Mass Suicide: सामूहिक आत्महत्या के केस में राजस्थान देश में नंबर वन, जानें खुदकुशी का सबसे बड़ा कारण
नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (NCRB) की ओर से बीतें दिनों जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार पिछले साल प्रदेश में सामूहिक आत्महत्या के 22 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें 67 लोगों ने अपनी जान गंवा दी गई थी। वहीं, तमिलनाडू में सामूहिक आत्महत्या के 33 के किए गए थे, जिससे यह राज्य देश में पहले नंबर पर है।
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नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (NCRB) की ओर से बीतें दिनों जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार पिछले साल प्रदेश में सामूहिक आत्महत्या के 22 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें 67 लोगों ने अपनी जान गंवा दी गई थी। वहीं, तमिलनाडू में सामूहिक आत्महत्या के 33 के किए गए थे, जिससे यह राज्य देश में पहले नंबर पर है। इसके अलावा केरल तीसरे नंबर पर है, यहां सामूहिक सुसाइड के 12 केस सामने आए थे।
सिंगल सुसाइड केस के मामले में राजस्थान का देश में 27वें नंबर पर है। हर साल यहां आत्महत्या के मामलों में इजाफा हो रहा है। हालांकि, इस साल प्रदेश में 2020 की तुलना में साल 2021 में आत्महत्या के केस में मामूली सी बढ़ोतरी हुई है। प्रदेश में 2021 में 5593 लोगों ने आत्महत्या कर अपनी जान दे दी। वहीं, इससे पहले 2020 में 5546, 2019 में 4531, 2018 में 4333, 2017 में 4188, 2016 में 3678 और 2015 में 3457 आत्महत्याएं दर्ज की गईं थी। एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार साल 2021 में प्रदेश में प्रति एक लाख लोगों में से 7 ने आत्महत्या करने जैसा घातक कदम उठाया था।
किन कारणों से लोग दे रहे जान?
नेशनल क्राइम रिकार्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा लोग पारिवारिक कलह, बीमारी और नशे के कारण अपनी जान दे रहे हैं। वहीं, सबसे ज्यादा आत्महत्याएं पारिवारिक कलह के कारण हो रही हैं। प्रदेश में आत्महत्या करने वाले करीब 33 फीसदी लोगों ने पारिवारिक कलह के कारण खुदकुशी कर ली। 18 फीसदी लोगों ने बीमारी, 6.4 फीसदी ने नशे, 4.8 फीसदी ने वैवाहिक परेशानियों, 4.6 फीसदी ने प्रेम प्रसंग और 2 फीसदी लोगों ने बेरोजगारी से परेशान होकर जान दे दी।
इन पांच राज्यों में सबसे ज्यादा आत्महत्याएं
एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार देश में औसतन 450 लोग रोजाना सुसाइड कर रहे हैं। साल में यह आंकड़ा 1.64 लाख के करीब पहुंच जाता है। बीते साल 2020 की तुलना में 2021 में देश में आत्महत्या के सात फीसदी से ज्यादा केस बढ़े हैं। महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 22207, तमिलनाडु में 18925, मध्यप्रदेश में 14956, पश्चिम बंगाल में 13500 और कर्नाटक में 13056 आत्महत्या के मामले दर्ज किए गए। देश भर में हुईं आत्महत्यों के 50 फीसदी से ज्यादा केस इन्हीं राज्यों के हैं।