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राजस्थान: सीएम गहलोत ने उत्तराखंड धर्म संसद की तुलना 1893 में शिकागो में हुए विश्व धर्म संसद से की
Thu, 30 Dec 2021 02:13 AM IST
Kuldeep Singh
पीटीआई, जयपुर
पीटीआई, जयपुर
Published by: Kuldeep Singh
Updated Thu, 30 Dec 2021 02:13 AM IST
सार
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक ट्वीट में कहा, आइए हम सभी सोचें कि 1893 में शिकागो में एक धर्म संसद का आयोजन किया गया था, जहां स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुष चर्चा से उभरे थे। लेकिन यहां हो रही धार्मिक संसदों से अनियंत्रित और दुष्ट लोग बाहर आ रहे हैं।
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राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को कहा कि स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुष 1893 में शिकागो में आयोजित धर्म संसद में चर्चा से उभरे हैं, जबकि उत्तराखंड धर्म संसद में हुई चर्चा से अराजक और दुष्ट लोग उभरे।
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उन्होंने कहा कि देश के लोगों को तय करना चाहिए कि हमें स्वामी विवेकानंद जैसे महान व्यक्तित्व की जरूरत है या दंगों और नरसंहार की बात करने वालों की। गहलोत ने एक ट्वीट में कहा, आइए हम सभी सोचें कि 1893 में शिकागो में एक धर्म संसद का आयोजन किया गया था, जहां स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुष चर्चा से उभरे थे। लेकिन यहां हो रही धार्मिक संसदों से अनियंत्रित और दुष्ट लोग बाहर आ रहे हैं।
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एक मीडिया चैनल से बातचीत में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर अनभिज्ञता व्यक्त की, जो आश्चर्य की बात है जब उनके पास खुद गृह विभाग का विभाग है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, जो कानून व्यवस्था की स्थिति का मजाक है। यह बहुत ही शर्मनाक है कि उत्तराखंड में विवादास्पद धर्म संसद के एक सप्ताह से अधिक समय के बाद भी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
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16 से 19 दिसंबर तक उत्तराखंड के हरिद्वार के वेद निकेतन धाम में हुआ था कार्यक्रम
मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा शासित राज्यों में कलाकारों, पत्रकारों और हास्य कलाकारों पर भी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की धाराओं के तहत आरोप लगाया गया था, लेकिन उत्तराखंड में नरसंहार को भड़काने वाले भाषणों के बावजूद कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि धर्म संसद के नाम पर गांधीजी और नेहरू जैसे स्वतंत्रता सेनानियों को नरसंहार और गाली देने के लिए लोगों को भड़काने का काम किया जा रहा है। 16 से 19 दिसंबर तक उत्तराखंड के हरिद्वार के वेद निकेतन धाम में आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभागियों द्वारा कथित तौर पर मुसलमानों के खिलाफ हिंसा भड़काने वाले भड़काऊ भाषण दिए गए थे।