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राजस्थान में अब मीसा बंदियों को मिलेगी पेंशन

Sat, 04 Jan 2014 10:58 AM IST
Updated Sat, 04 Jan 2014 10:58 AM IST
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MISA detainees in Rajasthan to get pension

राजस्थान में विभाग बंटवारे के बाद हुई भाजपा सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में कई फैसले लिए गए, लेकिन सबसे चर्चित फैसला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पृष्ठभूमि के नेताओं को खुश करने वाला रहा।

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यह फैसला था आपातकाल के दौरान जेलों में बंद रहे सभी नेताओं या उनकी विधवाओं को पेंशन देने का। इस फैसले का सबसे ज्यादा लाभ भाजपा के नेताओं को ही होने वाला है।
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अब मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ और उत्तरप्रदेश की तरह राजस्थान के उन सभी नेताओं या उनकी विधवाओं को हर महीने पेंशन मिलेगी, जो 26 जून 1975 को आपातकाल लगने से लेकर 1977 के दौरान मेंटीनेंस ऑफ इंटर्नल सिक्योरिटी एक्ट (मीसा) और डिफेंस ऑफ इंडिया रूल्स (डीआईआर) के तहत जेलों में बंद रहे हैं। ऐसे नेताओं में ज्यादातर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनता पार्टी से जुडे रहे हैं।
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मंत्री भी हकदार
कुछ वामपंथी नेता भी मीसा और डीआईआर के तहत जेलों में बंद रहे थे। राजस्थान सरकार के पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्री गुलाबचंद कटारिया तथा पेट्रोलियम मंत्री कैलाश मेघवाल जैसे कुछ मंत्री भी अब नए फैसले के तहत पेंशन पाने के हकदार होंगे। इनके अलावा पेंशन पाने वालों की लंबी फेहरिस्त है।

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद चिकित्सा और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड ने बताया कि हमारी पूर्व सरकार ने मीसा बंदियों की पेंशन योजना लागू की थी, जिसे पिछली कांग्रेस सरकार ने बंद कर दिया था। राज्य मंत्रिमंडल ने योजना बहाली का निर्णय लिया है। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि योजना के तहत कितनी पेंशन दी जाएगी।

पंचायती राज मंत्री गुलाबचंद कटारिया कहते हैं, योजना मध्यप्रदेश के पैटर्न पर लागू हो रही है। इस प्रक्रिया को जल्द तय कर लिया जाएगा। लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगा कि यह पेंशन पिछली बार की घोषणा के दिन से लागू की जाएगी या नए सिरे से।

वसुंधरा राजे ने ली मंत्रियों की फेसबुक क्लास

सेनानी का दर्जा
राज्य सरकार के कुछ अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि मध्यप्रदेश की तरह योजना लागू करने की संभावना है, जहां अभी 16000 रुपए की पेंशन मिल रही है। पेंशनधारियों को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा भी हासिल है।

राज्य में पिछली भाजपा सरकार के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री के नाते वसुंधरा राजे ने मार्च 2008 को मीसा बंदियों को छह हजार रुपए की पेंशन और पांच सौ रुपए की चिकित्सा सहायता देने की घोषणा की थी।

भाजपा सरकार योजना लागू नहीं कर पाई और तभी सरकार बदल गई थी। कांग्रेस सरकार ने इस योजना को बंद कर दिया था। भाजपा सरकार ने जिला स्तर पर स्क्रीनिंग कमेटियां भी बनाईं थीं, मगर कांग्रेस सरकार ने उन्हें भी भंग कर दिया था।

तत्कालीन संसदीय कार्य मंत्री शांति धारीवाल के अनुसार भाजपा सरकार ने जिन 800 लोगों को पेंशन देना तय किया था, उसके पीछे उसका आरएसएस वाला मंतव्य तय था। उनका कहना है कि सूची की जांच के बाद उसमें कई आपाराधिक पृष्ठभूमि के लोग मिले थे। इसीलिए सरकार ने पेंशन योजना रद्द थी थी।

तत्कालीन कांग्रेस सरकार की यह आपत्ति भी थी कि आखिर आपातकाल के दौरान जेलों में बंद रहे नेताओं को आजादी के आंदोलन के दौरान बंदी रहे लोगों जैसा सम्मान कैसे दिया जा सकता है।

चुनावी वादा

अब 2014 की तैयारियों में जुटी राजस्थान भाजपा

तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष वसुंधरा राजे ने कांग्रेस सरकार के फैसले का कडा विरोध किया था। उनका कहना था, मीसा बंदी किसी भी तरह से स्वतंत्रता सेनानियों से कम नहीं हैं। वसुंधरा राजे ने ऐसे नेताओं की तुलना पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी से की थी।

विधानसभा चुनाव से पहले सुराज संकल्प यात्रा के दौरान वसुंधरा राजे ने मीसा बंदियों को पेंशन देने का वादा किया था, जिसे उन्होंने कैबिनेट की इस बैठक में निभा दिया। कांग्रेस सरकार ने जब योजना पर रोक लगाई थी तो लोकतंत्र रक्षा मंच नामक संगठन ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। वरिष्ठ अधिवक्ता भरत व्यास के मुताबिक अभी यह याचिका तय नहीं हुई है।

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