मदद में जमा 17 लाख बने 'जान के दुश्मन'
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जिसने भी ये तस्वीर देखी होगी वह शायद इसे भुला नहीं पाया होगा। राजस्थान में भरतपुर की इस दामिनी ने जब आंखें खोलीं तो मां चल बसी और पिता बबलू उसे रिक्शे में झूले की तरह लटकाए घूमता था।
फिर मीडिया में इसकी खबर आने के बाद सारे जहां ने उसकी मदद की और देखते-देखते कोई सत्रह लाख रुपए जमा हो गए।
दामिनी अब डेढ़ साल की है और उस समय इकट्ठा हुई रकम ही उसकी जान की दुश्मन हो गई है।
अपहरण
भरतपुर पुलिस ने रविवार को बबलू के एक दोस्त को दामिनी के अपहरण के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस ने दामिनी को बरामद कर उसे भरतपुर की बाल कल्याण समिति को सौंप दिया है।
मगर इसके साथ ही दूसरी जो चौंकाने वाली बात सामने आ रही है, वो है पुलिस का दावा कि दामिनी के पिता बबलू को शराब की लत लग गई है।
वैसे बाल कल्याण समिति की जगह अनजान है मगर समिति के प्रमुख अलोक शर्मा कहते हैं दामिनी पूरी खैरियत से है।
पुलिस की मुस्तैदी
बाल कल्याण समिति कहती हैं, ''उसे रविवार की रात हल्का बुखार था, अब वह दुरुस्त है। हम उसका पूरा ख्याल रख रहे हैं। अभी छोटी है ना, लिहाजा थोड़ी ज्यादा सार-संभाल की जरूरत है।"
भरतपुर पुलिस उस समय हरकत में आई जब बबलू ने ये कहते हुए मदद मांगी कि उसकी बेटी का अपहरण हो गया है।
पुलिस ने मुस्तैदी दिखाई और दामिनी की खोज में अभियान शुरू किया। पुलिस के मुताबिक, बबलू का दोस्त दामिनी को लेकर रेल में सवार हो गया और फिर भरतपुर के नदबई रेलवे स्टेशन पर उतर गया।
परवरिश
भरतपुर के पुलिस थाने अटलबंध के थानाधिकारी सत्येन्द्र सिंह नेगी कहते हैं, ''हमने बालिका को बरामद कर उसकी मेडिकल जांच करवाई है, वह ठीक हालत में है। उसे बाल कल्याण समिति को सौंपा गया है। ताकि उसकी ठीक से परवरिश हो सके। इस सिलसिले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। उससे पूछताछ कर रहे है।"
पुलिस के अनुसार शनिवार रात बबलू, उसका दोस्त और एक अन्य व्यक्ति साथ शराब पीकर सो गए। मगर बबलू का दोस्त अगले दिन रविवार को बालिका को उठाकर चुपचाप निकल गया।
पुलिस का कहना है कि वह गलती से आगरा के बजाय जयपुर जाने वाली ट्रैन में बैठ गया। मगर जब वह नदवई स्टेशन पर उतरा तो उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, "इन लोगों को लगा कि बालिका के नाम काफी पैसा है। लिहाजा ये पैसा हड़पा जा सकता है। इसीलिए बालिका का अपहरण कर लिया गया। ये अनपढ़ लोग है और ज्यादा कुछ समझते नहीं है।"
हिमायत और दुआ
बाल कल्याण समिति के आलोक शर्मा बताते हैं कि बालिका को मिले पैसे की समुचित निगरानी और उसे दामिनी के हक़ में इस्तेमाल के लिए सरकार ने एक समिति गठित कर रखी है।
शर्मा भी इसके एक सदस्य हैं। ''हर माह समिति आकलन कर एक निश्चित राशि बबलू को देती है ताकि बालिका की परवरिश की जा सके। उसके लिए वस्त्र, आहार और इलाज के लिए ही राशि सरकार की देख-रेख में खर्च की जाती है। दामिनी बडी होगी तो उसका भविष्य संवारने में ये राशि खर्च की जाएगी।"
दामिनी को नवंबर, 2012 में बीमार होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
मां की मौत
दामिनी वर्ष 2012 में 15 सितंबर को पैदा हुई। मगर जल्द ही मां की मौत हो गई। घर में कोई और नहीं था जो सहारा देता इसलिए बबलू ने उसे अपने साथ बांधकर रिक्शा चलाना शुरू किया। दामिनी की ये दर्दभरी दास्तां जब दुनिया को पता चली, हर हाथ हिमायत और दुआ के लिए उठता चला गया।
अब जानकारी मिली है कि बबलू शराब में गाफिल रहने लगा है और उसके इर्द-गिर्द ऐसे ही लोगों का जमावड़ा लगा रहता है जिनकी निगाहें उस रकम पर हैं।
वह नन्हीं सी परी। मां का साया नहीं और पिता ने जिन हाथों को झूला बनाया था, वे हाथ अब जाम थामे मिलते हैं। बेदर्द जमाना और एक नन्हीं जान। मगर अब भी मददगारों की कोई कमी नहीं है।