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Rajasthan Election Result: OSD लोकेश शर्मा ने CM को बताया फरेबी, बोले- ये कांग्रेस की नहीं, गहलोत की शिकस्त
Mon, 04 Dec 2023 12:28 PM IST
उदित दीक्षित
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: उदित दीक्षित
Updated Mon, 04 Dec 2023 12:28 PM IST
सार
Rajasthan Assembly Election Result 2023: आलाकमान के साथ फरेब, सही फीडबैक न पहुंचने देना, किसी को विकल्प तक न बनने देना, अपरिपक्व और अपने फायदे के लिए जुड़े लोगों से घिरे रहकर आत्ममुग्धता में लगातार गलत निर्णय, फीडबैक और सर्वे को दरकिनार करने की जिद हार का कारण रही।
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चुनाव में हार के बाद लोकेश शर्मा का सीएम गहलाेत पर बड़ा हमला।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 के परिणामों में कांग्रेस चारों खाने चित्त हो गई। प्रदेश की जनता ने राज बदल दिया, लेकिन रिवाज नहीं बदला। कांग्रेस की हार को लेकर सीएम अशोक गहलोत के ओएसडी लोकश शर्मा का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने हार का जिम्मेदार गहलोत को ही बता दिया। उन्होंने गहलोत पर फरेबी बताते हुए 25 सितंबर 2022 की घटना का जिक्र किया। उन्होंने कहा पूरी घटना प्रायोजित थी। आलाकमान के खिलाफ विद्रोह कर अवमानना की गई। उसी दिन से ये खेल शुरू हो गया था।
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लोकेश शर्मा ने एक्स कर लिखा- लोकतंत्र में जनता ही माई-बाप है और जनादेश शिरोधार्य है, विनम्रता से स्वीकार है। मैं नतीजों से आहत जरूर हूं, लेकिन अचंभित नहीं। कांग्रेस राजस्थान में निःसंदेह रिवाज बदल सकती थी। लेकिन, अशोक गहलोत कभी कोई बदलाव नहीं चाहते थे। यह कांग्रेस की नहीं बल्कि अशोक गहलोत की शिकस्त है।
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गहलोत के चेहरे पर उनको फ्री हैंड देकर उनके नेतृत्व में पार्टी ने चुनाव लड़ा और उनके मुताबिक प्रत्येक सीट पर वे स्वयं चुनाव लड़ रहे थे। न उनका अनुभव चला, न जादू। हर बार की तरह कांग्रेस को उनकी योजनाओं के सहारे जीत नहीं मिली और न ही अथाह पिंक प्रचार काम आया। तीसरी बार लगातार सीएम रहते हुए गहलोत ने पार्टी को फिर हाशिये पर लाकर खड़ा कर दिया। आज तक पार्टी से सिर्फ लिया ही लिया है, लेकिन कभी अपने (गहलोत के) रहते पार्टी की सत्ता में वापसी नहीं करवा पाए गहलोत।
आलाकमान के साथ फरेब, ऊपर सही फीडबैक न पहुंचने देना, किसी को विकल्प तक न बनने देना, अपरिपक्व और अपने फायदे के लिए जुड़े लोगों से घिरे रहकर आत्ममुग्धता में लगातार गलत निर्णय और आपाधापी में फैसले लेते रहना, तमाम फीडबैक और सर्वे को दरकिनार कर अपनी मनमर्जी और अपने पसंदीदा प्रत्याशियों को उनकी स्पष्ट हार को देखते हुए भी टिकट दिलवाने की जिद हार का कारण रही। आज के ये नतीजे तय थे। मैं स्वयं मुख्यमंत्री को यह पहले बता चुका था, कई बार आगाह कर चुका था। लेकिन, उन्हें कोई ऐसी सलाह या ऐसा व्यक्ति अपने साथ नहीं चाहिए था जो सच बताए।
मैं छः महीने लगातार घूम-घूम कर राजस्थान के कस्बों-गांव-ढाणी में गया, लोगों से मिला, हजारों युवाओं के साथ संवाद कार्यक्रम आयोजित किए। लगभग 127 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करते हुए ग्राउंड रिपोर्ट सीएम को लाकर दी। जमीनी हकीकत को बिना लाग-लपेट सामने रखा। ताकि, समय पर सुधारात्मक कदम उठाते हुए फैसले किए जा सकें, जिससे पार्टी की वापसी सुनिश्चित हो।
मैंने खुद भी चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की थी, पहले बीकानेर से फिर सीएम के कहने पर भीलवाड़ा से, जिस सीट को हम 20 साल से हार रहे थे। लेकिन, ये नया प्रयोग नहीं कर पाए। बीडी कल्ला के लिए मैंने 6 महीने पहले ही बता दिया था कि वे 20 हजार से ज्यादा मत से चुनाव हारेंगे और वही हुआ। अशोक गहलोत ने इस तरह फैसले लिए गए कि विकल्प तैयार ही नहीं हो पाए। 25 सितंबर की घटना भी पूरी तरह से प्रायोजित थी, जब आलाकमान के खिलाफ विद्रोह कर अवमानना की गई थी उसी दिन से शुरू हो खेल शूरू हो गया था।