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Rajasthan: एक नेता पर फोकस नहीं, कार्यकर्ताओं की संगठन तक पहुंच, पिछला चुनाव हारने के बाद BJP ने बदली रणनीति

Tue, 19 Sep 2023 06:15 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: उदित दीक्षित Updated Tue, 19 Sep 2023 06:15 PM IST
सार

विधानसभा चुनाव कें टिकट वितरण को लेकर जिला, मंडल और संभाग स्तर पर फीडबैक सिस्टम तैयार किया गया है। जिससे चलते पहली बार भाजपा में एक एक सीट पर 20 उम्मीदवार सामने आए हैं। वहीं, सूत्रों का कहना है कि भाजपा ने टिकट मांगने वाले उम्मीदवारों से आवेदन करने को कहा है। इस नए प्रयोग के चलते कई युवाओं को भी मौका मिल सकता है।

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Rajasthan BJP will contest 2023 assembly election with a new strategy
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : PTI

विस्तार

राजस्थान भाजपा एक नेता के कारण गुटबाजी से जुझती दिखाई पड़ती थी। एक नेता के वर्चस्व के कारण कभी भी प्रदेश में संगठन के रूप में पार्टी की मजबूत नहीं दिखाई देती थी। इसका नतीजा ये रहा कि 2018 के विधानसभा चुनाव में एक नेता के विरोध के चलते पूरा संगठन ही सत्ता के बाहर हो गया। सिर्फ 1 लाख कुछ हजार वोट कम होने के कारण भाजपा सरकार बचाने से चूक गई और उसे विपक्ष में बैठना पड़ा।

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कहा जाता है कि जमीनी कार्यकर्ताओं को संगठन के साथ जोड़ना और उनके साथ संगठन का सीधा संवाद करना प्रदेश भाजपा की परंपरा नहीं रही। ये बात प्रदेश के बड़े नेताओं को कभी रास नहीं आई। इससे नेता अपना कद तो बड़ा कर ले गए, लेकिन कहीं ना कहीं इससे पार्टी को 2018 के विधानसभा चुनाव में बड़ा नुकसान हुआ।  
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चुनाव में मिली हार के बाद पीएम नरेंद्र मोदी और भाजपा राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने राजस्थान संगठन महामंत्री को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी। उनके निर्देश पर काम करते हुए चन्द्रशेखर ने 6 साल में कार्यकर्ताओं और पार्टी को एक कड़ी में लाकर खड़ा कर दिया है। जिसका नतीजा ये हुआ कि वर्तमान में भाजपा संगठन के पास 52 हजार फोटो युक्त बूथ अध्यक्ष की टीम के साथ हर बूथ का पूरा मैनेजमेंट है जो सीधा पार्टी के साथ जुड़ा हुआ है। इससे साफ है कि 2023 का विधानसभा चुनाव प्रदेश का कोई नेता नहीं बल्कि, पार्टी लड़ने जा रही है।
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संगठन महामंत्री चंद्रशेखर खुद मंडल से लेकर जिलास्तर के कार्यकर्ताओं से सीधे संपर्क में रहते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं के अनुरूप एक फीडबैक सिस्टम तैयार किया है। जिससे वे कार्यकर्ताओं से संवाद कर हर बूथ की जानकारी लेते रहते हैं। कार्यकर्ताओं की इस फौज के दम पर केंद्र की मोदी सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाया जा रहा है। साथ ही जनता की समस्याओं और मांगों की जानकारी भी संगठन के पास आ रही है। 

विधानसभा चुनाव कें टिकट वितरण को लेकर जिला, मंडल और संभाग स्तर पर फीडबैक सिस्टम तैयार किया गया है। जिससे चलते पहली बार भाजपा में एक एक सीट पर 20 उम्मीदवार सामने आए हैं। वहीं, सूत्रों का कहना है कि भाजपा ने टिकट मांगने वाले उम्मीदवारों से आवेदन करने को कहा है। इस नए प्रयोग के चलते कई युवाओं को भी मौका मिल सकता है।  


परिवर्तन यात्रा किसी एक नेता पर फोकस नहीं
भाजपा की परिवर्तन संकल्प यात्रा में राजस्थान के किसी भी नेता को चेहरा नहीं बनाया गया है। सभी नेताओं को कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर काम करने के आदेश दिए गए हैं। कौन स्वागत करेगा, कहां सभा होगी, कौन नेता शामिल होंगे सभी चीजें पहले से तय हैं। जिसके चलते प्रदेश में इस यात्रा का प्रभाव भी नजर आ रहा है। हालांकि, ऐसा नहीं है कि अब गुटबाजी पूरी तरह से खत्म हो गई है, बल्कि पीएम मोदी और चन्द्रशेखर की टीम की रणनीति के कारण गुजबाजी करने का किसी को मौका नहीं मिल रहा है। और फिर जब यात्रा की सफलता की खबर आती है तो नेताओं को उसमें शामिल होना ही पड़ता है। 

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