जीत का छक्का लगाने की कोशिश में पांच दिग्गज

समीर शर्मा/अमर उजाला, जयपुर Updated Wed, 27 Nov 2013 01:16 AM IST
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राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के ऐसे बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है, जो छठी बार जीत की उम्मीद से चुनावी मैदान में भाग्य आजमा रहे हैं।
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दोनों ही पार्टियों को मिलाकर ऐसे नेताओं की संख्या पांच है। लेकिन छक्का लगाने के लिए आगे बढ़ चुके उम्मीदवारों को यह डर भी सता रहा है कि कहीं स्टम्प आउट न हो जाएं।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पांच बार विधायक रह चुके बी.डी. कल्ला पिछला चुनाव हार गए थे और अब वे फिर उसी सीट बीकानेर पश्चिम से उसी प्रत्याशी के सामने खड़े हैं।
कल्ला वर्ष 1980 में बीकानेर से कांग्रेस के प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने। इस बार कल्ला का मुकाबला भाजपा के दो बार चुनाव जीत चुके गोपाल कृष्ण से हैं।

ऐसे में इस सीट पर प्रदेश की नजरें लगी हुई हैं। रिश्ते में गोपाल कृष्ण उनके जीजा भी लगते हैं।

इसी तरह नागौर जिले की लाडनूं विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस प्रत्याशी हरजीराम बुरडक का पिछली बार कांग्रेस ने टिकट काट दिया था और वे निर्दलीय के रूप में जीतकर अपनी प्रतिष्ठा बचाने में कामयाब हो गए थे।

इस बार उन्हें कांग्रेस ने टिकट दिया है। उन्होंने सबसे पहले वर्ष 1967 में स्वतंत्र पार्टी से लाडनूं से पहला चुनाव जीता था। बुरडक को इस चुनाव में भाजपा के तीसरी बार विधायक बनने के लिए मैदान में उतरे मनोहर सिंह से कड़ी चुनौती मिल रही है।

बाडमेर जिले के गुढामालानी से राजस्व मंत्री एवं कांग्रेस उम्मीदवार हेमाराम चौधरी को चुनाव लडऩे के लिए बड़ी मुश्किल से कांग्रेस ने मनाया।

उन्होंने वर्ष 1980 में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में पहला चुनाव जीता। इस बार चौधरी का सामना भाजपा के नए चेहरे लादूराम विश्नोई से हैं। इस सीट पर भी रोचक मुकाबला होनेवाला है।

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पिलानी (एससी) से छठी बार विधायक बनने के लिए चुनाव मैदान में उतरे सुंदर लाल ने वर्ष 1972 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में सूरजगढ से चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने।

इस बार वह अपना क्षेत्र बदलकर पिलानी से चुनाव लड़ रहे हैं जहां उनका मुकाबला नए चेहरे एवं कांग्रेस प्रत्याशी मदन लाल से हैं।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं भाजपा प्रत्याशी गुलाब चंद कटारिया उदयपुर शहर से चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि वे कद्दावर नेता हैं और इस क्षेत्र में उनकी जबरदस्त पकड़ है।

इस बार उनका मुकाबला युवा एवं नया चेहरा कांग्रेस प्रत्याशी दिनेश श्रीमाली से होगा। कटारिया ने आपातकाल के बाद वर्ष 1977 में हुए विधानसभा चुनाव में जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर अपना पहला चुनाव जीते थे।

हालांकि पांचवें प्रत्याशी चुरू विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के मुख्य सचेतक एवं पार्टी प्रत्याशी राजेन्द्र राठौड़, बसपा प्रत्याशी की मौत से चुनाव स्थगित होने से अब फि ्र से नामांकन भरेंगे, जहां 13 दिसम्बर को चुनाव होगा।

भाजपा ने उनकी पुरानी सीट तारानगर से बदलकर चूरू से टिकट दिया और यहां उनका मुकाबला कांग्रेस के प्रत्याशी हाजी मकबूल मंडेलिया से होगा। यहां भी कड़ा मुकाबला है। राठौड़ ने वर्ष 1990 में पहला चुनाव जाता था।

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