Rajasthan: बीकानेर में मोबाइल ब्लास्ट से जली झोंपडी, तीन महीने की बच्ची समेत तीन झुलसे, जेवर-नकदी भी जले
बीकानेर जिले के लूणकरणसर में मोबाइल फोन में चार्जिंग के दौरान ब्लास्ट हो गया। बैटरी फटने से तेज धमाका हुआ और झोपड़ी में आग लग गई। शनिवार को हादसे के दौरान झोंपडी में सो रही 3 महीने की बच्ची, एक बच्चा और बचाने आया युवक झुलस गए।
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विस्तार
बीकामेर के लूणकरनसर की हंसेरा ग्राम पंचायत की मेघवाल ढाणी में यह हादसा शनिवार सुबह करीब 10.30 से 11 बजे के बीच हुआ। जब एक झोंपडी नुमा घर में चार्जिंग पर लगे पुराने मोबाइल फोन की बैटरी तेज धमाके के साथ फट गई और आग लग गई। हादसे के वक्त घर के अंदर 2 बच्चे सो रहे थे। झुलसी 3 महीने की बच्ची की हालत गंभीर बताई जा रही है, जो 30 से 35 प्रतिशत तक झुलस गई है। बच्ची का चेहरा भी झुलस गया। एक बच्चे के शोर मचाने पर दोनों बच्चों को बचाने आये अन्य युवक के भी दोनों हाथ जल गए। झुलसे तीनों मरीजों को अस्पताल में में भर्ती कराया गया है। हादसे के बाद मेघवाल की ढाणी में मौके पर पहुंचे पटवारी जितेंद्र महात्मा ने भी बताया कि मोबाइल फोन की बैटरी फटने से आग लगने से यह हादसा हुआ।
जेवर और नकदी भी जल गए
अग्निकांड में काफी सामान जलकर राख हो गया। महिलाओं के सोने-चांदी के जेवर भी जल गए। जिनकी कीमत 1 लाख रुपए तक बताई जा रही है। 30 हजार रुपए नकद भी जलने की बात भी पीड़ित परिवार ने पटवारी को बताई है। इसके अलावा झोपड़े में यूरिया का कट्टा, पशुओं का खल और गेहूं भी रखा हुआ था, वह भी जल गया।
खेत में फसल काटने गए थे बच्चों के परिजन
इलाके के हंसेरा निवासी सोहन राम मेघवाल के दो जमाई मुकेश और रमेश फसल कटाई के लिए मदद करने आए हुए थे। परिवार सहित दोनों जमाई मुकेश और रमेश ढाणी से कुछ दूर खेत में जाकर फसल काट रहे थे। उनकी बहन सुलोचना भी साथ आई थी। ढाणी के पास बने झोपड़ेनुमा घर में मोबाइल चार्ज पर लगा था। बहन सुलोचना ढाणी में खाना पका रही थी। तभी झोपड़े से 4 चार का बच्चा दौड़ते हुए शोर मचाते हुए निकला और सुलोचना को बताया कि झोपड़े के अंदर आग लग गई है।
वीवो कंपनी के स्मार्टफोन में लगी आग
घटना में झुलसे युवक मुकेश के भाई रमेश ने बताया कि वीवो कंपनी के एंड्रॉयड स्मार्टफोन की बैट्री चार्जिंग के दौरान फट गई, जिसकी वजह से झोपड़ी में आग लग गई। झोपड़ी में 3 महीने की बच्ची तपस्या पुत्री मुकेश और मानव (2 साल) पुत्र मघाराम सो रहे थे। झोपड़ा घास-फूंस की कीपों से बना हुआ था। सुलोचना के चिल्लाने पर रमेश और मुकेश झोपड़े की ओर भागे,तो आग भड़की हुई थी। झोपड़ी में धुआं हो गया था। मुकेश ने अपनी जान पर खेलते हुए दोनों बच्चों को बाहर निकाला, लेकिन वह झुलस गया। जिससे उसके मुंह, कमर, पीठ, दोनों पैर और एक हाथ झुलस गए। तीन महीने की तपस्या 30 से 35 प्रतिशत तक झुलस गई है। जबकि बच्चा 2 साल का मानव भी हल्का झुलसा है।इस हादसे के बाद ढाणी में बड़ी संख्या में ग्रामीण पहुंचे, जिन्होंने तीनों झुलसे मरीजों को बीकानेर के पीबीएम अस्पताल पहुंचाया जहां उपचार जारी है।