राजस्थान विधानसभा चुनाव : सीएम पद के उम्मीदवारों को पहली बार मिल रही है खासी चुनौती
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राजस्थान विधानसभा चुनाव में पहली बार मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवारों को खासी चुनौती मिलती दिख रही है। आमतौर पर ऐसे मजबूत प्रत्याशियों से सामने विरोधी पार्टियां कमजोर उम्मीदवारों को खड़ा कर औपचारिकता निभाती रही हैं, लेकिन इस बार दोनों ही प्रमुख दलों ने विरोधी पार्टी से मुख्यमंत्री पद के दावेदारों के सामने ऐसे उम्मीदवार खड़े किए हैं जो राजनीति में अच्छा-खासा वजूद रखते हैं।
उल्लेखनीय है कि भाजपा ने मौजूदा मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को ही फिर से सीएम के चेहरे के रूप में पेश किया है। इधर, कांग्रेस ने किसी को भी सीएम के रूप में पेश नहीं किया है, लेकिन दो मजबूत दावेदार हैं। एक, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव दो बार मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत और दूसरे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट।
मुकाबला नंबर एक : वसुंधरा राजे बनाम मानवेंद्र सिंह
झालावाड़ जिले की झालरापाटन सीट पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सामने पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह ने कांग्रेस के टिकट पर चुनौती पेश की है। मानवेंद्र सिंह भाजपा के नाराज होकर कांग्रेस में शामिल हुए हैं और उनका प्रभाव पश्चिमी राजस्थान के जोधपुर सम्भाग में है, खासतौर पर जैसलमेर व बाड़मेर जिलों में। लेकिन कांग्रेस ने उन्हों झालरापाटन सीट से उम्मीदवार बनाकर मुकाबला रोचक कर दिया है।
वसुंधरा राजे, भाजपा
इस सीट पर उनकी मजबूती इस बात से लगाई जा सकती है कि राजे यहां यहां से तीन बार विधायक रही हैं और चौथी बार मैदान में हैं। पिछला चुनाव 60896 मतों के बड़े अंतर से जीता था। इससे पूर्व झालावाड़ से पांच बार सांसद रहीं हैं।
मानवेंद्र सिंह, कांग्रेस
झालरापाटन मानवेंद्र सिंह के लिए नया क्षेत्र है। इस कारण इस बार उन पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में वे शिव विधानसभा सीट से भाजपा की टिकट पर जीते थे। उन्होंने कांग्रेस के नेता अमीन खान को 31425 वोटों से हराया था। वे बाड़मेर-जैसलमेर से एक बार सांसद रह चुके हैं।
मुकाबला नंबर दो : अशोक गहलोत बनाम शंभूसिंह खेतासर
अशोक गहलोत, कांग्रेस
जोधपुर की सरदारपुरा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार अशोक गहलोत की स्थिति काफी मजबूत है। लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा की आंधी में पिछले चुनावों के मुकाबले उन्हें सबसे कम वोटों से जीत हासिल की थी। गहलोत पांचवी बार मैदान में होंगे और वहां उनकी लोकप्रियता कम नहीं आंकी जा सकती। मोदी लहर के बावजूद वे 18478 वोटों से जीते थे।
शुंभूसिंह खेतासर, भाजपा
अशोक गहलोत को पिछले विधानसभा चुनाव की तरह ही इस सीट पर फिर से भाजपा के शंभू सिंह खेतासर चुनौती देंगे। खेतासार पिछले चुनाव में अशोक गहलोत से पराजित हो गए थे, लेकिन उन्होंने उम्मीद से परे अच्छे खासे मत हासिल किए थे और गहलोत को भी सोचने को मजबूर कर दिया था। खेतासर ने गत चुनाव में 59 हजार से अधिक वोट हासिल किए थे।
मकाबला नंबर तीन : सचिन पायलट बनाम यूनुस खान
सचिन पायलट, कांग्रेस
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं। ये सीट भी उनके लिए नई है। इससे पूर्व वे दौसा एवं अजमेर से सांसद रहे। इस सीट पर भाजपा का कब्जा है और पिछले मुकाबले में कांग्रेस उम्मीदवार जकिया अपनी जमानत भी नहीं बचा पाई थी। मुस्लिम मतदाताओं की संख्या अधिक होने के कारण कांग्रेस इसे पायलट के लिए सुरक्षित सीट मान रही है।
यूनुस खान, भाजपा
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के सबसे चहेते मंत्री युनूस खान इस सीट पर सचिन पायलट को चुनौती देंगे। खान के लिए भी ये सीट नई है। उनका प्रभाव नागौर व डीडवाना सीटों पर है। भाजपा ने पहले इस सीट से वर्तमान विधायक अजीत सिंह मेहता को ही उम्मीदवार बनाया था, लेकिन कांग्रेस ने जब पायलट को इस सीट से उतारा, तो भाजपा ने अजीत को बदलकर अंतिम दिन यहां से यूनुस खान को प्रत्याशी बनाया। मुस्लिम सीट होने के कारण भाजपा ने अपने एक मात्र मुस्लिम प्रत्याशी को पायलट के सामने खड़ा कर दिया है।