राजस्थान: पार्षदों को कितने करोड़ का ऑफर? निकाय चुनाव के बाद गहलोत के इस दावे ने क्यों मचा दिया सियासी घमासान
निकाय चुनाव के बाद बोर्ड गठन को लेकर राजस्थान में सियासत गरमा गई है। अशोक गहलोत ने पार्षदों को करोड़ों के ऑफर और दबाव के गंभीर आरोप लगाए हैं।
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राजस्थान में निकाय चुनाव पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने सत्ताधारी बीजेपी पर बड़ा आरोप लगा दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि निर्दलीय और विपक्षी पार्षदों को भाजपा के पक्ष में लाने के लिए डेढ़ करोड़, दो करोड़ और ढाई करोड़ रुपये तक के ऑफर दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कुछ जगहों पर मंत्रियों को भी इस तरह की कोशिशों में लगाया गया है।
गहलोत ने कहा कि निष्पक्ष चुनाव के लिए सभी राजनीतिक दलों को समान अवसर मिलना जरूरी है, लेकिन निकाय चुनाव के बाद बोर्ड गठन में ऐसा माहौल नहीं दिख रहा। उनके मुताबिक, पुलिस कार्रवाई, पार्षदों पर दबाव और सरकारी तंत्र के इस्तेमाल की शिकायतें सामने आ रही हैं।
गहलोत बोले- चुनाव के बाद भाजपा पर बोर्ड बनाने का दबाव
पूर्व मुख्यमंत्री ने निकाय चुनाव के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा और कांग्रेस के वोट शेयर में अंतर बहुत कम रहा है, लेकिन कई निकायों में सीटों का गणित अलग तस्वीर पेश करता है। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के 10,244 वार्डों में भाजपा 6,065 वार्डों में चुनाव हार गई। गहलोत के अनुसार, 309 निकायों में से 223 में भाजपा को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। उन्होंने कहा कि 10 नगर निगमों में भाजपा को चार निगमों में बहुमत मिला है। ऐसे में जिन निकायों में किसी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, वहां निर्दलीय और अन्य दलों के पार्षद बोर्ड गठन में महत्वपूर्ण हो गए हैं।
बड़े नेताओं के इलाकों में भी नहीं मिला स्पष्ट बहुमत
गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह क्षेत्र भरतपुर के साथ अजमेर, अलवर, जोधपुर, पाली और झालावाड़ का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि इन प्रमुख नेताओं से जुड़े क्षेत्रों में भाजपा स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं कर सकी। भरतपुर नगर निगम में भाजपा 20 सीटों पर सिमटी, जबकि 36 निर्दलीय पार्षद चुने गए हैं। ऐसे में मेयर चुनाव का गणित निर्दलीयों के समर्थन पर निर्भर है। इसी तरह जोधपुर नगर निगम में भी भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला रहा और निर्दलीय पार्षदों की भूमिका अहम हो गई है।
परिसीमन पर भी गहलोत ने उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने निकाय चुनाव के परिसीमन पर भी सवाल उठाए। उनका दावा है कि प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के वोट शेयर में अंतर महज 0.94 प्रतिशत रहा, लेकिन सीटों के आंकड़े में अंतर इससे काफी ज्यादा है।
उन्होंने जोधपुर का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस को भाजपा से अधिक वोट मिलने के बावजूद दोनों दलों को 44-44 सीटें मिलीं। गहलोत ने आरोप लगाया कि परिसीमन के दौरान कांग्रेस समर्थक इलाकों को अलग तरीके से बांटा गया, जबकि भाजपा समर्थक क्षेत्रों में वार्डों का विभाजन किया गया। जयपुर को लेकर भी उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस को अधिक वोट मिलने के बावजूद परिसीमन के कारण भाजपा ज्यादा वार्ड जीतने में सफल रही।
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पुलिस और प्रशासन के इस्तेमाल का भी आरोप
गहलोत ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कार्यालय से एक आईएएस अधिकारी कलेक्टरों और एसडीएम पर भाजपा के बोर्ड बनाने के लिए दबाव डाल रहे हैं। उन्होंने मंडावा, नीमराना, टोंक, जोधपुर, कोटपूतली-बहरोड़, सीकर, धौलपुर, जालौर, अजमेर और बूंदी समेत कई इलाकों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि निर्दलीय और कांग्रेस पार्षदों को पुलिस के जरिए डराने-धमकाने, बाड़ाबंदी वाले स्थानों पर दबिश देने और उनके परिजनों पर दबाव बनाने की कोशिशें की जा रही हैं।
'करोड़ों खर्च कर मेयर-चेयरमैन बनेंगे तो वसूली भी होगी'
गहलोत ने पार्षदों की खरीद-फरोख्त का जिक्र करते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति करोड़ों रुपये खर्च करके मेयर या चेयरमैन बनेगा तो बाद में वह रकम वसूलने की कोशिश करेगा और इसका बोझ आम जनता पर पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल सत्ता हासिल करने का मामला नहीं है, बल्कि स्थानीय निकायों के कामकाज और जनता के पैसे पर भी इसका असर पड़ेगा।