मंत्री की मनमर्जी, बदल दिया अकबर के घर का पता
खास बात यह है कि इस फोर्ट को भारतीय पुरातत्व विभाग संरक्षित स्मारक है। विभाग के दस्तावेजों में इसे अकबर का किला ही लिखा गया है। वहीं जानकारी के अनुसार इस किले का निर्माण अकबर ने 1570 में कराया था। जबकि से ही इसे अकबर का किला के नाम से जाना जाता है। यहां तक सरकार की ओर से 12 दिसंबर 1968 को जारी एक नोटिफिकेशन में भी इसे अकबर का किला ही कहा गया है। लेकिन मंत्री जी इतिहास को बदलने पर आमादा दिख रहें है। यही नहीं उन्होंने इस फोर्ट का नाम बदलने के लिए ना तो किसी विभाग की सलाह ली और ना ही अपनी ही सरकार को विश्वास लिया।
वहीं मंत्री जी अपने इस फैसले को तर्कसंगत बताते हुए कह रहेें हैं कि उन्होंने यह निर्णय सामान्य लोगों की भावना को ध्यान में रखते हुए लिया है। देवनानी कहते है कि इतिहास में इस फोर्ट का नाम अजमेर के नाम से ही था। हालांकि ऐतिहासिक तथ्य उनके इस दावे को गलत साबित करते हुए दिखते है। फोर्ट की एक दीवार पर मिले शिलालेख में इसका नाम अकबर का किला दर्ज हैं। माना जाता है कि यह लेख करीब तीन सौ वर्ष पुराना है। गौरतलब है कि फोर्ट का नाम बदलने के कारण मंत्री जी को जान से मारने की धमकी भी मिल चुकी है। वैसे मंत्री जी गाय और तीसरी कक्षा में बोर्ड जैसे विषयों को लेकर भी सुर्खियों में रहें है।