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राजस्थान: साइबर ठगी के खिलाफ सिस्टम कितना तैयार? 10 जिलों के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

Wed, 30 Sep 2026 03:31 PM IST
Sourabh Bhatt न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Sourabh Bhatt Updated Wed, 30 Sep 2026 03:31 PM IST
सार

राजस्थान में साइबर के मामले चिंता बढ़ाने वाले हैं। 10 जिलों में 23,227 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से 1,724 मामलों का ही निस्तारण हुआ। सवाल यह है कि साइबर क्राइम से निपटने के लिए हमारा सिस्टम कितना तैयार है?

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Rajasthan Cybercrime: 23,000+ Complaints, Disposal Rate Just 7.42%
साइबर क्राइम - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक

विस्तार

राजस्थान में साइबर अपराध की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन कई जिलों में पुलिस इन मामलों के निस्तारण में पीछे है। जनवरी से अगस्त 2026 तक हर महीने सबसे कम निस्तारण दर वाले 10 जिलों को देखें तो 23,227 शिकायतें दर्ज हुईं, जबकि 1,724 मामलों का ही निस्तारण हो सका। इनकी औसत निस्तारण दर 7.42 फीसदी रही।

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इन आठ महीनों में 28 जिले ऐसे रहे, जो किसी न किसी महीने सबसे कम निस्तारण वाले 10 जिलों में शामिल हुए। पाली की स्थिति सबसे खराब रही। जनवरी से अगस्त तक वह हर महीने इस सूची में रहा। जिले में 349 शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन सिर्फ छह का निस्तारण हुआ। निस्तारण दर 1.72 फीसदी रही।
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जयपुर सिटी दक्षिण में 918 शिकायतों में से 20 का निस्तारण हुआ। इसकी दर 2.18 फीसदी रही। बीकानेर में 489 में से 12 शिकायतें निपटीं और दर 2.45 फीसदी रही। जयपुर पश्चिम में 1,198 शिकायतों में से 33 का निस्तारण हुआ। यहां दर 2.75 फीसदी रही।
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भिवाड़ी में 246 शिकायतों में सात का निस्तारण हुआ और दर 2.85 फीसदी रही। डूंगरपुर में 218 में से नौ, खैरथल-तिजारा में 144 में से छह, झुंझुनूं में 661 में से 31, ब्यावर में 267 में से 14 और भीलवाड़ा में 615 में से 33 शिकायतों का निस्तारण हुआ।

पाली में जनवरी से अगस्त तक गिरती गई दर

पाली में जनवरी में साइबर शिकायतों की निस्तारण दर 10.49 फीसदी थी। अगस्त तक यह घटकर 1.72 फीसदी रह गई। जयपुर सिटी दक्षिण में भी शिकायतों की संख्या बढ़ी, लेकिन निस्तारण कम हुआ।

अप्रैल में जयपुर सिटी दक्षिण में 760 शिकायतें दर्ज हुई थीं और 83 का निस्तारण किया गया था। उस महीने दर 10.92 फीसदी थी। अगस्त तक शिकायतों की संख्या बढ़कर 918 हो गई, लेकिन निस्तारण सिर्फ 20 मामलों का हुआ।

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संदिग्ध खातों पर बैंक निगरानी जरूरी

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर ठगी के मामलों में बैंकों की भूमिका भी अहम है। संदिग्ध खातों और लेनदेन की पहचान समय पर हो जाए तो ठगी की रकम के ट्रांजेक्शन को ट्रैक करना और आगे होने वाले नुकसान को रोकना आसान हो सकता है।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (साइबर क्राइम) वीके सिंह ने कहा कि पहले संसाधनों की कमी के कारण निस्तारण कम रहा। अब संसाधन बढ़ाए गए हैं और पुलिस ज्यादा मामलों को निपटाने पर काम कर रही है। उनके मुताबिक, शिकायतें बढ़ रही हैं और बेहतर समन्वय से मामलों के निस्तारण में मदद मिल रही है।

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