{"_id":"64b63da061db1a423e064413","slug":"patient-liver-and-kidney-failed-jaipur-doctors-saved-young-man-life-by-liver-transplanting-2023-07-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rajasthan: लिवर के साथ किडनियां भी फेल, 7 दिन तक लगातार डायलिसिस फिर ट्रांसप्लांट कर बचाई युवक की जान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rajasthan: लिवर के साथ किडनियां भी फेल, 7 दिन तक लगातार डायलिसिस फिर ट्रांसप्लांट कर बचाई युवक की जान
Tue, 18 Jul 2023 12:52 PM IST
उदित दीक्षित
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: उदित दीक्षित
Updated Tue, 18 Jul 2023 12:52 PM IST
सार
राजस्थान में पहली बार सीआआरटी पर रहते हुए मरीज का लिवर ट्रांसप्लांट लिवर किया गया। लिवर के साथ ही मरीज की किडनियां भी फेल हो गई थीं। डॉक्टरों की सफल सर्जरी से युवक को नया जीवन मिला है।
विज्ञापन
अनुज को उसकी पत्नी ने दिया लिवर।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
राजस्थान में लिवर और किडनी फेलियर से जूझ रहे एक मरीज को जयपुर के डॉक्टर्स ने नया जीवन दे दिया। शहर के संतोकबा दुर्लभजी हॉस्पिटल के डॉक्टर्स ने लगातार डायलिसिस पर चल रहे मरीज का इमरजेंसी लिवर ट्रांसप्लांट करने में सफल रहे हैं।
विज्ञापन
संतोकबा दुर्लभजी ट्रस्ट के सचिव योगेंद्र दुर्लभजी ने बताया कि मरीज को एक्यूट लिवर फेलियर और एक्यूट किडनी फेलियर था। एक समय उसके शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा को बनाए रखने के लिए 100 प्रतिशत वेंटिलेटर सपोर्ट देने की आवश्यकता पड़ रही थी। विशेषज्ञों ने उसे देखा तो उसके बचने की संभावना सिर्फ एक प्रतिशत थी। जांच करने के बाद हमने सलाह दी कि मरीज को बचाने के लिए लिवर ट्रांसप्लांट करना पड़ेगा। उसकी किडनी भी काम नहीं कर रही थी, ऐसे में उसके खून को कृत्रिम रूप से शुद्ध करने के लिए लगातार उसका डायलिसिस किया जा रहा था। इसे सीआरआरटी यानी कंटीनस रीनल रिप्लेसमेंट थैरेपी कहते हैं।
विज्ञापन
डॉक्टरों ने बताया कि इस तरह का लिवर ट्रांसप्लांट राजस्थान में पहली बार हुआ है और ये बेहद जटिल सर्जरी थी। मरीज अनुज की पत्नी पूनम ने उसे अपना आधा लिवर दिया। 12 घंटे चली सर्जरी के बाद मरीज का लिवर ट्रांसप्लांट सफल रहा। अब अनुज की किडनी ने भी काम करना शुरू कर दिया। सर्जरी के बाद मरीज को 10 दिनों के लिए आईसीयू में निगरानी के लिए रखा गया इसके बाद उन्हें सामान्य वार्ड में 10 दिन रहने के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया।
विज्ञापन
इस जटिल सर्जरी को सफल बनाने में डॉ. राजेश भोजवानी, डॉ. बोरा, डॉ. सुभाष मिश्रा, डॉ. श्याम, डॉ. राजकुमार गुप्ता, डॉ. बीके मालपानी, डॉ. दिनेश अग्रवाल, डॉ. वीके पाराशर, डॉ. दिलीप सिंह राणा, डॉ. सांवरमल, डॉ. आशीष पारीक, डॉ. पीयूष माथुर और डॉ. चंद्रशेखर का विशेष सहयोग रहा।