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Rajasthan: सदगरु रितेश्वर महाराज बोले- श्रीराम में जन-जन की आस्था, विवादित बयान देने वालों ने नहीं पढ़ी रामायण
Sat, 13 Jan 2024 10:10 PM IST
उदित दीक्षित
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: उदित दीक्षित
Updated Sat, 13 Jan 2024 10:10 PM IST
सार
सदगुरु रितेश्वर महाराज ने कहा- कुछ लोगों ने भगवान राम पर विवादित टिप्पणियां की हैं। ये लोग भगवान को मांस खाने वाला मान रहे हैं।
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वृंदावन के सदगुरु रितेश्वर महाराज।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वृंदावन के सदगुरु रितेश्वर महाराज मंगलवार को जयपुर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा- अयोध्या में 22 जनवरी को भव्य प्राप प्रतिष्ठा समारोह होने जा रहा है। इस पर कुछ लोगों ने विवादित टिप्पणियां की हैं। इन लोगों ने न कभी रामायण पढ़ी है और न ही संस्कृत। इन लोगों को प्राचीन भारतीय संस्कृति की जानकारी नहीं है। भगवान श्रीराम जन-जन की आस्था के केंद्र हैं। उन पर अशोभनीय टिप्पणी करना अनुचित है।
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उन्होंने कहा- ये लोग भगवान को मांस खाने वाला मान रहे हैं। जबकि, वाल्मिकी रामायण की चौपाइयों में ममसा या मनसा का तात्पर्य घने वनों में मिलने वाले फल, गूदा और कंदमूल से है। दक्षिण भारतीय मंदिर शहर श्री रंगम में जब पुजारी भगवान रंगनाथ को आम का प्रसाद चढ़ाते हैं, तो वे मंत्रोच्चारण करते हैं- "इति आम्र ममसा खंड समर्पयामिः", अर्थात् मैं भगवान को सेवन करने के लिए आम-ममसा (आम का मांस यानि मूल) चढ़ाता हूं। हमें पता होना चाहिए कि वे फल के गूदे को संदर्भित करते हैं।
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सदगुरु ने कहा कि सच्चे ज्ञान का प्रचार-प्रसार करने के लिए लोग आध्यात्म से जुड़े। प्रधानमंत्री के पूजा में बैठने पर आपत्ति वाला सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास आश्रमों में जीवन व्यतीत कर हर तरह की पूजा करता है।
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