फेसबुक पर पोस्ट करते ही सिमी कार्यकर्ता बताकर युवक को उठाया, छह साल पुराने मामले में गिरफ्तारी
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फेसबुक पर एक पोस्ट डालने के कुछ दिन बाद पुलिस ने भीलवाड़ा के एक युवक को प्रतिबंधित संगठन सिमी का सदस्य बताकर गिरफ्तार कर लिया। आश्चर्यजनक रूप से युवक की गिरफ्तारी छह साल पुराने मामले में हुई है जिसमें उस पर सिमी की एक बैठक में भाग लेने का आरोप लगाया गया है।
इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार मंगलवार को पुलिस ने भीलवाड़ा से इमरान खान नाम के युवक को गिरफ्तार किया है। राजस्थान एटीएस के एडीजी आलोक त्रिपाठी ने बताया कि हमने सिमी के एक कार्यकर्ता इमरान को 2008 के एक मामले में गिरफ्तार किया है। उन्होंने बताया कि उसे बुधवार तक पुलिस की कस्टडी में रखकर पूछताछ की जाएगी जिसके बाद गुरुवार को उसे कोर्ट में पेश कर दिया जाएगा।
जोधपुर का रहने वाला इमरान 2009 से भीलवाडा के संगम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस में काम करता है। उसने बीते 9 मई को डाली अपनी अंतिम फेसबुक पोस्ट में एक हिंदी वेबसाइट का ब्लॉग शेयर किया था।
जिसमें उसने दिल्ली पुलिस द्वारा जिहादी सेल का खुलासा करते हुए उठाए गए 13 संदिग्ध लोगों के मामले में सवाल उठाते हुए लिखा था, जब पुलिस ने बम बनाने के सामान के साथ 13 लोगों को गिरफ्तार किया था और वो सभी आतंकवादी थे, ओके। लेकिन कैसे उनमें से 10 लोगों को रिहा कर दिया गया।
आरोप है कि उसकी इस फेसबुक पोस्ट के बाद ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। हालांकि एटीएस के डीआईजी बीएल मीणा दावा करते हैं कि साल 2008 में सीमी के कुछ लोगों ने कोटा और जोधपुर में एक बैठक की थी। इमरान भी उसमें शामिल रहा था।
स्कूल प्रिंसिपल ने कहा- बहुत ईमानदार है इमरान
वहां मौजूद सिमी के कुछ सदस्य तब ही से फरार चल रहे थे उनमें से इमरान भी एक था, जो तभी से भीलवाडा में छिपा हुआ था। उन्होंने बताया कि इस काम में गुजरात की एटीएस टीम ने भी राजस्थान एटीएस की मदद की और इमरान पकड़ा गया।
वहीं गुजरात एटीएस के सूत्रों ने बताया कि खान के ठिकाने की जानकारी सिमी के संदिग्ध कार्यकर्ता मोहम्मद सुवाले उमर ने दी जिसे इस महीने की शुरूआत में पकड़ा गया। सुवाले और इमरान लगातार फरार चल रहे थे। सुवाले ने जोधपुर में फर्नीचर का काम शुरू कर दिया था जबकि इमरान भीलवाड़ा में सेटल हो गया था जहां वह एक स्कूल में काम करता था।
वहीं एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स के नेता और वकील पाकेर फारुख सवाल करते हैं कि पुलिस ने कभी उसके परिजनों से बात नहीं की और न ही उसके रिश्तेदारों से उसके संबंध में पूछताछ की गई लेकिन सीधे उस पर इतने बड़े आरोप जड़ दिए।
वहीं संगम स्कूल की प्रिंसिपल मधु नागपाल बताती हैं कि इमराम स्कूल में कम्प्यूटर अनालिस्ट का काम करता था और वो यहां 2009 से था। उसके काम में कभी कुछ संदिग्ध नहीं दिखा और वो पूरे मन से अपना काम करता था। नागपाल के अनुसार उसे 12 मई को गिरफ्तार किया गया। वो बताती हैं कि वह बहुत ईमानदार था और कभी ऐसा नहीं दिखा कि वह अपने काम के प्रति लापरवाह रहा हो।