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जयपुर: चुनाव से पहले बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा, इतने नकली वोटर मिले कि बन जाए नया विधानसभा क्षेत्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Updated Sat, 15 Sep 2018 01:13 PM IST
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राजस्थान में दो महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज्य निर्वाचन विभाग के सर्वे में बहुत चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यह जानकारी सामने आई है कि जयपुर जिले में हर 10 में से एक मतदाता फर्जी है।
राजनीतिक दलों की शिकायतों के बाद राज्य निर्वाचन विभाग की ओर से कराए गए डेमो ग्राफिकल सिमिलर एंट्री (डीसीई) सर्वे में जयपुर में करीब एक लाख 12 हजार फर्जी मतदाता मिले हैं। जिले के 19 विधानसभा क्षेत्रों में फर्जी वोटरों की यह संख्या इतनी ज्यादा है कि एक नया विधानसभा क्षेत्र बनाया जा सकता है।
निर्वाचन विभाग ने जिले में 10 लाख संदिग्ध वोटरों की जांच की जिसमें इन फर्जी मतदाताओं का खुलासा हुआ। डीसीई के सर्वे में हर विधानसभा क्षेत्र में तीन हजार से लेकर 13 हजार तक दोहरे नाम वाले मतदाता सामने आए हैं।
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एक शख्स दो विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची में शामिल
दो महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले जयपुर जिले में करीब एक लाख 12 हजार फर्जी और संदिग्ध मतदाता सामने आने के बाद प्रशासन की नींद उड़ गई है। सबसे ज्यादा फर्जी मतदाता सांगानेर, विद्याधर नगर और किशनपोल विधानसभा क्षेत्र में मिले हैं।
ऐसे पकड़े गए फर्जी वोटर
चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर द्वारा की जा रही ऑटो स्निकैग से यह खुलासा हुआ है। इन्हें मृतक, दोहरे नाम और पलायन कर चुके लोग के साथ मल्टीपल एंट्री के पैरामीटर पर फर्जी पाया गया। अब इनके नामों को मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया चालू हो चुकी है।
मतदाता सूचियों में सुधार कर नई मतदाता सूचियां तैयार करने का काम युद्धस्तर पर जारी है। जिला प्रशासन ने आगामी चुनाव से पहले फर्जी मतदाताओं को सूची से बाहर करने का दावा किया है, ताकि मतदान के दौरान गड़बड़ी की आशंका नहीं रहे।
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राजनीतिक दलों की शिकायतों के बाद राज्य निर्वाचन विभाग की ओर से कराए गए डेमो ग्राफिकल सिमिलर एंट्री (डीसीई) सर्वे में जयपुर में करीब एक लाख 12 हजार फर्जी मतदाता मिले हैं। जिले के 19 विधानसभा क्षेत्रों में फर्जी वोटरों की यह संख्या इतनी ज्यादा है कि एक नया विधानसभा क्षेत्र बनाया जा सकता है।
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निर्वाचन विभाग ने जिले में 10 लाख संदिग्ध वोटरों की जांच की जिसमें इन फर्जी मतदाताओं का खुलासा हुआ। डीसीई के सर्वे में हर विधानसभा क्षेत्र में तीन हजार से लेकर 13 हजार तक दोहरे नाम वाले मतदाता सामने आए हैं।
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एक शख्स दो विधानसभा क्षेत्रों की मतदाता सूची में शामिल
दो महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले जयपुर जिले में करीब एक लाख 12 हजार फर्जी और संदिग्ध मतदाता सामने आने के बाद प्रशासन की नींद उड़ गई है। सबसे ज्यादा फर्जी मतदाता सांगानेर, विद्याधर नगर और किशनपोल विधानसभा क्षेत्र में मिले हैं।
ऐसे पकड़े गए फर्जी वोटर
चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर द्वारा की जा रही ऑटो स्निकैग से यह खुलासा हुआ है। इन्हें मृतक, दोहरे नाम और पलायन कर चुके लोग के साथ मल्टीपल एंट्री के पैरामीटर पर फर्जी पाया गया। अब इनके नामों को मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया चालू हो चुकी है।
मतदाता सूचियों में सुधार कर नई मतदाता सूचियां तैयार करने का काम युद्धस्तर पर जारी है। जिला प्रशासन ने आगामी चुनाव से पहले फर्जी मतदाताओं को सूची से बाहर करने का दावा किया है, ताकि मतदान के दौरान गड़बड़ी की आशंका नहीं रहे।
अब 80 वर्ष से बड़े लोगों की जांच होगी
मतदाता सूची
- फोटो : अमर उजाला
साल में दो बार होती है जांच, फिर भी फर्जीवाड़ा
साल में दो बार मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन को लेकर जांच होती है। फिर भी सूचियों में फर्जी नाम रह जाते हैं। हालांकि अब पहले के मुकाबले फर्जी नाम होने की शिकायतें आम हैं।
अधिकारियों की दलील
बूथ लेवल अधिकारियों का कहना है कि मतदाता सूची का काम करने वाले वेंडरों के ऑपरेटर मृतकों, दोहरे नाम और पलायन कर चुके लोगों के नाम नहीं हटाते। डेथ सर्टिफिकेट नहीं मिलने से ऐसा होता है।
अब 80 वर्ष से बड़े लोगों की जांच होगी
अधिकारियों का कहना है कि बीएलओ मौके पर जाकर मिलते-जुलते चेहरों वाले और 80 साल से ज्यादा उम्र के मतदाताओं की जांच करेंगे। बीएलओ के अलावा उपखंड अधिकारी, अतिरिक्त जिला कलेक्टर स्तर के अधिकारी भी औचक जांच कर रहे हैं।
साल में दो बार मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन को लेकर जांच होती है। फिर भी सूचियों में फर्जी नाम रह जाते हैं। हालांकि अब पहले के मुकाबले फर्जी नाम होने की शिकायतें आम हैं।
अधिकारियों की दलील
बूथ लेवल अधिकारियों का कहना है कि मतदाता सूची का काम करने वाले वेंडरों के ऑपरेटर मृतकों, दोहरे नाम और पलायन कर चुके लोगों के नाम नहीं हटाते। डेथ सर्टिफिकेट नहीं मिलने से ऐसा होता है।
अब 80 वर्ष से बड़े लोगों की जांच होगी
अधिकारियों का कहना है कि बीएलओ मौके पर जाकर मिलते-जुलते चेहरों वाले और 80 साल से ज्यादा उम्र के मतदाताओं की जांच करेंगे। बीएलओ के अलावा उपखंड अधिकारी, अतिरिक्त जिला कलेक्टर स्तर के अधिकारी भी औचक जांच कर रहे हैं।