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राजस्थान: सरपंच नहीं बनीं चिड़ी देवी, फिर भी गांव ने लुटाया प्यार; थाल में दिए 25 लाख

Mon, 26 Oct 2026 02:23 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Mon, 26 Oct 2026 02:23 PM IST
सार

राजस्थान के नागौर जिले की मूंडवा पंचायत समिति की भदौरा ग्राम पंचायत में सरपंच पद का चुनाव हारने के बावजूद चिड़ी देवी को ग्रामीणों ने अनोखा सम्मान दिया। मोड़ी गांव निवासी चिड़ी देवी को चुनाव में गिरिजा सांदू से 162 मतों से हार मिली।

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nagaur chidi devi loses sarpanch election villagers honor with 25 lakh rupees
ग्रामीणों ने थाल में सजाकर दे दिए 25 लाख रुपये - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नागौर में पंचायत चुनाव का एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां सरपंच पद का चुनाव हारने के बावजूद प्रत्याशी को ग्रामीणों से ऐसा सम्मान मिला, जिसकी चर्चा हो रही है। मूंडवा पंचायत समिति की भदौरा ग्राम पंचायत में चिड़ी देवी को चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, लेकिन ग्रामीणों ने उनके प्रति अपना समर्थन और विश्वास जताने के लिए 25 लाख रुपये की सम्मान राशि जुटाई। ग्रामीण ढोल-नगाड़ों के साथ उनके घर पहुंचे, फूलमाला पहनाकर और साफा बांधकर उनका अभिनंदन किया। इसके बाद रुपये से भरा थाल उनके परिवार को भेंट किया। ग्रामीणों के इस सम्मान से चिड़ी देवी और उनके परिवार की निराशा खुशी और गर्व में बदल गई।

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कड़े मुकाबले में 162 मतों से हारीं चिड़ी देवी

मोड़ी गांव निवासी 45 वर्षीय चिड़ी देवी एक साधारण किसान परिवार से आती हैं। उनके पति हेमाराम राव खेती-किसानी करते हैं। बताया गया कि हेमाराम ने करीब दो वर्ष पहले गांव की गोशाला को एक ट्रैक्टर दान किया था। इसके अलावा उन्होंने गांव में एक प्याऊ बनवाई और बोरवेल खुदवाने की घोषणा भी की थी। उनके सामाजिक कार्यों से प्रभावित होकर ग्रामीणों ने चिड़ी देवी को सरपंच पद का प्रत्याशी बनाने का निर्णय लिया। पंचायत की सीट महिला के लिए आरक्षित होने के बाद उन्हें चुनाव मैदान में उतारा गया। भदौरा ग्राम पंचायत के इस चुनाव में चिड़ी देवी का मुकाबला सेवानिवृत्त पुलिस निरीक्षक माधोसिंह की पुत्रवधू गिरिजा सांदू से हुआ। चुनाव परिणाम में गिरिजा सांदू को 1317 मत मिले, जबकि चिड़ी देवी को 1155 मत प्राप्त हुए। इस तरह चिड़ी देवी 162 मतों के अंतर से चुनाव हार गईं। मुकाबला कड़ा रहा, लेकिन जीत गिरिजा सांदू के खाते में गई।

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हार के बाद ग्रामीणों ने जुटाई 25 लाख रुपये की सम्मान राशि

चुनाव में हार के बाद ग्रामीणों ने चिड़ी देवी और उनके परिवार का मनोबल बढ़ाने का फैसला किया। गांव में सभा आयोजित कर 34 कौम के लोगों ने आपसी सहयोग से आर्थिक सहायता जुटाने का संकल्प लिया। ग्रामीणों का उद्देश्य परिवार के प्रति सम्मान जताना और चुनाव के दौरान हुए खर्च के बोझ को कम करने में मदद करना था। इसके बाद देखते ही देखते ग्रामीणों ने 25 लाख रुपये एकत्र कर लिए। इस राशि को थाल में सजाकर चिड़ी देवी के परिवार को भेंट करने की तैयारी की गई। ग्रामीणों के इस कदम ने चुनावी हार के बाद भी उनके प्रति लोगों के लगाव और समर्थन को सामने रखा।

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ढोल-नगाड़ों के साथ घर पहुंचे ग्रामीण, फूलमाला और साफा पहनाकर किया सम्मान

सम्मान राशि जुटाने के बाद ग्रामीण विभिन्न वाहनों में सवार होकर ढोल-नगाड़ों के साथ चिड़ी देवी के घर पहुंचे। वहां उन्होंने चिड़ी देवी को फूलमाला पहनाई और साफा बांधकर उनका अभिनंदन किया। इसके बाद 25 लाख रुपये से भरा थाल उनके पति हेमाराम राव को सौंप दिया। ग्रामीणों के इस अनोखे सम्मान से परिवार भावुक हो गया। चुनाव हारने के बाद जहां परिवार को निराशा थी, वहीं ग्रामीणों के स्नेह और समर्थन ने माहौल बदल दिया। लोगों ने अपने इस कदम से संदेश दिया कि उनके लिए चुनाव में जीत-हार से अधिक महत्व प्रत्याशी के सामाजिक योगदान और गांव के प्रति उसके परिवार के जुड़ाव का है।

हेमाराम बोले- पद से बढ़कर गांव का विश्वास और अपनापन

ग्रामीणों से मिले सम्मान पर हेमाराम राव ने आभार जताया। उन्होंने कहा कि सरपंच नहीं बन पाने की निराशा जरूर थी, लेकिन गांव के लोगों के इस आत्मीय व्यवहार ने उनकी मायूसी को गर्व और प्रसन्नता में बदल दिया। उनके अनुसार, पद से बढ़कर पूरे गांव का विश्वास और अपनापन ही उनकी असली पूंजी है।


चिड़ी देवी को मिली यह सम्मान राशि ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग और उनके परिवार के प्रति समर्थन का प्रतीक बनी। चुनाव परिणाम में हार के बावजूद ग्रामीणों ने जिस तरह उनका अभिनंदन किया, उससे गांव में इस अनोखे सम्मान की चर्चा हो रही है।

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