'

Sat, 17 Nov 2018 06:09 PM IST
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला नई दिल्ली 
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला नई दिल्ली  Updated Sat, 17 Nov 2018 06:09 PM IST
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Rajasthan Elections 2018: Manvendra Singh contest against Vasundhara Raje
वसुंधरा बनाम मानवेंद्र की जंग - फोटो : Amar Ujala

कांग्रेस पार्टी ने राजस्थान की झालरापाटन विधानसभा सीट पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के खिलाफ पूर्व भाजपाई मानवेंद्र  सिंह को चुनाव मैदान में उतारकर मुकाबले को टक्कर का बना दिया है। मानवेंद्र सिंह पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा के कद्दावर नेता रहे जसवंत सिंह के पुत्र हैं। उन्होंने पिछले माह ही कांग्रेस पार्टी ज्वाइन की थी। हालांकि वसुंधरा राजे 2003 से झालरापाटन सीट जीतती रही हैं, लेकिन इस बार कांग्रेस पार्टी ने मानवेंद्र सिंह को यहां से टिकट देकर चुनावी समीकरण बदलने का प्रयास किया है। खास बात यह भी है कि कांग्रेस पार्टी ने वसुंधरा राजे के खिलाफ चुनाव में हर बार किसी नए चेहरे को उतारा है। राजनीति के जानकार बताते हैं कि राजस्थान के राजपूत बाहुल्य इलाकों में आज भी पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह को सम्मान की नजर से देखा जाता है।इसका फ़ायदा कांग्रेस को मिल सकता है।

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मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने शनिवार को झालरापाटन विधानसभा सीट से चौथी बार नामांकन भरा है। उन्होंने 2003 में जब यहां से पहली बार चुनाव लड़ा तो उन्हें 72760 वोट मिले थे। कांग्रेस पार्टी ने राजे के खिलाफ रमा पायलट को मैदान में उतारा था, जिन्हें 45385 मत हासिल हुए थे। इसके बाद 2008 में भी वसुंधरा राजे ने इसी विधानसभा क्षेत्र में चुनाव लडा था।इस बार उन्हें 81593 वोट मिले, जबकि उनके सामने कांग्रेसी उम्मीदवार रहे मोहन लाल के खाते में 49012 वोट गए थे।

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छले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने वसुंधरा के खिलाफ राजपूत समुदाय की मीनाक्षी चंद्रावत को टिकट दिया था, लेकिन वे केवल 53488 वोट ही ले सकी।वसुंधरा राजे को इस चुनाव में 114384 मत हासिल हुए थे। यदि पिछले तीन चुनाव को देखें तो राजे के वोट लगातार बढते रहे हैं। विधायक मानवेन्द्र सिंह पूर्व में बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा क्षेत्र से सांसद भी रह चुके हैं।2003 के लोकसभा चुनाव में मानवेन्द्र सिंह ने सबसे ज्यादा मत पाकर रिकॉर्ड जीत हासिल की थी।

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इसे कहते हैं समय का फेर...जानिए कैसे  

Rajasthan Elections 2018: Manvendra Singh contest against Vasundhara Raje
वसुंधरा राजे

इसे कहते हैं समय का फेर...जानिए कैसे  

राजपूत समाज के समाजिक कार्यकर्ता विक्रम सिंह का मानना है कि भाजपा ने गत लोकसभा चुनाव में जसवंत सिंह का न केवल टिकट काटा, बल्कि उनके स्थान पर कांग्रेस में लबे समय तक सांसद रहे कर्नल सोना राम को प्रत्याशी बना दिया था। अब उसी तरह से वसुंधरा के सामने कांग्रेस ने पूर्व भाजपाई को मैदान जीतने के लिए भेजा है। कांग्रेस पार्टी ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में वरिष्ठ मंत्री रहे जसवंत सिंह के पुत्र मानवेन्द्र सिंह को टिकट दिया है। इससे कांग्रेस पार्टी ने दो निशाने लगाए हैं। एक, राजस्थान के राजपूतों को यह संदेश दे दिया है कि भाजपा में उनकी कोई सुनने वाला नहीं है।

दूसरा, भाजपा ने अपने एक कद्दावर नेता के साथ किस तरह बेरुखी दिखाई है, यह भी बता दिया है। पहले जसवंत सिंह का टिकट काटा जाता है और फिर जब वे बीमार होते हैं तो भाजपा के अधिकांश बड़े नेता उनसे कन्नी काट लेते हैं। दिल्ली के अस्पताल में भर्ती जसवंत सिंह का हालचाल जानने के लिए लाल कृष्ण आडवाणी के अलावा अन्य कोई नेता नहीं पहुँचा था। कांग्रेस पार्टी ने इन सब वजहों को एक साथ जोड़कर यह साबित करने की कोशिश की है कि राजस्थान में पारम्परिक राजपूत मतदाता भाजपा से नाराज हैं।
 

चुनाव में ये सब बातें भी मुकाबले को कांटे का बनाएंगी...

सीमावर्ती क्षेत्र के कई जिलों में सिंधी मुसलमान भी बड़ी संख्या में रहते हैं। कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे अमीन खान ने कुछ समय पहले अपने एक बयान में कहा था कि हमारे इलाक़े में राजपूतों और मुसलमानों में अच्छे रिश्ते रहे हैं।इससे कांग्रेस को लाभ होगा। उनके मुताबिक, मरुस्थल के इस भूभाग में अक्सर पूर्व जागीरदार और राजपूत भाजपा की बड़ी ताकत रहे हैं।अब मानवेन्द्र के कांग्रेस में जाने से भाजपा कमजोर हो सकती है। मुस्लिम और राजपूत, कांग्रेस के पक्ष में खड़े होंगे, इसके पूरे आसार हैं। मानवेंद्र सिंह ने जब कांग्रेस का दामन थामा तो उससे कुछ दिन पहले खासतौर से राजपूत समुदाय में यह मैसेज भी चलाया गया कि वाजपेयी सरकार के दौरान जब विमान अपहरण के बाद किसी मंत्री को कंधार भेजने का मौका आया तो जसवंत सिंह को रवाना कर दिया गया। उस वक्त जसवंत सिंह ने पार्टी के लिए सारी तोहमत अपने नाम पर ले ली थी, मगर उसी भाजपा ने 2014 में उनकी टिकट काट दी।

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