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Rajasthan: राजनीतिक फायदे के लिए पायलट ने किया अनशन, वकील ठाकुरिया बोले- हो चुकी है खनन घोटाले की जांच
Tue, 11 Apr 2023 08:18 PM IST
उदित दीक्षित
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: उदित दीक्षित
Updated Tue, 11 Apr 2023 08:18 PM IST
सार
प्रकाश ठाकुरिया ने कहा कि खान आवंटन घोटाले में लोकायुक्त ने जांच की है। 14 महीने की जांच में मामले में तत्कालीन प्रमुख सचिव अशोक सिंघवी सहित छह अफसर दोषी पाए गए हैं। जल्द ही सरकार को रिपोर्ट साैंपकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही जाएगी।
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सीनियर एडवोकेट प्रकाश ठाकुरिया
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
राजस्थान के पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने मंगलवार को जयपुर में अनशन किया। उनके इस अनशन को सीनियर वकील प्रकाश ठाकुरिया ने नौटंकी बताया। वकील ठाकुरिया ने कहा कि सचिन पायलट जिस कथित खनन घोटाले की बात कर रहे हैं, उसकी जांच लोकायुक्त द्वारा की जा चुकी है। मामले में कई दोषी अफसर जेल भी गए हैं। उन्होंने कहा कि पायलट अपने राजनीतिक जीवन दान के लिए इस तरह के आरोप लगा रहे हैं , जो लोकायुक्त की जांच पर भी सवाल खड़े कर रहा है ये सही नहीं है।
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प्रकाश ठाकुरिया ने कहा कि खान आवंटन घोटाले में लोकायुक्त ने जांच की है। 14 महीने की जांच में मामले में तत्कालीन प्रमुख सचिव अशोक सिंघवी, संयुक्त सचिव वीपी सिंह, निदेशक डीएस मारू, तत्कालीन ओएसडी बीएस सोडा, तत्कालीन अतिरिक्त निदेशक पंकज गहलोत सहित मौजूदा ओएसडी एनएस शक्तावत को दोषी पाया गया है। जल्द ही जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी। जिसमें लोकायुक्त दोषी अफसरों पर कार्रवाई की अनुशंसा करेंगे।
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रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय खनन मंत्रालय के आदेश को दरकिनार कर राज्य में 24 नवंबर 2014 से 12 जनवरी 2015 के बीच 653 खनन पट्टों का आवंटन किया गया था। सितंबर 2015 में खान आवंटन घोटाले सामने आया था। मामले की जांच के लिए सरकार ने आरएसएमएम के प्रबंध निदेशक भानुप्रकाश एटरू की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया था। गठन के बाद कमेटी ने खान आवंटन में बड़े पैमाने पर खामियां पाई थी।
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कमेटी की सिफारिश के आधार पर सरकार ने सभी 653 खनन पट्टों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया। साथ ही पूरे मामले की जांच लोकायुक्त को सौंप दी थी। खान घूसकांड में अशोक सिंघवी और पंकज गहलोत आरोपी हैं। घूसकांड में दोनों जेल गए थे और अभी बाहर हैं। सरकार की ओर से दोनों निलंबित कर दिया गया था। इनका मुख्यालय सचिवालय में रखा गया है।
ऐडवोकेट प्रकाश ठाकुरिया ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने साल 2014 के 45 हजार करोड़ के खान आवंटन मामले में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और अन्य के खिलाफ सीबीआई जांच कराने का आदेश देने से मना कर दिया था। याचिकाकर्ता राम सिंह कसवां की ओर से वकील गौतम तालुकदार ने जस्टिस जे चेलमेश्वर और जस्टिस पीसी पंत की बेंच से कहा कि राजस्थान सरकार ने निविदा आमंत्रित किए बिना जल्दबाजी में 653 खानों का आवंटन किया था, जिसमें राज्य को कम से कम 45 हजार करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।
सुनवाई के दौरान एडिशलन सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और वकील शिवमंगल शर्मा ने राजस्थान सरकार का पक्ष रखा। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि वसुंधरा सरकार ने ही सभी लीजधारियों का आवंटन रद्द कर दिया लिहाजा इस याचिका में उन्हें अभियुक्त नहीं बनाया जा सकता है।