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झालरापाटन से ग्राउंड रिपोर्ट: वसुंधरा को कड़ी चुनौती दे रहे मानवेंद्र रचेंगे इतिहास?

Wed, 05 Dec 2018 02:33 PM IST
विनोद अग्निहोत्री, कोटा/ झालरापाटन (झालावाड़)
विनोद अग्निहोत्री, कोटा/ झालरापाटन (झालावाड़) Updated Wed, 05 Dec 2018 02:33 PM IST
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Rajasthan elections 2018: High profile Jhalrapatan seat Vasundhra raje versus manvendra singh
वसुंधरा से टकराएंगे मानवेंद्र (अमर उजाला ग्राफिक) - फोटो : Amar Ujala
कोटा से झालावाड़ जाने वाले रास्ते पर चार लेन का काम जारी है।  इसलिए शुरुआती 30 किलोमीटर में झटकों और धीमी रफ्तार की वजह से 80 किलोमीटर का यह सफर थोड़ा लंबा लगता है। आम तौर पर राजस्थान में एक शहर को दूसरे शहर से जोड़ने वाले हाईवे चौड़े और ठीकठाक हैं। मगर कोचिंग के लिए मशहूर कोटा और मुख्यमंत्री राजे के चुनाव क्षेत्र वाले जिले झालावाड़ को जोड़ने वाले रास्ते को सुधारने की याद राज्य सरकार को इतनी देर से क्यों आई यह यक्ष प्रश्न है। 
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रानी को चुनौती

लेकिन फिर भी ज्यादातर लोग वसुंधरा से नाराज नहीं हैं। लेकिन इस बार भाजपा से कांग्रेस में आए मानवेंद्र ने मैदान में उतरकर मुकाबले को दिलचस्प जरूर बना दिया है। वसुंधरा जहां अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं और उन्हें झालरापाटन के मतदाताओं के विवेक पर पूरी तरह भरोसा है, वहीं गांव-गांव मोहल्ले में घूम रहे मानवेंद्र की कोशिश चुनाव जीतने से ज्यादा रानी को कठिन चुनौती देने की लगती है। 
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सड़क के किनारे चाय की दुकान पर बैठे राधे का कहना है कि भाजपा और वसुंधरा को यहां कोई चुनौती नहीं है। मानवेंद्र सिंह के आने से बस मीडिया का आना जाना ज्यादा हो रहा है। वैसे भी राज्य के दूसरे हिस्से बाड़मेर से चुनाव लड़ने आए कांग्रेस उम्मीदवार मानवेंद्र सिंह को अभी इलाके का भूगोल भी ठीक से नहीं पता और वसुंधरा ने क्षेत्र के विकास के लिए जो काम किया है उसे कौन भुला सकता है। 
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कृष्णम के दावे को वोट में बदल पाएगी कांग्रेस?

इसी तरह की राय आगे भी मिलती है। वैसे मानवेंद्र के प्रचार में लगे कांग्रेस कार्यकर्ता खासे उत्साहित नजर आते हैं। मानवेंद्र के प्रचार के लिए पार्टी के कई स्टार प्रचारक आ रहे हैं। चार दिसंबर को कल्कि पीठाधीश्वर प्रमोद कृष्णम की ताबड़तोड़ जनसभाओं में उमड़ी भीड़ ने कांग्रेस में जोश भर दिया है। सनेल, पीडाबा, रायपुर और झालावाड़ में देर रात हुई चुनावी सभाओं में लोगों का जोश देखने लायक था। 



अगर कांग्रेस उम्मीदवार और कार्यकर्ता इस भीड़ को वोटों में बदलने में कामयाब रहे तो वसुंधरा को कड़ी चुनौती मिल सकती है। हालांकि सभाओं की सफलता से उत्साहित प्रमोद कृष्णम ने दावा किया कि इस बार झालरापाटन में इतिहास बदलने जा रहा है और मानवेंद्र को जीतने से कोई रोक नहीं सकता। लेकिन स्थानीय लोग आचार्य को सुनने आई भीड़ को वसुंधरा के लिए चुनौती या खतरा नहीं मानते हैं। 

'कोटा में इस बार कांग्रेस का जोर ज्यादा है'

Rajasthan elections 2018: High profile Jhalrapatan seat Vasundhra raje versus manvendra singh
प्रमोद कृष्णम, मानवेंद्र सिंह, दिग्विजय सिंह - फोटो : Amar Ujala

वसुंधरा के कद का कोई मुकाबला नहीं

भाजपा समर्थक वीरेंद्र कुमार कहते हैं कि भाजपा द्वारा जसवंत सिंह की अनदेखी और आनंदपाल के पुलिस मुठभेड़ में मौत के मुद्दे ने राजपूतों को नाराज कर दिया है। इसका कुछ फायदा मानवेंद्र को जरूर मिल रहा है लेकिन वसुंधरा के काम और कद का कोई मुकाबला नहीं है। इसलिए झालरापाटन में वसुंधरा पिछली बार की तरह हजारों वोटों के अंतर से जीतेंगी और सब जानते हैं कि उसके बाद मानवेंद्र बाड़मेर लौट जाएंगे। 

यही राय कोटा से आए राकेश तिवारी की भी है। उनका कहना है कि वसुंधरा को हर बिरादरी और वर्ग के वोट मिलेंगे। 

'कोटा में कांग्रेस का जोर ज्यादा'

जबकि कोचिंग के लिए मशहूर कोटा में इस बार कई सीटों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला दिखाई दे रहा है। कोचिंग चलाने वाले मोहन स्वामी कहते हैं कि इस बार कोटा में कांग्रेस का जोर ज्यादा है और कोटा समेत पूरे राजस्थान में कांग्रेस जीत रही है। मोहन स्वामी के मुताबिक उनके पास राज्य के अलग-अलग इलाकों के बच्चे आते हैं, उनसे मिली राय से यही तस्वीर बनती है। 

भाजपा कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर

सिविल ठेकेदार सोहनलाल की राय भी यही है कि कोटा में इस बार कांग्रेस का जोर ज्यादा है। कोटा में कुल छह सीटें है जिनमें 2013 में सभी सीटों पर भाजपा जीती थी। इस बार कोटा दक्षिण, रामगंज मंडी और सनगोड में लोग कांग्रेस का पलड़ा भारी बताते हैं जबकि लाडपुरा में भाजपा के जीत की संभावना ज्यादा है। वहीं पीपलाडा और कोटा उत्तर में भाजपा कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर है। चुनाव सर्वेक्षण के काम में जुटे जयपुर पॉलिसी रिसर्च सेंटर की रिपोर्ट भी कुछ ऐसा ही कहती है। 
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