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विधानसभा चुनाव: शाहपुरा से चुरू तक राजस्थान ने ओढ़ ली है बदलाव की चादर

Tue, 23 Oct 2018 02:26 AM IST
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली
शशिधर पाठक, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 23 Oct 2018 02:26 AM IST
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Rajasthan Election: Everyone believes that Congress is forming government in Rajasthan

पांच साल तक राज कर चुकी भाजपा राजस्थान में अपनी इज्जत बचाने के लिए चुनाव मैदान में है तो कांग्रेस की सरकार आ रही है। यह हम नहीं हरियाणा की सीमा पार करके जयपुर हाई-वे पर शाहपुरा पहुंचते ही 10 में से सात राजस्थानी कह रहा है। ढाबे से लेकर आटो रिक्शा चालक और मजदूर से लेकर सेना से रिटायर होने के बाद खुद की दुकान संभाल रहे बलवंत सिंह, सबका मानना है कि राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बन रही है। दिलचस्प यह भी है कि प्रधानमंत्री लोकप्रिय नेता बने हुए हैं और अशोक गहलोत मुख्यमंत्री के रूप में राज्य में पहली पसंद।

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सचिन पायलट को लोग अच्छा, ईमानदार, युवा नेता बताते हैं, लेकिन अशोक गहलोत का मध्य वर्ग, निम्न वर्ग की जरूरत ध्यान में रखकर चलना, हमेशा उपलब्ध रहना, सरल व्यवहार लोगों को खूब आकर्षित कर रहा है। लेकिन 10 में से औसतन सात लोग यह नहीं बता पाते कि उन्होंने 2013 में किस कारण से अशोक गहलोत को हराया था। इससे भी दिलचस्प सवाल यह है कि आखिर इस चुनाव में वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली सरकार से लोग क्यों इतना नाराज हैं? इस सवाल का पांच से सात लोग कोई उत्तर नहीं दे पाते। 
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इस सवाल के जवाब में बस एक ही जवाब मिलता है कि वसुंधरा राजे सिंधिया राजस्थान की अगली सीएम नहीं बनेंगे। बहरोड़, शाहपुरा, कोटपुतली से आगे बढ़ने पर हर 20-25 किमी पर यही सवाल दोहराए गए। हर जगह जवाब एक ही मिला। लक्ष्मणगढ़, सालासर, सुजानगढ़ तक हर वर्ग मान रहा है कि राजस्थान के विधानसभा चुनाव में भाजपा की स्थिति खराब है। खाटू श्याम से लेकर जयपुर के रास्ते पर भी राजस्थान ने राजनीतिक बदलाव की चादर ओढ़ ली है।
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सड़क पर राजस्थान

सड़क के मामले में राजस्थान ने काफी तरक्की की है। जयपुर हाईवे को छोड़ने के बाद स्टेट हाई-वे और जिला स्तर की सड़कें भी बेहतर बनी हैं, लेकिन पानी की कमी से जूझने वाले राजस्थान में स्वच्छता अभियान करीब-करीब मुंह चिढ़ाता नजर आया। टॉयलेट हैं। नये बने भी हैं, लेकिन पानी के आभाव में हर जगह गंदगी भरी पड़ी है। इस सवाल पर रमेश बिसारिया का कहना है कि सरकार ने बिना सोचे-समझे और अव्यवाहिरक कदम उठाया है। इसमें केवल जनता के नाम पर और विकास का हवाला देकर पैसे की बर्बादी हो रही है।

राफेल उड़ रहा है....अटल जी भी चर्चा में

राफेल लड़ाकू विमान का मुद्दा पढ़े-लिखे लोगों में चर्चा का विषय है। उन्हें लग रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रिलायंस डिफेंस को यह सौदा दिलाया है। हेमंत शर्मा का कहना है कि राफेल लड़ाकू विमान सौदे प्रधानमंत्री मोदी की साख पर बट्टा लगा दिया। हेमंत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नोटबंदी योजना से भी संतुष्ट नहीं हैं, लेकिन उन्होंने वस्तु एवं सेवाकर अधिनियम (जीएसटी) को लागू होना अच्छा बताया है। हेमंत का मानना है कि भाजपा के प्रवक्ता गलत मुद्दों पर हल्ला मचा रहे हैं। कपड़े की दुकान संभाल रहे सतीश और सुनील दोनों भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा बिना वजह शोर मचाने वाला मानते हैं। सुजानगढ़ में एक छोटा सा एनजीओ चलाने वाले कमल किशोर और राजेश शेखावत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रशंसक हैं, लेकिन दोनों का मानना है कि पूर्व प्रधानमंत्री के शरीर त्यागने के बाद जिस तरह से अस्थि कलश यात्रा निकाली गई, वह बहुंत परेशान करती है।

सबके अपने अपने नारे

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने हाल के दौरे में एक नारा दे दिया है। गली-गली में शोर है ......। यह नारा चल निकला है। शेखावटी अंचल में भाजपा के नेताओं ने एक नारा दिया है। एक ही सिंह, भैरो सिंह...भैरो सिंह। गहलोत नहीं आंधी है, विकास का गांधी है जैसे नारों ने राजस्थान में अपनी खासी जगह बना ली है। अजय कुमावत का मानना है कि ये नारे लोगों की संवेदना को दर्शाते हैं। तभी तो नेता मंच से नारा लगाता है और पीछे खड़ी जनता खुलकर उसका साथ देती है।

 
100 टिकट काट देने से क्या होगा

जयपुर में शिव माथुर का सवाल है कि राजस्थान में जनता ने मन बना लिया और अब यदि भाजपा 100 विधायकों के टिकट भी काट दे तो क्या होने वाला? एक रेवेन्यू अफसर के मुताबिक राजस्थान में पिछले कुछ दशक से कोई मुख्यमंत्री लगातार कार्यकाल नहीं दोहरा पा रहा है। भैरो सिंह शेखावत बहुत लोकप्रिय नेता थे, लेकिन वह भी नहीं दोहरा पाए। जयपुर के सरकारी अस्पताल में तैनात एक अस्थि रोग विशेषज्ञ का कहना है कि यह हर बार मुख्यमंत्री बदल देने वाला राज्य है। वैसे भी राज्य की मुख्यमंत्री और भाजपा के दिल्ली में बैठे नेताओं के बीच तालमेल अच्छा नहीं रहा। इसका भी खामियाजा भाजपा को भुगतना पड़ रहा है।

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