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राजस्थान: चुनाव की गहमागहमी के बीच कीजिए रानी जी की बावड़ी के दीदार
चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 18 Nov 2018 05:49 PM IST
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rani ji ki baori
- फोटो : Amar Ujala
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सर्द मौसम के बीच राजस्थान में सियासी पारा लगातार बढ़ता जा रहा है। राजे-रजवाड़ों की धरती पर राजनीति हर पल नए करवट बदल रही है। इन विधानसभा चुनावों को सत्ता का सेमीफाइनल कहा जा रहा है। चुनावी गहमागहमी के बीच अमर उजाला डॉट कॉम का चुनावी रथ राजस्थान पहुंच चुका है। जमीनी हकीकत जाने के लिए अमर उजाला की टीम प्रदेश का दौरा कर रही है। चुनावी गहमागहमी के बीच हमारी टीम एशिया की प्रमुख बावड़ियों में से एक रानी जी की बावड़ी पहुंची। देखिए कुछ चुनिंदा तस्वीरें।
rani ji ki baori
- फोटो : Amar Ujala
महत्वपूर्ण सामाजिक ढांचों में से एक है रानी जी की बावड़ी
रानी जी की बावड़ी ( सीढ़ीदार कुंआ ) का निर्माण 1699 में रानी नाथावती द्वारा करवाया गया था जो राव राजा अनिरुद्ध सिंह की की सबसे छोटी रानी थीं। वाओरीस यानि बावड़ी ने भारत में मध्ययुगीन काल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह सीढ़ीदार कुंआ 165 फीट गहरा है जो राजपूतों के शासनकाल में एक उल्लेखनीय स्थापत्य शैली को दर्शाता है।
रानी जी की बावड़ी ( सीढ़ीदार कुंआ ) का निर्माण 1699 में रानी नाथावती द्वारा करवाया गया था जो राव राजा अनिरुद्ध सिंह की की सबसे छोटी रानी थीं। वाओरीस यानि बावड़ी ने भारत में मध्ययुगीन काल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह सीढ़ीदार कुंआ 165 फीट गहरा है जो राजपूतों के शासनकाल में एक उल्लेखनीय स्थापत्य शैली को दर्शाता है।
rani ji ki baori
- फोटो : Amar Ujala
प्रवेश द्वार पर हाथी करते हैं स्वागत
इस कुंए का प्रवेश द्वार काफी संकीर्ण है और इसमें लगे हुए स्तंभों पर पत्थर के हाथी भी ऊपर बने हुए हैं। सीढ़ी से नीचे जाने पर कुंआ काफी बड़ा और व्यापक है। पूरा कुंआ नक्काशी से सजाया गया है। इस बावड़ी की गहराई लगभग 46 मीटर है।
इस कुंए का प्रवेश द्वार काफी संकीर्ण है और इसमें लगे हुए स्तंभों पर पत्थर के हाथी भी ऊपर बने हुए हैं। सीढ़ी से नीचे जाने पर कुंआ काफी बड़ा और व्यापक है। पूरा कुंआ नक्काशी से सजाया गया है। इस बावड़ी की गहराई लगभग 46 मीटर है।
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- फोटो : Amar Ujala
प्रदेश में सभी 200 सीटों पर एक साथ 7 दिसंबर को चुनाव होना है। सत्ताधारी भाजपा का लक्ष्य हर पांच साल में सत्ताधारी पार्टी बदल जाने के तिलिस्म को तोड़ने का है जबकि कांग्रेस सरकार के प्रति जनता के गुस्से को भुनाकर सत्ता में वापसी करना चाहती है। चुनाव के नतीजे 11 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे।