फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Rajasthan Cabinet expansion can be averted by Gehlot magical math why Congress is worried about the loss in Rajya Sabha elections Latest News Update

राजस्थान: गहलोत के इस 'जादुई गणित' से टल सकता है मंत्रिमंडल विस्तार, राज्यसभा चुनाव में नुकसान को लेकर क्यों परेशान है कांग्रेस 

Mon, 15 Nov 2021 06:26 PM IST
Rahul Sampal राहुल संपाल
Updated Mon, 15 Nov 2021 06:26 PM IST
सार

राजस्थान के बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों के साथ ही पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की भूमिका को लेकर भी निर्णय होगा। हाईकमान पायलट को संगठन में बड़ी और अहम जिम्मेदारी देने पर विचार कर रहा है।

विज्ञापन
Rajasthan Cabinet expansion can be averted by Gehlot magical math why Congress is worried about the loss in Rajya Sabha elections Latest News Update
अशोक गहलोत (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

विस्तार

राजस्थान में मंत्रिमडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों का मामला दिन ब दिन उलझता ही जा रहा है। सीएम अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट की हाईकमान से वन टू वन चर्चा के बाद अब केवल नामों पर अंतिम मुहर लगने का इंतजार है। हालांकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ प्रदेश प्रभारी अजय माकन और कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के साथ एक दौर की बातचीत और होने के आसार हैं। इस बीच कांग्रेस आलाकमान के सामने सीएम गहलोत ने जो दांव चला उससे पायलट खेमे को फिर निराशा हाथ लग सकती है। ऐसे में प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार कुछ माह के लिए फिर टाला जा सकता है।

विज्ञापन


गहलोत ने चला आखिर कौन सा नया दांव
सीएम गहलोत और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के बीच हुई वन टू वन चर्चा में सीएम ने नया दांव चल दिया है। अगर गहलोत का ये जादुई गणित ठीक रहा तो मंत्रिमंडल विस्तार छह से आठ महीने तक टल सकता है। गहलोत ने कांग्रेस अध्यक्ष को सौंपी अपनी रिपोर्ट में बताया कि अगर मंत्रिमंडल विस्तार में सहयोगी दल और निर्दलीय विधायकों को ठीक जगह नहीं मिली तो राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को नुकसान उठाना पड़ सकता है। गहलोत ने शीर्ष नेतृत्व को राज्यसभा में 0 से 2 सीटों तक पहुंची कांग्रेस के लिए 4 सीटों के लिए आगामी चुनाव में होने वाले नफे-नुकसान का गणित समझाया है। वहीं यह भी बताया कि प्रदेश सरकार में जैसा चल रहा है अगर वैसा ही चलता रहा तो इन 4 सीटों में से 3 पर कांग्रेस की जीत संभव है।
विज्ञापन


उच्च सदन में इस समय प्रदेश से कांग्रेस की संख्या तीन हैं लेकिन सीएम की नजर चार सीटों पर है। विधानसभा में विधायकों की संख्या के हिसाब से कांग्रेस को 4 में से 2 पर जीत लगभग तय है लेकिन ज्यादा की उम्मीद के लिए कांग्रेस को निर्दलीय और सहयोगी दलों का सहारा लेना पड़ेगा। इसके लिए गहलोत को निर्दलीय विधायकों समेत अन्य दलों को साथ लेना बेहद जरुरी होगा। राजस्थान में डेढ़ वर्ष पहले तक राज्यसभा में कांग्रेस के पास एक भी सीट नहीं थी। लेकिन गहलोत शासनकाल में पिछले साल जून में राज्यसभा में कांग्रेस शून्य से बढ़कर 2 सीटों तक पहुंच गई। अगले साल तक उम्मीद जताई जा रही है कि कांग्रेस 2 से बढ़कर 4 से 5 राज्यसभा सांसद वाली पार्टी हो जाएगी। जुलाई 2022 में भाजपा की ओर से ओमप्रकाश माथुर, केजे अल्फोंस, रामकुमार वर्मा, एचएस डूंगरपुर का कार्यकाल भी खत्म हो रहा है।  
विज्ञापन
विज्ञापन


हाईकमान जमीनी नेताओं को तवज्जो देने के पक्ष में
विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राजनीतिक नियुक्तियों और मंत्रिमंडल विस्तार के एक कॉमन फॉर्मूले को लेकर अभी कुछ पेंच फंसा हुआ है। कांग्रेस आलाकमान जहां 2023 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को वोट दिलाने और जीत दिलवाने की क्षमता रखने वाले चेहरे को आगे कर उन्हें मौका देने के मूड में नजर आ रहा है। क्योंकि राज्य के विधानसभा चुनाव के प्रदर्शन के आधार पर ही पार्टी का लोकसभा चुनाव का दारोमदार टिका है। इसलिए शीर्ष नेतृत्व जमीनी स्तर से जुड़े सभी वर्गों के नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह और राजनीतिक नियुक्तियां देना चाहता है। गहलोत और पायलट गुट दोनों हाईकमान को अपने नामों की सूची दे चुके हैं। अब हाईकमान अपने हिसाब से नामों को तय करेगा जिसके बाद राज्य में कभी भी विस्तार हो सकता है।

गहलोत जानबूझकर कर रहे है टाल मटोल
कांग्रेस की राजनीति को क़रीब से समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार राशिद किदवई बताते हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार में पहली नजर में प्रदेश नेतृत्व की इच्छाशक्ति की कमी नजर आ रही है क्योंकि राज्य कैबिनेट का जो विस्तार होता है वह पूरी तरह मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र में होता है। जिन भी राज्यों में विस्तार या फेरबदल होता है वो वहां के मुख्यमंत्री की मंशा और सलाह के आधार पर ही होता है। लेकिन राजस्थान में विचित्र स्थिति नजर आ रही है। पूरे घटनाक्रम से यही नजर आ रहा है कि सीएम अशोक गहलोत को मंत्रिमंडल विस्तार करने के लिए बाध्य किया जा रहा है।

किदवई कहते हैं कि गहलोत मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर ज्यादा उत्साहित नजर नहीं आ रहे हैं। वे सीधे तौर पर हाईकमान से कोई टकराव नहीं करना चाहते इसलिए वो अपने स्तर पर जितना हो सके उतना टालमटोल कर रहे हैं। वे विस्तार को लंबा खींचकर ये बताना चाह रहे है कि प्रदेश में मेरी ताकत पायलट से कहीं ज्यादा है। इस बहाने वो लगातार सचिन पायलट को नीचा दिखाने का प्रयास कर रहे हैं। क्योंकि सचिन बार बार कह रहे हैं कि ये विस्तार सीधे तौर पर सीएम और हाईकमान के बीच का मसला है।

मोटे तौर पर मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चल रही खींचतान के बीच अपनी ताकत को साबित करने के लिए गहलोत ने अपने मंत्रिमंडल की बैठक भी बुलाई है ताकि ये संदेश दिया जा सके कि वो अपनी टीम के साथ खुश हैं और प्रदेश में ठीक से काम कर रहे हैं।

लगातार दिल्ली में जारी है बैठकों का दौर
राजस्थान के मंत्रिमंडल को लेकर दिल्ली में लगातार बैठकों का दौर जारी है। कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रदेश प्रभारी अजय माकन लगातार राजस्थान के मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर मंथन कर रहे हैं। सीएम अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट भी दोनों नेताओं के साथ संपर्क में बने हुए हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव को देखते हुए संभावित मंत्रियों की प्रोफाइल तैयार कर रखी हैं। इन नामों पर शीर्ष नेतृत्व से मंजूरी मिलने के बाद ही फेरबदल हो जाएगा।

अमर उजाला को मिली जानकारी के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान भी मंत्रिमंडल विस्तार में एक व्यक्ति एक पद का फॉर्मूला अपनाने के मूड में नजर आ रहा है। अगर हाईकमान इसे मंजूरी देता है तो मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा, हरीश चौधरी और रघु शर्मा को अपना मंत्री पद छोड़ना पड़ेगा। तीनों नेताओं को संगठन की जिम्मेदारियों को ही निभाना होगा। तीनों नेताओं के पद छोड़ने की स्थिति में मंत्रिमंडल में 12 जगह खाली हो जाएगी। जबकि नॉन-परफॉर्मेंस के आधार पर तीन से चार मंत्रियों को हटाया भी जा सकता है। ऐसी स्थिति में 50 प्रतिशत नए चेहरों के साथ राज्य में नई टीम बनाई जा सकती है।


पायलट की भूमिका पर जल्द होगा निर्णय
राजस्थान के बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों के साथ ही पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की भूमिका को लेकर भी निर्णय होगा। हाईकमान पायलट को संगठन में बड़ी और अहम जिम्मेदारी देने पर विचार कर रहा है। पायलट कुछ दिन पहले कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलकर लंबी चर्चा कर चुके हैं। इस मुलाकात में पायलट को उनकी अगली भूमिका के बारे में संकेत दे दिए गए हैं, जल्द इसकी आधिकारिक घोषणा होगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed