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Rajasthan: बसंत पंचमी पर आराध्य देव श्री गोविंददेवजी का प्रागट्योत्सव, पीले वस्त्रों में सजाई भगवान की झांकी

Thu, 26 Jan 2023 03:37 PM IST
उदित दीक्षित न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: उदित दीक्षित Updated Thu, 26 Jan 2023 03:37 PM IST
सार

बसंत पंचमी पर जयपुर के आराध्य देव श्री गोविंद देव जी का प्राकट्य उत्सव भी मनाया जा रहा है। राजा रानी और ठाकुर जी को सुंदर पीली पोशाक धारण करवाकर केसरिया खीर का भोग लगाया गया है। सुबह से ही मंदिर प्रांगण में भजनों और धार्मिक कार्यक्रमों का दौर जारी है।

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Pragatyotsav of adorable god Shri Govinddevji on Basant Panchami tableau decorated in yellow clothes Jaipur
पीले वस्त्रों से किया आराध्य देव का श्रृंगार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जयपुर शहर के आराध्य देव श्री गोविंद देव जी मंदिर में बसंत पंचमी के पावन अवसर पर प्रागट्य उत्सव मनाया जा रहा है। बसंत पंचमी पर ठाकुर जी और राधा रानी को पीले वस्त्र धारण करवाए गए और अभिषेक किया गया। सुबह 4 से 4:15 बजे तक मंगला आरती हुई। मंदिर में ठाकुरजी के प्रागट्योत्सव को पारंपारिक रूप से धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाया जा रहा है। 

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मंदिर महंत के सान्निध्य में सुबह 5 बजे तक राधारानी-ठाकुरजी का अभिषेक किया गया। इस अवसर पर तिथि पूजन भी किया गया। धूप झांकी खुलने से पहले अधिवास पूजन हुआ। इसके बाद धूप आरती हुई। फिर श्रृंगार झांकी के बाद ज्ञान की देवी मां सरस्वती का पूजन पश्चिमी परिक्रमा में ठाकुरजी के चित्रपट के समक्ष किया गया। इसके बाद राजभोग आरती रखी गई। 
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पीली मनोहरी पोशाक और केसर केसर मिश्रित खीर का भोग
बसंत पंचमी होने की वजह से राधारानी और ठाकुरजी को पीले रंग की मनोहारी पोशाक धारण करवाई गई है। श्रृंगार में भी गेंदा और अन्य पीले रंग के पुष्पों का उपयोग किया गया है। केसर मिश्रित खीर से ठाकुरजी को भोग अर्पित किया गया।  शाम को ग्वाल झांकी से लेकर शयन झांकी होंगी।
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बसंत पंचमी को क्यों मनाते हैं प्रागट्योत्सव ?
"श्रीगोविंद प्रगटे होइलो रूप द्वारे।" इसका अर्थ है रूप गोस्वामी ने ठाकुर श्रीगोविंद देवजी को प्रगट किया है। पहले वृदांवन में और बाद में जयपुर में बसंत पंचमी को ही ठाकुरजी को प्रतिष्ठित किया गया। तब से माघ शुक्ल पंचमी को ठाकुरजी का पाटोत्सव मनाया जाता रहा है। इस दिन ठाकुरजी का पट्टाभिषेक अनुष्ठान होता है।

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